जिंदान मर्डर: समाजसेवी संस्थाओं की 7 सदस्यीय टीम बोली-जातिगत भेदभाव के चलते हुई हत्या

7 सितंबर को बकरास गांव के समीप केदार सिंह जिंदान की निर्मम हत्या कर दी गई थी. शुरुआती दौर में हत्या को सड़क दुर्घटना दर्शाने का प्रयास किया गया.

News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2018, 5:15 PM IST
जिंदान मर्डर: समाजसेवी संस्थाओं की 7 सदस्यीय टीम बोली-जातिगत भेदभाव के चलते हुई हत्या
जिंदान का फाइल फोटो.
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Updated: October 11, 2018, 5:15 PM IST
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से संबध रखने वाले समाजसेवी और अनुसूचित जाति से संबंधित नेता की निर्मम हत्या के मामले पर बड़ा खुलासा हुआ. मामले की जांच में जुटी विभिन्न समाजसेवी संगठनों की 7 सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट पेश कर खुलासा किया है कि जातिगत भेदभाव के चलते यह हत्या की गई.

सुनियोजित तरीके से ऊंची जाति के लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया. टीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उन्होंने जिंदान के घर से लेकर गांव, पंचायत के लोगों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से बात की. साथ ही हत्या के पीछे हर पहलू को खंगाला.

टीम का कहना है कि रूढ़िवादी सोच और जिंदान की ओर से उठाए गए भ्रष्टाचार और अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचारों के मुद्दों से प्रभावशाली लोग खासे सकते में थे. इसके चलते उसकी जान ली गई. टीम ने कहा कि स्थानीय पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है. गवाहों और जिदान के परिवार को अब भी खतरा बना हुआ है.

टीम ने स्वतंत्र एजेंसी से इस हत्याकांड की जांच की मांग की है. टीम ने साथ ही खुलासा किया कि शिलाई क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लोगों को आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक न्याय नहीं मिल रहा है.

इस क्षेत्र में भी खाप की तरह खुमली पंचायत हावी है. खुमली के चलते कई मुद्दे पुलिस तक नहीं पहुंच पाते. टीम ने सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन पर कहा कि अब तक जिंदान के परिवार को किसी तरह की मदद नहीं दी गई है.

बता दें कि इस मामले में पुलिस ने वारदात वाले दिन 7 सितंबर को ही उप-प्रधान और गोपाल सिंह को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. एसआईटी जांच कर रही है.

ये है मामला
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7 सितंबर को बकरास गांव के समीप केदार सिंह जिंदान की निर्मम हत्या कर दी गई थी. शुरुआती दौर में हत्या को सड़क दुर्घटना दर्शाने का प्रयास किया गया. लेकिन मौके पर पुलिस को मिले साक्ष्यों के आधार पर इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज किया गया था और उसी दिन उपप्रधान जयप्रकाश सहित उसके एक साथी को गिरफ्तार भी कर लिया गया था.

इस समूचे मामले में राजधानी शिमला में सीपीआईएम, बसपा सहित कई संगठनों ने जमकर हंगामा किया था. केदार सिंह के परिजनों ने इस मामले में लगभग आधा दर्जन लोगों की संलिप्तता की बात कही थी. साथ ही मामले की जांच किसी अन्य जांच एजेंसी से करवाने की भी मांग उठी थी.

कौन हैं जिंदान
केदार सिंह जिंदान पिछड़ी जातियों पर अत्याचार को लेकर आवाज उठाते थे और ऐसे मामलों को न्यायालयों तक भी ले कर जाते थे. गौरतलब यह है कि केदार सिंह ने 2007, 2012 और 2017 में शिलाई सीट से चुनाव भी लड़े थे. पिछड़े नेताओं में केदार सिंह उनके हितैषी नेता के रूप में विख्यात थे. केदार सिंह पर पहले भी 5 बार हमले हो चुके थे.
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