हिमाचल के 17 में से 10 निजी यूनिवर्सिटी के VC अयोग्य, हटाने का आदेश

वाइस चांसलर को हटाने के निर्देश दिए गए हैं.
वाइस चांसलर को हटाने के निर्देश दिए गए हैं.

हिमाचल प्रदेश में चल रहे 17 में से 10 निजी विश्वविद्यालयों (University) के वाइस चांसलर (VC) अयोग्य करार दिए गए हैं. निजी संस्थान नियामक आयोग की ओर से गठित हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने इन्हें हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं. 

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में चल रहे 17 में से 10 निजी विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर अयोग्य करार दिए गए हैं. निजी संस्थान नियामक आयोग की ओर से गठित हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने इन्हें हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं. आयोग के चैयरमेन मेजर जनरल(रि) अतुल कौशिक ने शनिवार को इन विश्वविद्यालयों के चांसलर को आदेश जारी कर दिए हैं और आदेशों पर कार्रवाई करने के लिए 10 दिसंबर तक का समय दिया गया है.

इन 10 में से 8 कुलपति, वाइस चांसलर पद के लिए यूजीसी की ओर तय की गई शैक्षिण्क योग्यताएं नहीं रखते हैं यानी कि वो कुलपति बनने के लिए पात्र नहीं हैं और 2 की उम्र ज्यादा(ओवर ऐज) है. इस फैसले से निजी विश्वविद्यालयों में हड़कंप मच गया है. 6 यूनिवर्सिटी के कुलपति योग्य पाए गए हैं जबकि फर्जी डिग्री मामले में फंसी मानव भारती यूनिवर्सिटी की जांच के चलते उसके कुलपति की योग्यता की जांच नहीं की गई.

आयोग के पास आई थी शिकायत

आयोग के चैयरमेन मेजर जनरल(रि) अतुल कौशिक ने बताया कि तीन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की योग्यता को लेकर आयोग के पास शिकायत आई थी. शिकायत के आधार पर आयोग ने एचपीयू के पूर्व कुलपति की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया और इन के अलावा सभी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की योग्यता जांचने के लिए कहा गया. कमेटी ने इनके बायो डाटा के अलावा अन्य शैक्षिण्क योग्यता के दस्तावेजों के जांचा और 10 यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अयोग्य पाए गए.


इन यूनिवर्सिटी के कुलपति अयोग्य


एमएमयू के वीसी विपिन सैणी, एपीजी यूनिवर्सिटी शिमला के कुलपति रमेश कुमार चौधरी, इटरनल विवि के वीसी देविंद्र कुमार, इक्फाई के एचपी सिंह, इंडस यूनिवसिटी के सुब्रह्मयण्म रमन अय्यर, अर्नी यूनिवर्सिटी के संजीव कुमार, चितकारा यूनिवर्सिटी के वीसी, बाहरा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरूण शर्मा अयोग्य पाए गए हैं. अरूण शर्मा पूर्व आईएएस अधिकारी रहे हैं और शिक्षा सचिव भी रह चुके हैं. इनके अलावा शुलिनी विवि के वाइस चांसलर पीके खोसला और बद्दी यूनिवर्सिटी के कुलपति तिलक राज भारद्वाज की उम्र ज्यादा पाई गई है यानी कि ये दोनों ओवर एज हैं.

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6 विवि के वीसी योग्य


महाराज अग्रसेन यूनवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर आरके गुप्ता, आईसी विवि की वीसी प्रो.अंजु सक्सेना, अभिलाषी विवि के प्रो.एचएस बनयाल,जेपी विवि के प्रो. विनोद कुमार, श्री सांई विवि के प्रो.राजेंद्र सिंह राणा और कैरियर प्वाइंट यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.करतार सिंह वर्मा योग्य पाए गए हैं.
हाई पावर कमेटी में थे तीन सदस्य


हाई पावर कमेटी में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और उच्च शिक्षा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में यह कमेटी बनी थी. कमेटी में तकनीकी विवि के वाइस चांसलर प्रो. एसपी बंसल और सरदार वल्लभ भाई पटेल कलस्टर विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. सीएल चंदन शामिल थे.


ये बोले आयोग के चैयरमेन और सदस्य


आयोग के चैयरमेन ने कहा कि इन विवि के कुलाधिपति (चांसलर) को निर्देश दिए हैं कि वह इस पर आगामी कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि ये अयोग्य हैं,इन्हें हटाना ही पड़ेगा. साथ ही कहा कि अयोग्य कुलपतियों को अपनी बात रखने के लिए एक मौका दिया जाएगा. 10 दिसंबर तक इसकी अनुपालना रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) आयोग को देने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि कमेटी की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही दो निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपने इस्तीफें दे दिए थे. आयोग के सदस्य प्रो. कमलजीत सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ती 7.3 यूजीसी गाइडलाइन रेगुलेशन 2018 के तहत की जाती है. यूजीसी नियमों के अनुसार कुलपति लगने के लिए 10 साल तक प्रोफेसर रहना आवश्यक है. इसके अलावा प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए. रिसर्च एंड पब्लिकेशन के भी नंबर होते हैं. इसके अलावा 65 और 70 साल आयु सीमा तय की गई है. यूजीसी नियमों के तहत 70 साल तक कुलपति लग सकते हैं जबकि राज्य सरकार के नियमों के तहत आयु सीमा 65 साल निर्धारित की गई है.
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