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13 साल में भी नहीं शुरू हो पाई 100 MW की उहल जल विद्युत परियोजना

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 18, 2019, 7:53 PM IST
13 साल में भी नहीं शुरू हो पाई 100 MW की उहल जल विद्युत परियोजना
परियोजना में देरी से 1000 करोड़ से ज्यादा का हुआ नुकसान

घाटे में चल रहे बोर्ड के लिए यह परियोजना किसी संजीवनी से कम नहीं थी, लेकिन इस पर भी सरकारी तंत्र की लचर कार्यप्रणाली भारी पड़ रही है और राजस्व की हानि हो रही है.

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शिमला. सरकारी तंत्र की खराब कार्यप्रणाली का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि एक परियोजना के निर्माण में ही एक दशक से भी ज्यादा समय बीत जाए और प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाए. ऐसी कार्यप्रणाली हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड (Himachal State Electricity Board) की भी है.
मंडी (Mandi) जिले के जोगिंदनगर में 100 मेगावाट की उहल जल विद्युत परियोजना (Uhl Hydropower Project) का निर्माण कार्य साल 2007 में शुरू हुआ था. 5 साल के भीतर प्रोजेक्ट तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया था. 13 साल बीतने वाले हैं, लेकिन बिजली पैदा नहीं हो पाई है. बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन (Electricity Board Employees Union) ने इसके लिए बोर्ड के इंजीनियरों और एमडी जेपी काल्टा को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.

लापरवाही के लगाए गए कई आरोप

इस प्रोजेक्ट में लापरवाही के कई आरोप लगाए गए हैं. कर्मचारियों का कहना है कि टेक्नोक्रेट्स की लापरवाही से अब इस प्रोजेक्ट की लागत 4 गुणा बढ़ गई है. उहल स्टेज-थ्री परियोजना के निर्माण पर 479 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान था, लेकिन देरी के चलते अब लागत 1400 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. इसके चलते सरकार पर बोझ बढ़ा है और अब तक करीब 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. घाटे में चल रहे बोर्ड के लिए यह परियोजना किसी संजीवनी से कम नहीं थी, लेकिन इस पर भी सरकारी तंत्र की लचर कार्यप्रणाली भारी पड़ रही है और प्रदेश को राजस्व की हानि हो रही है.

बोर्ड की दलील थी कि कठिन परिस्थितियों और आपदाओं के चलते निर्माण कार्य में देरी हुई है. साथ ही टनल निर्माण में देरी भी एक बड़ी वजह थी. 2 कंपनियां काम छोड़कर भाग गई थीं. कर्मचारी यूनियन का कहना है कि प्रदेश में अन्य कंपनियां भी विपरीत परिस्थितियों में प्रोजेक्ट बना रही हैं, लेकिन उनका काम
समय पर पूरा हो जाता है.

एमडी का कहना है कि बांध में पानी भर दिया गया है और दिसंबर माह में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा.

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घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल का मामला सामने आया

बता दें कि इस परियोजना के पैन स्टॉक में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल होने का मामला भी सामने आया था. टेस्टिंग के दौरान खामी आई थी और घटिया स्टील का इस्तेमाल होने की बात सामने आई थी. बोर्ड के नए एमडी जेपी काल्टा ने फरवरी 2018 में बयान दिया था कि अप्रैल महीने में उत्पादन शुरू हो जाएगा. 1 साल 9 महीने बीत गए, लेकिन परियोजना शुरू नहीं हो पाई. अब एमडी कह रहे हैं कि बांध में पानी भर दिया गया है और दिसंबर माह में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा.

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First published: October 18, 2019, 7:53 PM IST
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