हिमाचल में लाइफ सपोर्ट 108 और 102 एंबुलेंस सेवा खुद वेंटिलेटर पर, वेतन नहीं सिर्फ आश्वासन के आसरे काम चला रहे कर्मचारी

एंबुलेंस कर्मचारियों (Ambulance Employees) को न्यायालय (Court) के आदेश के बाद भी कंपनी की ओर से ना तो पूरी सैलरी दी जा रही है और ना ही उन्हें ईपीएफ का कोई हिसाब दिया जा रहा है.
एंबुलेंस कर्मचारियों (Ambulance Employees) को न्यायालय (Court) के आदेश के बाद भी कंपनी की ओर से ना तो पूरी सैलरी दी जा रही है और ना ही उन्हें ईपीएफ का कोई हिसाब दिया जा रहा है.

एंबुलेंस कर्मचारियों (Ambulance Employees) को न्यायालय (Court) के आदेश के बाद भी कंपनी की ओर से ना तो पूरी सैलरी दी जा रही है और ना ही उन्हें ईपीएफ का कोई हिसाब दिया जा रहा है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में लाइफ सपोर्ट 108 और 102 एंबुलेंस सेवा (Ambulance Service) खुद वेंटिलेटर पर है. ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रदेश में आश्वासन के आसरे ही एंबुलेंस कर्मचारी अपना काम कर रहे हैं. हिमाचल में एंबुलेंस सेवा जीवीके कंपनी की ओर से मुहैया कराई जाती है. लेकिन एंबुलेंस कर्मचारियों को न्यायालय (Court) के आदेश के बाद भी कंपनी की ओर से ना तो पूरी सैलरी दी जा रही है और ना ही उन्हें ईपीएफ का कोई हिसाब दिया जा रहा है. वहीं सरकार भी इन एंबुलेंस कर्मचारियों को कंपनी के भरोसे छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का काम कर रही है.

कर्मचारियों को ना वेतन, ना सुविधा

ऐसा पहली बार नहीं है कि कंपनी की ओर से एंबुलेंस कर्मचारियों के साथ ज्यादती की जा रही है. सरकार की बार-बार दखल के बाद कुछ दिनों के लिए एंबुलेंस कर्मचारियों को कुछ राहत तो मिलती है, लेकिन कुछ समय बाद कंपनी फिर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने पर उतर आती है. कोरोना काल में एंबुलेंस कर्मचारी प्रदेश में बिना रुके 24 घंटे अपनी सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं. लेकिन सुविधाओं की बात की जाए तो जब यही कर्मचारी किसी मरीज के संपर्क में आने से पॉजिटिव हो जाते हैं, तो स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर उन्हें क्वारंटाइन होने के लिए घर भेज दिया जाता है. इसके अलावा उन्हें कोई और सुविधा मुहैया नहीं करवाई जाती है.



एनएचएम में मर्ज करने की मांग 
कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष पूरन चंद ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार और कंपनी के इस तरह के रवैए से एंबुलेंस कर्मचारियों में रोष है. एंबुलेंस कर्मचारी सरकार से काफी समय से उन्हें एनएचएम में मर्ज करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन सरकार इस ओर कोई गौर नहीं कर रही है. वहीं कंपनी भी कर्मचारियों को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद भी कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है. ईपीएफ घोटाले में संबंधित अधिकारी पर भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

बतौर पूरन चंद प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत करवाया जाता है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर रही है. आखिरकार सरकार कंपनी पर कोई भी कार्रवाई करने से इतना क्यों कतरा रही है ? ऐसे में अब कर्मचारियों की यही मांग है कि कंपनी पर 1 सप्ताह के अंदर ठोस कार्रवाई की जाए और कंपनी के राज्य प्रबंधक को हटाया जाए.
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