12 हिमालयी राज्यों के सीएम मसूरी में 28 जुलाई को मिलेंगे, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चाएं

हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर उत्तराखंड के मसूरी रवाना होने से पहले

हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर उत्तराखंड के मसूरी रवाना होने से पहले

हिमालय के तट में बसे 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन 28 जुलाई से उत्तराखंड के मसूरी में होने जा रहा है.

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हिमालय के तट में बसे 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन 28 जुलाई से उत्तराखंड के मसूरी में होने जा रहा है. इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर भी आज यानि 27 जुलाई से उत्तराखंड के दौरे पर रहेंगे. सीएम जयराम शिमला स्थित अनादेल हेलिपेड पहुंचकर मौसम के खुलने का काफी देर इंतजार करते रहे. लगातार हो रही बारिश और धुंध के बीच वे सड़क मार्ग से हरिद्वार के लिए निकल गए. वे पहले हरिद्वार जाएंगे. वहां सीएम हर की पैड़ी में स्नान करेंगे और उसके बाद भगवान शिव का दर्शन करेंगे. इसके बाद वे उत्तराखंड के मसूरी के लिए निकलेंगे.



हिमालयी राज्यों की समस्या दूसरे राज्यों से बिल्कुल अलग हैं : सीएम



Cm jairam Thakur- सीएम जयराम ठाकुर
हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर उत्तराखंड के मसूरी रवाना होने से पहले फरियाद सुनते हुए






उत्तराखंड रवाना होने से पहले सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमालयी राज्यों की समस्याएं अलग तरह की हैं. सभी हिमालयी राज्य आमतौर पर छोटे प्रदेश हैं और इन राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां भी कठिन हैं. गौरतलब है कि बीते साल हिमालयन राज्यों का सम्मेलन शिमला में हुआ था. इस बार उत्तराखंड इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है.
यहां इन मुद्दों पर होगी चर्चाएं



हिमालयन कान्क्लेव में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, वन अधिनियम व वन क्षेत्र की अधिकता जैसे विषयों के अलावा जल संरक्षण विषय पर भी चर्चा होनी है. इस सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 15 वे वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह के आने की भी संभावना है. 12 हिमालयी राज्यों में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, असम और पश्चिम बंगाल शामिल है.



कल से शुरू होगा सीएम का सम्मेलन



वे कल मसूरी में सभी हिमालयी राज्यों के साथ मिलकर आ रही चुनौतियों पर चर्चा करेंगे. हिमालयी राज्य पर्यावरण बचाने की एवज में ग्रीन बोनस देने की मांग केंद्र सरकार से कर सकते हैं. इसके साथ ही वे हिमालयी राज्यों के लिए अलग से मंत्रालय देने का प्रस्ताव भी पारित करवाने की मांग कर सकते हैं.



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