53% छात्र A और B ग्रेड हासिल नहीं कर पाए, लाहौल स्पीति सबसे अव्वल

हिमाचल में स्कूली बच्चों के परिणाम अच्छे नहीं आए हैं

करीब 6 लाख छात्रों में लगभग 2 लाख छात्र ही ए और बी ग्रेड की श्रेणी में हैं.

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हिमाचल में गुणात्मक शिक्षा में गिरावट का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहली से 8वीं कक्षा तक के परीक्षा परिणामों की जो रिपोर्ट सामने आई है, वो गुणात्मक शिक्षा देने के दावों की हवा निकाल रही है. वर्ष 2018-19 के परीक्षा परिणामों पर शिक्षा विभाग की ऑनलाइन रिपोर्ट के मुताबिक 53 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं, जो ए और बी ग्रेड हासिल नहीं कर पाए. करीब 6 लाख छात्रों में लगभग 2 लाख छात्र ही ए और बी ग्रेड की श्रेणी में हैं.

ओवरआॅल प्रदर्शन ​थोड़ा बेहतर

पूरे परिणामों का अध्ययन करें तो बीते साल की तुलना में थोड़ी बढ़ौतरी जरूर है. शिक्षा के बजट में बढ़ौतरी और कई योजनाओं के बीच सरकार के तमाम दावों के बावजूद परीक्षा परिणाम में मात्र 2 प्रतिशत का ही सुधार हुआ, जो कि दावों के लिहाज से बेहद कम है. स्कूलों में बच्चों की संख्या जरूर बढ़ी है, लेकिन गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है.

लाहौल स्पीति का परिणाम सबसे बेहतर

वर्ष 2017-18 में परीक्षा परिणाम 45 रहा और 2018-19 में 47.8 प्रतिशत तक पहुंचा है. अपर प्राइमरी के मुकाबले लोअर प्राइमरी के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. जनजातीय जिला लाहौल-स्पिति 63 प्रतिशत परिणाम के साथ शीर्ष पर हैं जबकि चंबा और सिरमौर जिले सबसे पीछे चल रहे हैं.

चंबा और सिरमौर सबसे पीछे

सिरमौर जिले का इस साल का परिणाम 38.3 तो चंबा का मात्र 37.9 फीसदी रहा. हमीरपुर का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत, मंडी का 54 फीसदी, कांगड़ा का 54, बिलासपुर का 43, किन्नौर का 50, शिमला का 49, ऊना का 49, कुल्लू 44 और सोलन जिले का रिजल्ट मात्र 43 फीसदी रहा.

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