News-18 की खबर का असर, मजदूरों को मिली खून-पसीने की कमाई, मालिक ने लौटाए 2 लाख रुपये

6 मजदूरों ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को चिठ्ठी लिख कर मदद की गुहार लगाई है.

6 मजदूरों ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को चिठ्ठी लिख कर मदद की गुहार लगाई है.

बिहार के रहने वाले मजदूरों ने एक व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. उनका आरोप था कि शिमला जिले की सुन्नी तहसील के गाड़ाहू गांव में एक व्यक्ति की बिल्डिंग का काम किया, लेकिन अब वो पैसा देने से इनकार कर रहा है. करीब 2 लाख 10 हजार रुपये बकाया हैं.

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शिमला. मजूदरों के हक को लेकर News-18 की खबर का असर हुआ है. हिमाचल के शिमला जिले के सुन्नी क्षेत्र में बिहार के रहने वाले 8 मजदूरों की गाढ़ी कमाई पर एक भवन मालिक कुंडली मारकर बैठा था, दिहाड़ी का 2 लाख रुपये से ज्यादा पैसा देने से इनकार कर रहा और मजदूरों को धमका रहा था और घर से बाहर भी निकाल दिया था. News 18 ने मामले को प्रमुखता से उठाया था और अब मजूदरों को उनके हक का पैसा मिल गया है. इतना ही नहीं, मजदूरों ने हिसाब-किताब में 24 हजार 250 रुपये. छोड़ भी दिए हैं. मजदूरों को 1 लाख 82 हजार 950 रुपये मिले हैं.

इस बाबत मजदूरों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी चिठ्ठी लिखी थी. इस खबर पर बिहार सरकार ने संज्ञान लिया. दिल्ली में बिहार भवन में कार्यरत अधिकारी कौशलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ज्वाइंट लेबर कमिश्नर कुमार दिग्विजय ने इस मामले पर शिमला के डीएम और लेबर कमिश्नर से बात की. इस पर एसडीएम ने नाइब तहसीलदार भूप राम ठाकुर को मौके पर भेजा और मामले में हस्तक्षेप किया.

मजदूरों ने बिहार के मुख्यमंत्री और गम्हरिया क्षेत्र के विधायक का धन्यवाद किया. शिमला के सुन्नी के गाड़ाहु गांव में मजदूरों के साथ ये वाक्या सामने आया था.

मजदूरों ने स्थानीय ग्राम पंचायत की प्रधान पूनम सूर्यवंशी और उप प्रधान जगदीश वर्मा का भी धन्यवाद किया. इन्होंने मजदूरों को सिर ढकने की जगह दी थी. मजदूरों का कहना है कि पिछले 5 दिनों से वो बिना दिहाड़ी के बैठे हैं, कोई काम नहीं है. अब वो घर जाना चाहते हैं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के चलते यातायात सेवाएं बंद हैं और गाड़ी का खर्च नहीं उठा पाएंगे. मजदूरों ने यातायात की व्यवस्था करने की मांग की है और साथ ही कहा कि वो गाड़ी का किराया देने के लिए तैयार हैं.
ये था पूरा मामला

शिमला में मजदूरों के साथ धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया था. बिहार के रहने वाले मजदूरों ने एक व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. उनका आरोप था कि शिमला (Shimla) जिले की सुन्नी तहसील के गाड़ाहू गांव में एक व्यक्ति की बिल्डिंग का काम किया, लेकिन अब वो पैसा देने से इनकार कर रहा है. करीब 2 लाख 10 हजार रुपये बकाया है. इस बाबत 6 मजदूरों ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को चिठ्ठी लिख कर मदद की गुहार लगाई और चिठ्ठी की प्रतिलिपि हिमाचल के उद्योग मंत्री को भी भेजी है. चिठ्ठी में मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाए थे.

लेटर में क्या लिखा था



मुख्यमंत्री को लिखी चिठ्ठी में मजदूरों ने लिखा था, ‘ मुख्यमंत्री महोदय हम दिहाड़ीदार श्रमिक हैं और रंग-रोगन काम करके अपना और अपने परिवार की आजिविका चलाते हैं. हम सभी बिहार प्रदेश के रहने वाले हैं. 11 मार्च 2021 को ग्राम गाड़ाहु तहसील सुन्नी, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश में मोती राम वर्मा की बिल्डिंग में कार्य करना शुरू किया. हमारी दिहाड़ी 700 रुपये और 800 रुपये. प्रतिदिन निर्धारित की गई थी. आज 2 महीने पूरे हो गए हैं और मालिक ने हमे पैसा नहीं दिया है. जब-जब पैसा मांगने जाते हैं तो मालिक और उनका बेटा हरिकृष्ण वर्मा ऊर्फ पिंकू पैसा देने से इनकार करते हैं और मारने की धमकी दी जाती है.

कोरोना के चलते परेशानी बढ़ी

मजदूरों का आरोप है कि हमें बिना पैसा लिए यहां से भागने के लिए कहा जाता है, हमें मारने के लिए दराट भी लेकर आता है. हम गरीब लोग हैं और पिछले 2 महीने से घर के लिए कुछ भी पैसा नहीं भेज पाए हैं. कोरोना के चलते हमें और हमारे परिवारों को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है. हमारा राशन भी खत्म होने को आ गया है पास में कोई पैसा नहीं होने के कारण राशन खरीदने में भी असमर्थ हैं. मालिक का बेटा हमें यहां की पुलिस से पिटवाने की धमकी देता है. ऐसे माहौल में हम पराये प्रदेश में किस से मदद मांगे, यहां हमारो कोई नहीं है. आपसे विनती है कि किसी तरह से हमको बचाएं और हमारी दिहाड़ी से कमाए हुए पैसे दिलवाने की कृपा करें. हम सभी का लगभग 2 लाख 10 हजार रू. बकाया है’.

मालिक ने नहीं उठाया फोन

इस चिठ्ठी में ठेकेदार ने अपना नाम बचन पौदार लिखा है, ये फुलकाहा,जिला मधेपुरा थाना गम्हरिया बिहार का रहने वाला है. इसने अपने 6 मजदूरों का नाम और पता भी लिखा है. इस बाबत भवन मालिक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन काफी फोन नहीं उठाया. काफी बार फोन किया गया लेकिन कोई उत्तर नहीं मिल पाया. इस मामले में मजदूरों ने जिन पर आरोप लगाए हैं, उनका पक्ष आना अभी बाकी है.

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