सोलन के बाद अब शिमला की बारी? जर्जर हालत में 300 से ज्यादा मकान

अब जल्द ही राजधानी शिमला में नगर निगम असुरक्षित भवनों की सूची तैयार करेगा और जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. शिमला शहर में मौजूद साल पुरानी जर्जर हाल ईमारतें कभी भी धराशाही हो सकतीं है. मॉनसून के दौरान हादसे का खतरा ज्यादा है.

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 16, 2019, 10:28 AM IST
सोलन के बाद अब शिमला की बारी? जर्जर हालत में 300 से ज्यादा मकान
शिमला की बैंटनी कैसल बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है. हालांकि, सरकार 25 करोड़ से इसका कायाकल्प करेगी.
Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 16, 2019, 10:28 AM IST
प्रशासन हमेशा कोई बड़ी घटना होने के बाद ही क्यों जागता है? ये सवाल इसलिए क्योंकि सोलन जिले में कुमारहट्टी में हुए चार मंजिला इमारत के धराशाई होने के बाद दूसरे जिलों के प्रशासन के कान खडे हो गए हैं.

अब जल्द ही राजधानी शिमला में नगर निगम असुरक्षित भवनों की सूची तैयार करेगा और जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. शिमला शहर में मौजूद साल पुरानी जर्जर हाल ईमारतें कभी भी धराशाही हो सकतीं है. मॉनसून के दौरान हादसे का खतरा ज्यादा है.

दो दिन में मांगी गई रिपोर्ट
शहर का जिम्मा सम्भालने वाला नगर निगम शहर में मौजूद असुरक्षित भवनों की सूची तैयार करेगा. इसके बाद जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. इस कार्य एपी ब्रांच के सभी जेई अपने संबंधित वार्डो में असुरक्षित भवनों व इमारतों का निरीक्षण कर दो दिनों में रिपोर्ट सौंपेगे. इसके साथ ही संयुक्त आयुक्त की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी मंगलवार एक आवेदन प्राप्त असुरक्षित 7 भवनों का निरीक्षण करेंगी. कृष्णानगर और कार्ट रोड़ पर भी असुरक्षित भवनों का निरीक्षण किया जाएगा. इससे पूर्व कमेटी 7 असुरक्षित भवनों का पहले ही निरीक्षण कर चुकी है, जिसमें से ऐतिहासिक वाईडब्ल्यूसीएम भवन भी शामिल है. इसका मुरम्मत कार्य करवाया जाना है.

शिमला में कई मकान टूटने की कगार पर हैं.


अंग्रेजों के समय बनी हैं इमारतें
बता दें कि मौजूदा समय में दर्जनों ऐसी ईमारतें व भवन हैं, जो अंग्रजों के समय में बने हैं. इसमें से अधिकतर ईमारतें धज्जी से बनाई गई है, यानी मिटटी और लकडी से बनाई गई हैं. ऐसे भवनों में से कुछ का अच्छा रखरखाव किया गया है. लेकिन कुछ इमारतें कई साल से किराय पर हैं. वहीं कम किराया होने पर अधिकतर किरायादार असुरक्षित भवनों में ही डेरा जमाए बैठे हैं.
Loading...

कई मकान अनसेफ घोषित
राजीव शर्मा, आर्किटेक्ट प्लानर, नगर निगम शिमला के अनुसार, 40 से ज्यादा अनसेफ भवन शहर पर खतरा बनकर मंडरा रहे हैं. ये कभी भी ढह सकते हैं. शहर में कई भवन ऐसे भी हैं जो सालों पहले अनसेफ घोषित हो चुके हैं, लेकिन मालिकों और किरायेदारों के विवाद के चलते ये आज तक खाली नहीं किए गए. कई भवन बाजारों में खड़े हैं जो दूसरे भवनों पर भी खतरा बनकर मंडरा रहे हैं. नगर निगम इन्हें खाली करने के ऑर्डर तो जारी किए हैं, लेकिन इन्हें तोड़ने की जिम्मेदारी भवन मालिक पर है. ज्यादातर भवन मालिकों ने पुराने भवन नहीं तोडे हैं.

यहां-यहां ज्यादा खतरा
निगम प्रशासन के अनुसार शहर में 300 से ज्यादा भवन ऐसे भी हैं, जो जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं. ज्यादातर पुराने भवन लोअर बाजार, रामबाजार, कृष्णानगर, लक्कड़ बाजार, सब्जी मंडी एरिया में है. इन इलाकों में बारिश के दौरान जहां भारी भूस्खलन का खतरा रहता है तो मुख्य बाजार होने के कारण सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ भी यहीं रहती है. जर्जर हो चुके कई भवन कभी भी धराशायी होकर बड़ी तबाही मचा सकते हैं.

मौके का दौरा किया
रविवार को निगम संयुक्त आयुक्त अनिल शर्मा और उनकी टीम ने रीगल और बैनमोर वार्ड में एक पुराने भवन का निरीक्षण किया और इस टीम ने सोमवार को भी सात अन्य भवनों का निरीक्षण किया. शहर में करीब 40 भवन अनसेफ हैं जिन्हें खाली करने के नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं. जो लोग खाली नहीं कर रहे, उन्हें दोबारा नोटिस देंगे.

ये भी पढ़ें: सोलन हादसा: दोनों बेटों के सामने इमारत के साथ जमींदोज हो गई मां

सोलन बिल्डिंग हादसा: खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, 13 जवानों समेत 14 की मौत

जिंदा को मृत दिखा अफसर पर 62 लाख रुपये हड़पने का आरोप, बेल पर सुनवाई टली

72 फीट के श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए 18 हजार फीट की चढ़ाई चढ़ते हैं भक्त

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए शिमला से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 16, 2019, 10:19 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...