लाहौल-स्पीति की 'चिनल' को बचाने के लिए AMU में हो रहा शोध

हिमाचल प्रदेश की चिनल भाषा के संरक्षण को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शोध किया जा रहा है.

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 23, 2019, 7:08 PM IST
लाहौल-स्पीति की 'चिनल' को बचाने के लिए AMU में हो रहा शोध
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चिनल भाषा पर चल रहा है शोध
Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: June 23, 2019, 7:08 PM IST
संस्कृत भाषा से लगभग मिलती जनजातीय भाषा चिनल के संरक्षण को लेकर आज इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में मंथन किया गया. जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के कुछ इलाकों में बोली जाने वाली यह पौराणिक भाषा लुप्त होने के कगार पर है. चिनल पर संस्कृत का गहरा प्रभाव दिखता है. इसे संस्कृत भाषा परिवार की एक सदस्य के बतौर जाना-समझा जा सकता है. यह भाषा हिंदी से भी मिलती-जुलती है और इसका व्याकरण और शब्दकोष भी है. इस भाषा के संरक्षण में जुटे हुए लोगों का कहना है कि इस भाषा पर शोध होना जरूरी है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 6 साल से हो रहा है शोध

हिमाचल सरकार को इस ओर कदम उठाने की जरूरत है. इस भाषा का संस्कृत से सीधा जुड़ाव है. यह भाषा पौराणिक गाथाओं से लेकर जनजातीय संस्कार तक समेटे हुए है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी पिछले 6 सालों से चिनल भाषा पर शोध कर रहे हैं.

भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने भरोसा दिया

अब भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने चिनल भाषा पर कार्य करने का भरोसा दिया है.

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First published: June 23, 2019, 7:04 PM IST
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