Himachal Fake Degree Case: 2014-17 सत्र में LLB में दी गई 33 डिग्री, छात्र केवल 9!

 मानव भारती विश्वविद्यालय की भी जांच चल रही है.
मानव भारती विश्वविद्यालय की भी जांच चल रही है.

Himachal Fake Degree Case Update: एपीजी विश्वविद्यालय (APG University) के खिलाफ एक और पूर्व छात्र ने सीआईडी (CID) के पास अपने बयान दर्ज करवाया है. छात्र ने चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के फर्जी डिग्री (Fake Degree Case) मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. अब सीआईडी सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि मामले में फंसे शिमला स्थित एपीजी विश्वविद्यालय के खिलाफ एक और पूर्व छात्र ने सीआईडी के पास अपने बयान दर्ज करवाए हैं. बयान में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं, जिनको वैरिफाई किया जाना है. सीआईडी (CID) सूत्रों के मुताबिक, एपीजी यूनिवर्सिटी ने जो रिकॉर्ड दिया है उसके अनुसार 2014-2017 सत्र में एलएलबी (LLB) कोर्स में यूनिवर्सिटी की ओर से 33 डिग्रियां दी गई, लेकिन इस पूर्व छात्र के बयान के अनुसार उसके साथ केवल 9 छात्र ही पढ़े हैं. ये पूर्व छात्र वर्तमान में नौकरी करता है और 2014-17 सत्र में एलएलबी का कोर्स किया है. छात्र के बयान सीआईडी थाना में दर्ज करवाए गए हैं.


अभी और होंगे बयान

सूत्रों का कहना है कि अभी और भी पूर्व छात्रों और कर्मचारियों के बयान लिए जाएंगे. अपने बयान में जो भी बातें कही जाएंगी उनको क्रॉस चैक किया जाएगा और रिकॉर्ड लिया गया है. उससे मिलान किया जाएगा. आपको बता दें कि फर्जी डिग्री के मामले में एपीजी यूनिवर्सिटी के खिलाफ सीआईडी ने एफआईआर दर्ज की है और मामले की जांच जारी है.




मानव भारती के खिलाफ जांच जारी


वहीं दूसरी ओर इस मामले में  मानव भारती विश्वविद्यालय की भी जांच चल रही है. 23 सितंबर को इस मामले पर दिल्ली से छठी गिरफ्तारी की गई थी. दिल्ली से गिरफ्तार केवल शर्मा को सोलन लाकर पूछताछ की जा रही है. शनिवार को आरोपी का पुलिस रिमांड खत्म हो रहा है, ऐसे में आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा. आरोपी ने 2010-2013 के सत्र के दौरान बी. कॉम की डिग्री ली थी. जांच में ये डिग्री फर्जी निकली थी. जानकारी मिली है कि आरोपी ने बतौर छात्र ये डिग्री नहीं ली है, बल्कि इसे खरीदी है. आपको बता दें कि मानव भारती पर लाखों फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने का आरोप लगा है.

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सीआईडी खंगाल रही रिकॉर्ड

बता दें कि कुछ समय पहले एपीजी विवि में सीआईडी की टीम ने चार दिनों तक रेड कर रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लिया था. साथ ही विवि के कम्प्यूटर्स से हार्ड डिस्क ली गई है. FSL लैब भेजा गया है. जांच में ये भी पता चला है कि एपीजी प्रशासन ने साल 2019 तक का अधिकतर रिकॉर्ड जला दिया है. एक अवैध कमेटी गठित कर रिकॉर्ड को नष्ट किया गया है.

परीक्षा शाखा में जिस रजिस्टर में छात्रों द्वारा परीक्षा में लिए गए अंकों के रिकॉर्ड समेत अन्य जानकारी दर्ज होती है, वो रजिस्ट्रर जांच टीम को दिया गया है. उत्तर पुस्तिका में छात्रों को जो अंक मिलते हैं, उसका रिकॉर्ड शिक्षकों के पास भी होता है. आशंका इस बात की है कि शिक्षकों के पास मौजूद रिकॉर्ड और रजिस्ट्रर में दर्ज रिकॉर्ड में गड़बड़ी है. कई जगहों पर 8-9 शिक्षकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं.
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