स्मृति शेष: अंत तक सेब बागवानों की लड़ाई लड़ते रहे BJP के पूर्व मंत्री और MLA नरेंद्र बरागटा

सीएम जयराम ठाकुर के साथ नरेंद्र बरागटा. (FILE PHOTO)

सीएम जयराम ठाकुर के साथ नरेंद्र बरागटा. (FILE PHOTO)

BJP Leader Narender Bragata Passes Away: नरेंद्र बरागटा ने 1978 से 1982 तक युवा मोर्चा का दायित्व संभाला. उसके बाद 1983 से 1987 तक भाजपा जिला महामंत्री रहे. कदम दर कदम आगे बढ़ते हुए 1993 से 1998 तक भाजपा किसान मोर्चा की कमान संभाली. इस दौरान फल उत्पादक संघ और एचपीएमसी बोर्ड में बागवानों का प्रतिनिधित्व करते रहे. वह पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के काफी करीबी रहे.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के शिमला (Shimla) जिले से विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा का शनिवार सुबह निधन हो गया. वह चंडीगढ़ में जिंदगी की जंग हार गए. बीते 15 दिन से वह पीजीआई (PGI) में भर्ती थे और कोरोना से स्वस्थ होने के बाद उनके फेफड़ों में संक्रमण हो गया था. नरेंद्र बरागटा को हिमाचल की सेब बेल्ट के नेता के तौर पर जाना जाएगी. वह दो बार प्रदेश सरकार में बागवानी मंत्री रहे थे.

बरागटा साल 1998 और 2007 की धूमल सरकार में बागवानी मंत्री रहे. पहले कार्यकाल में बागवानी राज्य मंत्री थे, लेकिन उन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया था. साल 2007 में प्रेम कुमार धूमल की सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें कैबिनेट दर्जा दिया गया. साथ ही बागवानी विभाग के अलावा तकनीकी शिक्षा विभाग का जिम्मा दिया गया था. उस दौलान स्वास्थ्य मंत्री डॉक्‍टर राजीव बिंदल के त्यागपत्र देने के बाद स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी उन्‍हें सौंपा गया. नरेंद्र बरागटा अंत तक बागवानों के हक की आवाज उठाते रहे. वह सेब पर आयात शुल्‍क बढ़ाने की लड़ाई लड़ते रहे.

बागवानों के लिए किया था काम

हिमाचल में पहली बार एंटी हेलगन स्थापित करने का श्रेय दिवंगत नरेंद्र बरागटा को जाता है. उन्होंने धूमल सरकार के समय बागवानी मंत्री के तौर पर बागवानों की करोड़ों की सेब फसल को ओलों से बचाने के लिए जुब्बल-कोटखाई में पहली बार एंटी हेल गन स्थापित करवाई थी. खुले बाजार से सीमित दवाएं खरीदने के फैसले पर बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह और पूर्व मंत्री बरागटा में तकरार हो गई थी. धूमल सरकार में बागवानी मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर इस संबंध में लिए फैसले को वापस लेने की मांग की थी. बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा था कि एचडीओ दवा विक्रेता ही बन गए थे. बरागटा ने चिट्ठी में कहा था कि हाल में सरकार ने बागवानी विस्तार केंद्रों के माध्यम से स्प्रे की दवाइयों की बिक्री रोकने और खुले बाजार में सीमित दवाइयां देने का निर्णय लिया है, इसे तुरंत वापस लिया जाए. बागवानी विभाग के विक्रय केंद्रों से ही दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. उन्होंने सात अन्य मुद्दे भी उठाए थे.

शिमला में दीपकमल में दिवंगत नरेंद्र बरागटा को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम और अन्य नेता.

सीएम, राज्यपाल और शांता कुमार ने जताया दुख

नरेंद्र बरागटा की सक्रिय राजनीति में शुरुआत शिमला से हुई थी. वर्ष 1998 में उन्होंने शिमला से पहला चुनाव जीता. उसके बाद उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री पद मिला. उसके बाद वह जुब्बल कोटखाई विधानसभा चुनाव से सियासत करते रहे. 2002 में जुब्बल से हार गए, लेकिन 2007 में जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से दूसरा चुनाव जीते और मंत्री बने. 2012 में उन्हें फिर कांग्रेस के पूर्व सीएम रामलाल ठाकुर के बेटे रोहित के हाथों हार मिली. उसके बाद 2017 में तीसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा में लौटे. उनके निधन प्रदेश सीएम जयराम ठाकुर, कांग्रेस नेता मुकेश अग्निहोत्री के अलावा, सूबे के तमाम नेताओं ने दुख जताया है.



पीएम मोदी के साथ बरागटा. (FILE PHOTO)

धूमल के करीबी थे

नरेंद्र बरागटा ने 1978 से 1982 तक युवा मोर्चा का दायित्व संभाला. उसके बाद 1983 से 1987 तक भाजपा जिला महामंत्री रहे. कदम दर कदम आगे बढ़ते हुए 1993 से 1998 तक भाजपा किसान मोर्चा की कमान संभाली. इस दौरान फल उत्पादक संघ और एचपीएमसी बोर्ड में बागवानों का प्रतिनिधित्व करते रहे. वह पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के काफी करीबी रहे.

हिमाचल के पूर्व सीएम धूमल के साथ नरेंद्र बरागटा.(FILE PHOTO)

धूमल ने कहा खो दिया कर्मठ एवं हंसमुख नेता

पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अपने वीडियो संदेश में नरेंद्र बरागटा के निधन को व्यक्तिगत तौर पर क्षति बताया. उन्होंने शोक संदेश में कहा है प्रदेश ने एक कर्मठ और हंसमुख नेता खो दिया है. जो बागवानों के हितों के लिए लड़ाई लड़ता रहा. उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के लिए नरेंद्र बरागटा ने मेरे साथ स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मामला उठाया था, ताकि प्रदेश के बागवानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.

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