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BJP के मंत्री ने कहा, शरारती लोगों ने की लाहौल स्पीति को लद्दाख में मिलाने की पैरवी

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 4, 2019, 6:19 PM IST
BJP के मंत्री ने कहा, शरारती लोगों ने की लाहौल स्पीति को लद्दाख में मिलाने की पैरवी
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने फिर से सरचू सीमा विवाद मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने का फैसला किया है.

हिमाचल के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा (Dr. Ramlal Markanda) ने कहा कि कुछ शरारती लोग इसकी पैरवी कर रहे थे, जबकि सच्चाई यह है कि लाहौल स्पीति (Lahul Spiti) के लोग भी किसी भी सूरत में लद्दाख (Laddakh) में मिलना नहीं चाहेंगे क्योंकि यह राज्य पिछड़ा राज्य है.

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शिमला. सरचू सीमा विवाद (Sarchu Border Dispute) एक बार फिर गरमाने लगा है. हिमाचल और जम्मू कश्मीर के बीच यह विवाद लंबे अरसे से चल रहा था. अब लद्दाख (Ladakh) के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद मुद्दा फिर से उठ खड़ा हुआ है. दरअसल सरचू हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति (Lahaul Spiti District) जिले में आता है. हालांकि काफी अरसे से यहां पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ गई थी, जिसके बाद लेह-लद्दाख के लोगों ने भी लाहौल स्पीति के भीतर आकर सरचू में समानांतर पर्यटन गतिविधियां शुरू की जिससे विवाद बढ़ गया. हालांकि सीएम जयराम ठाकुर ने हाल ही में चंडीगढ़ में हुई उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के समक्ष यह मुद्दा उठाया था. वहीं अब कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा (Dr. Ramlal Markanda) ने फिर से मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने का फैसला किया है.

'इस क्षेत्र की डिमार्केशन हो ताकि हिमाचली बाहरी लोगों को बाहर खदेड़ सके'

हिमाचल सरकार का तर्क है कि इस क्षेत्र की डिर्मोकेशन की जाए ताकि उसके बाद हिमाचल कानूनी तौर पर बाहरी लोगों को सरचू से खदेड़ सकें. बहरहाल सरचू सीमा विवाद अब हिमाचल सरकार को नए सिरे से लद्दाख के साथ लड़ना पड़ेगा. डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि कुछ शरारती लोग इसकी पैरवी कर रहे थे, जबकि सच्चाई यह है कि लाहौल स्पीति के लोग भी किसी भी सूरत में लद्दाख में मिलना नहीं चाहेंगे क्योंकि यह राज्य पिछड़ा राज्य है.

Dr. Ramlal Kanda
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने फिर से सरचू सीमा विवाद मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने का फैसला किया है.


लाहौल स्पीति को लद्दाख में मिलाने का नहीं कोई प्रस्ताव

वहीं दूसरी ओर लाहौल स्पीति और पांगी को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में मिलाने की कुछ बुद्धिस्ट एसोसिएशनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की थी. इसके बाद कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा था.

'लाहौल स्पीति के लोग किसी भी सूरत में लद्दाख में मिलना नहीं चाहेंगे'
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अमित शाह ने इस पत्र को जवाब भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि लाहौल स्पीति और पांगी को लद्दाख में मिलाने का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है. अगर ऐसा कभी होगा भी तो पहले राज्य से चर्चा की जाएगी. बहरहाल इस जवाब के बाद मामला शांत हो गया है. डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि कुछ शरारती लोग इसकी पैरवी कर रहे थे, जबकि सच्चाई यह है कि लाहौल स्पीति के लोग भी किसी भी सूरत में लद्दाख में मिलना नहीं चाहेंगे क्योंकि यह राज्य पिछड़ा राज्य है.

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First published: November 4, 2019, 6:16 PM IST
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