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शिमला : 1984 सिख विरोधी दंगे पर लिखी पुस्तक 'ब्लैक नवंबर' का विमोचन

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 31, 2019, 6:56 PM IST
शिमला : 1984 सिख विरोधी दंगे पर लिखी पुस्तक 'ब्लैक नवंबर' का विमोचन
लेखिका ने कहा- दंगे केवल एक नहीं सभी समुदायों पर बुरा प्रभाव डालते हैं.

लेखिका के माता-पिता उस दौरान शिमला में ही थे. नाभा में एक भीड़ उनके माता-पिता की तरफ दौड़ी थी, लेकिन हिमाचल के दिवंगत पत्रकार रविंद्र रणदेव ने उन्हें बचा लिया था. यह पुस्तक उन्हें श्रद्धांजलि भी देती है.

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शिमला. 1984 के सिख विरोधी दंगे (Anti-Sikh Riots) पर लिखी गई एक किताब 'ब्लैक नवंबर' (Black November) का विमोचन किया गया. अहमदाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर इश्मीत कौर (Ishmeet Kaur) ने इस पुस्तक को संपादित किया है. इस किताब के जरिए 1984 के दंगों के जख्म एक बार फिर से हरे हो गए हैं. इश्मीत कौर ने बताया कि इस पुस्तक में दंगों के दौरान जिंदा बचे लोगों की आवाज है. दिल्ली दंगा पीड़ित कॉलोनी में रह रही विधवाओं के साक्षात्कार हैं. नानावती कमीशन (Nanavati Commission) को दिए गए हलफनामें हैं. साथ ही दंगों को लेकर जो कहानियां हैं, नाटक हैं और जो कविताएं हैं उनका भी संग्रह है.

उन्होंने कहा कि शिमला में इस पुस्तक का विमोचन करने का मकसद यही है कि शिमला में भी सिख विरोधी दंगे की आग पहुंची थी. लेखिका के माता-पिता उस दौरान शिमला में ही थे. नाभा में एक भीड़ उनके माता-पिता की तरफ दौड़ी थी, लेकिन हिमाचल के दिवंगत पत्रकार रविंद्र रणदेव ने उन्हें बचा लिया था. यह पुस्तक उन्हें श्रद्धांजलि भी देती है.

परिवार ने दंगों के दौर को बेहद करीब से देखा

इश्मीत ने बताया कि उसके परिवार ने दंगों के दौर को बेहद करीब से देखा है. लेखिका ने इन दंगों के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. इश्मीत का यहां तक कहना है कि केवल पार्टी अकेली जिम्मेदार नहीं है बल्कि वो संस्थान भी बराबर के जिम्मेदार हैं जिन्होंने दंगों के दौरान अपना दायित्व नहीं

निभाया. उन्होंने कहा कि जिन पर जिम्मदारी थी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी.

लेखिका इश्मीत कौर ने कहा कि पुस्तक में दंगों की कहानियां, नाटक और कविताएं भी है.


दंगा पीड़ित दुविधा में हैं कि इंसाफ हुआ या नहीं
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कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सजा होने और 89 मामलों के निपटारे और साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम आने को लेकर इश्मीत ने कहा कि दंगा पीड़ित इस पर दुविधा में हैं कि इंसाफ हुआ या नहीं. हकीकत यही है कि इंसाफ नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि 35 वर्षों से हर सरकार से इंसाफ की गुहार
लगाई गई है, लेकिन इंसाफ आज तक नहीं मिला. इश्मीत का कहना है कि किताब यह भी बताती है कि दंगों से केवल एक समुदाय नहीं बल्कि पूरा समाज प्रभावित होता है.

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First published: October 31, 2019, 6:56 PM IST
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