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Earthquake in Himachal: लाहौल स्पीति और मनाली में लगे भूकंप के तेज झटके, 48 घंटे में तीसरी बार डोली धरती

Earthquake in Himachal: लाहौल स्पीति और मनाली में लगे भूकंप के तेज झटके, 48 घंटे में तीसरी बार डोली धरती

मनाली में भूकंप से जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. (सांकेतिक तस्वीर)

मनाली में भूकंप से जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. (सांकेतिक तस्वीर)

Earthquake in Manali: सोमवार शिमला में भूकंप आया था, लेकिन इसकी तीव्रता काफी कम थी. अब दो दिन में तीन बार हिमाचल में भूकंप आ चुका है. सूबे में सबसे अधिक भूकंप चंबा जिले में आता है. यहां पर 1905 में बड़ा भूकंप आया था. कांगड़ा में 1905 में भूकंप में 20 हजार लोगों की जान गई थी. किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और मंडी संवेदनशील जोन में हैं. शिमला जिले को लेकर तो चेतावनी भी दी गई थी कि यह शहर भूकंप जैसी आपदा के लिए तैयार नहीं है.

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    शिमला. हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और मनाली में मंगलवार सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए. भूकंप के झटकों की तीव्रता काफी तेज थी और अलसुबह लोगों ने ये झटके महसूस किए. हालांकि, जानमाल की कोई खबर नहीं है.

    जानकारी के अनुसार, रिक्‍टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई है. छह बजकर 2 मिनट पर यह झटके महसूस किए गए हैं. लाहौल-स्‍पीति (Lahaul Spiti) के अलावा, कुल्लू, मनाली (Kullu-Manali) और मंडी में भी झटके महसूस किए गए. अभी तक नुकसान की कोई जानकारी नहीं है.

    बता दें कि, प्रदेश में दो दिन के भीतर तीसरी बार हिमाचल की धरती हिली है. सोमवार को शिमला और इससे पहले चंबा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. मनाली ही भूकंप का सेंटर था और जमीन से 10 किमी नीचे इसका सेंटर रहा.

    शिमला और चंबा में भूकंप

    इससे पहले, सोमवार को शिमला (Shimla) में कम तीव्रता का भूकंप (Earthquake) महसूस किया गया था. भूकंप की तीव्रता 2.1 मापी गई थी और यह भूकंप सुबह चार बजकर लगभग आठ मिनट पर आया था. यह शिमला जिले में पांच किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था. भूकंप से जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.वहीं, वहीं, चंबा जिले में रविवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस हुए थे.

    चंबा में आते हैं सबसे अधिक भूकंप

    हिमाचल में सबसे अधिक भूकंप चंबा जिले में आते हैं. इसके बाद किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और मंडी संवेदनशील जोन में हैं. शिमला जिले को लेकर भी चेतावनी दी गई थी कि यह शहर भूकंप जैसी आपदा के लिए तैयार नहीं है. इसके अलावा किन्नौर में 1975 में बड़ा भूकंप आ चुका है. वहीं, कांगड़ा में 1905 में भूकंप आया था, जिसमें 20 हजार लोगों की जान गई थी. वैज्ञानिकों का दावा है कि हिमालय के आसपास घनी आबादी वाले देशों में इससे भारी तबाही मच सकती है. राजधानी दिल्ली भी इसकी जद में होगी. शिमला और दिल्ली तो भूकंप के झटके सहने के लिए तैयार ही नहीं हैं.

    Tags: Earthquake News, Himachal Government

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