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Helicopter Crash: कॉम्बैट फ्री फॉल में एक्सपर्ट थे शहीद विवेक, 30 हजार फीट ऊंचाई से कूदने की ली थी ट्रैनिंग

Helicopter Crash: कॉम्बैट फ्री फॉल में एक्सपर्ट थे शहीद विवेक, 30 हजार फीट ऊंचाई से कूदने की ली थी ट्रैनिंग

हिमाचल के विवेक कुमार भी हैलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए हैं.

हिमाचल के विवेक कुमार भी हैलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए हैं.

CDS Bipin Rawat Helicopter Crash: विवेक की यूनिट नाहन में पोस्टेड थी. लेकिन वह पैरा कमांडो थे और डेढ़ साल पहले ही उन्हें सीडीएस बिपिन सिंह रावत के पीएसओ के रूप में तैनात किया गया था. विवेक बहुत ही स्किल्ड और युद्ध में माहिर फौजी थे. वह कश्मीर में सेवाएं देने के अलावा, चाइना बॉर्डर पर भी तैनात रह चुके थे. वह पैरा कमांडो थे और कॉम्बैट फ्री फॉल में माहिर थे.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कांगड़ा जिले के उपमंडल जयसिंहपुर के गांव ठेहड़ू कोसरी के विवेक कुमार के घर और गांव में मातम छाया हुआ है. हेलिकॉप्टर हादसे (Helicopter Crash) में विवेक के शहीद होने के बाद से परिजन बेसुध हैं. घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला है.

गुरुवार को दिल्ली में विवेक के डीएनए से परिवार का डीएनए मैच होगा और उसके बाद विवेक की पार्थिव देह उनके घर लाई जाएगी. उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार शाम तक उनका पार्थिव शरीर कांगड़ा पहुंच सकता है.

विवेक की यूनिट नाहन में पोस्टेड थी, लेकिन वह पैरा कमांडो थे और डेढ़ साल पहले ही उन्हें सीडीएस बिपिन सिंह रावत के पीएसओ के रूप में तैनात किया गया था. विवेक बहुत ही स्किल्ड और युद्ध में माहिर फौजी थे. वह कश्मीर में सेवाएं देने के अलावा, चाइना बॉर्डर पर भी तैनात रह चुके थे. वह पैरा कमांडो थे और कॉम्बैट फ्री फॉल में माहिर थे. इसके अलावा कम्युनिकेशन एक्सपर्ट और अनआर्म्ड कॉम्बैट में उन्हें दक्षता हासिल थी. बता दें कि कॉम्बैट फ्री फॉलर्स वे लोग होते हैं, जो हाई एल्टीट्यूड हाई ओपनिगं (HAHO) और हाई एल्टीट्यूड लोअर एचएएलओ ओपनिंग (HALO) तकनीकों के जरिये किसी भी मुश्किल लोकेशन पर लैंड करते हैं और टफ हालात से लड़ने में सक्षम होते हैं. साथ ही इन्हें कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है और 30 हजार फीट की ऊंचाई से भी कूदने में विवेक ने दक्षता हासिल की थी.

दिल्ली में विवेक कुमार का पार्थिव शरीर.

कईयों का सहारा छीन गया

बताया जा रहा है कि विवेक के साले का 19 साल की उम्र में निधन हो गया था और वह ससुराल पक्ष का भी सहारा थे. वह अपने सास और ससुर का ख्याल रख रहे थे. वहीं, विवेक अपने परिवार में इकलौते कमाने वाला सहारा था. हालांकि उनका छोटा भाई बैकरी में नौकरी करता है, लेकिन विवेक पर माता-पिता और पत्नी बेटे की परवरिश का जिम्मा था. शहीद विवेक कुमार के पिता का कहना है कि हमारे घर में विवेक इकलौता काम आने वाला था और अब उसके बिना कोई दूसरा सहारा नहीं है. दूसरा बेटा है, लेकिन बेरोजगार है. उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके छोटे बेटे को सरकारी नौकरी दी जाए.

Tags: Bipin Rawat Helicopter Crash, GEN Bipin Rawat Passes Away, Heroes of the Indian Army, Himachal pradesh, Indian Army Heroes, Kangra district

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