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    कोरोना के बाद अब शिमला में पोलन से सांस लेने में परेशानी, होने लगी एलर्जी-आंखों में जलन

    शिमला में गिर रहा है पोलन.
    शिमला में गिर रहा है पोलन.

    Cedar Powder in Shimla; आईजीएमसी में ही हर रोज 15 से 20 लोग पोलन से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं. डॉ. जनक राज ने कहा कि इन दिनों अस्थमा रोगियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 22, 2020, 12:51 PM IST
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    शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) में कोरोना वायरस (Corona virus) के साथ-साथ अब देवदार के पेड़ों से गिर रहा पोलन परेशानी बन गया है. पतझड़ के मौसम में देवदार (Cedar Powder) के पेड़ों से पोलन गिर रहा है और ऐसे में सांस लेने में दिक्कत हो रही है. पेड़ों से गिरने वाला पीले रंग का पाउडर दमा मरीजों के लिए काफी नुकसानदेह है.

    पोलन के चलते इतनी समस्या पैदा हो जाती है कि इससे फेफड़ों को नुकसान होता है. पोलन के चलते आंख, कान, नाक और मुंह में जलन हो रही है. पोलन आंख और नाक के रास्ते से शरीर में जाता है, जिसके चलते जुखाम होना, ईचिंग और सांस लेने में दिक्कत होती है. कोरोना के समय में ज्यादातर लोग मास्क (Mask) पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन फिर भी मरीजों को परेशानी हो रही है.

    डॉक्टरों की सलाह
    डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं कि मास्क पहनने के साथ-साथ अपने शरीर को पूरी तरह से ढकें, ताकि पोलन के चलते किसी तरह की समस्या ना हो. बुजुर्गों और छोटे बच्चों को पोलन के चलते ज्यादा समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हर रोज पोलन से मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. दमा रोगियों की संख्या में इसमें ज्यादा है. एलर्जी वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं. पोलन के कारण लोगों की सांस लेने में दिक्कत हो रही है. मरीजों की सांस फूल रही है.
    शहर में ज्यादा परेशानी कहां


    शहर के जिन जगहों पर देवदार के पेड़ हैं, वहां पर समस्या अधिक है. ज्यादातर पंथाघाटी, विकासनगर, बीसीएस छोटा शिमला, जाखू, आईजीएमसी, हिमलैंड, कनलोग समेत आसपास के इलाकों में देवदार के पेड़ हैं. ज्यादा परेशानी अस्पतालों के पास पेड़ों से पोलन गिरने के कारण मरीज़ों को हो रही है. पोलन हवा में मिलने के बाद सीधा सांस के माध्यम से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. इसी तरह से पोलन शरीर के अन्य हिस्सों में भी प्रवेश करता है. इससे आंख, कान, नाक और गले में संक्रमण हो जाता है.

    आईजीएमसी में आ रहे केस
    आईजीएमसी में ही हर रोज 15 से 20 लोग पोलन से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं. डॉ. जनक राज ने कहा कि इन दिनों अस्थमा रोगियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. पेड़ों से निकलने वाले पोलन से मरीजों को दूरी बनाई रखनी चाहिए और मास्क लगाकर घरों से बाहर निकलना चाहिए.अस्थमा सांस से जुड़ी बीमारी है. मरीज को इस दौरान सांस लेने में तकलीफ होती है. सांस की नली में सूजन आ जाती है. इससे फेफड़ों में दबाव महसूस होता है.
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