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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नेचुरल ब्रीडिंग के लिए विलुप्तप्राय चीड़ फिजेंट को किया रिलीज

विश्व में विल्पुत होने के कगार पर पहुंचे चीड़ फिजेंट को अब नेचुरल ब्रीडिंग के लिए कल जंगलों में छोड़ा जाएगा.

विश्व में विल्पुत होने के कगार पर पहुंचे चीड़ फिजेंट को अब नेचुरल ब्रीडिंग के लिए कल जंगलों में छोड़ा जाएगा.

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दुर्लभ हिमाचलयी चीड़ फिजेंट को विलुप्त होने से बचाने के लिए जंगल में छोड़ा.

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शिमला. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने दुर्लभ हिमालयी चीड़ फिजेंट (Feasent) को विलुप्त होने से बचाने के लिए जंगल में छोड़ा. कुसुम्पट्टी विधानसभा क्षेत्र के सेरी में वन विभाग की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें दो हिमाचलयी चीड़ फिजेंट को मुख्यमंत्री ने पिंजड़े से मुक्त कर दिया. शुक्रवार यानि कल 16 फिजेंट को कोटी वन रेंज के सेरी के जंगल में छोड़ा जाएगा, जिन्हें वन विभाग अगले एक साल तक मॉनिटर करेगा.

नेचुरल ब्रीडिंग के लिए चैहड़ फिजेंट को जंगलों में छोड़ा गया

विश्व में विल्पुत होने के कगार पर पहुंचे चीड़ फिजेंट को अब नेचुरल ब्रीडिंग (Natural Breeding) के लिए कल जंगलों में छोड़ा जाएगा. वीरवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कुसुम्पटी विधानसा क्षेत्र के सेरी गांव में दो चैहड़ फिजेंटस को सांकेतिक रूप से छोड़ा. शुक्रवार को वाइल्ड लाइफ विंग 16 फिजेंट जंगल में छोड़ेगा, उनमें पांच साल तक की आयु के चार जोड़े व्यस्क के अलावा छह आठ माह के फिजेंट हैं.

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के चलाए गए प्रोजेक्ट की शुरूआत की जिसमें वन विभाग एक साल तक इन पक्षियों को मॉनिटर करेगा, जिसमें चीड़ पक्षी के प्राकृतिक वातावरण में खाना और प्रजनन का अध्ययन किया जाएगा. इस दुर्लभ प्रजाति का बचाने के लिए किए गए वन विभाग के इस प्रयास को मुख्यमंत्री ने खूब सराहा.



फिजेंट की कुल 51 प्रजातियां हैं, जिनमें से 17 भारत में है

डॉ. सविता, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ, वन विभाग, हिप्र ने बताया कि विश्व की विलुप्त होने वाली वाली इस प्रजाति को शैड्यूल-टू की कैटिगरी में रखा गया है. पूरे विश्व में फिजेंट की कुल 51 प्रजातियां हैं, जिनमें से 17 भारत में है. हिमाचल में फिजेंट की सात प्रजातियां है. इनमें से दो प्रजातियां वेस्टर्न ट्रेगोपान और चीड़ फिजेंट खत्म होने के कगार पर है. राज्य वन विभाग ने इन दोनों प्रजातियों की ब्रीडिंग के लिए कंजर्वेशन प्रोजेक्ट चलाया हुआ है. वेस्टर्न ट्रैगोपान का ब्रीडिंग सेंटर सराहन में तो चीड़ फिजेंट का चायल के खलीउण में चलाया जा रहा है. चीड़ फिजेंट ब्रीडिंग प्रोजेक्ट खलीउण में 2009-10 में शुरू किया गया था.

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