शिमला आएंगी प्रियंका गांधी वाड्रा, जिला प्रशासन को दिया गया आवेदन अधूरा होने पर अभी अनुमति नहीं- सूत्र
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शिमला आएंगी प्रियंका गांधी वाड्रा, जिला प्रशासन को दिया गया आवेदन अधूरा होने पर अभी अनुमति नहीं- सूत्र
शिमला के छराबड़ा में प्रियंका गांधी का घर.

प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने कुल 12 लोगों के लिए E-COVID पास को लेकर जिला प्रशासन को आवेदन दिया है. उनके साथ बच्‍चों के अलावा कुछ पारिवारिक मित्रों के भी होने की संभावना है.

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  • Last Updated: August 7, 2020, 8:24 AM IST
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शिमला. कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) शिमला आने वाली हैं. उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है. बताया जा रहा है कि वह शिमला के छराबड़ा स्थित अपने घर आएंगी और इसके लिए उन्होंने कोविड-ई पास रजिस्ट्रेशन के तहत आवदेन किया है. आवेदन में प्रियंका और उनके बच्चों के अलावा कुल 12 नाम शामिल हैं. सूत्रों का कहना है कि आवेदन (Application) में कुछ दस्तावेज अधूरे हैं, इसलिए अभी आने की अनुमति नहीं दी गई है. सूत्रों की मानें तो उनके साथ आने वाले सदस्यों में दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु और नोएडा के उनके कुछ पारिवारिक मित्र शामिल हैं. उन्‍होंने आवेदन में 10 से 30 अगस्‍त तक शिमला आने का प्रस्‍ताव दिया है.

बताया जा रहा है कि प्रियंका कोविड महामारी के दौर में छराबड़ा स्थित नए आशियाने में कुछ समय बिताएंगी. दिल्ली के सभी जिलों को कोविड के हेवी लोड वाली सूची में डाला गया है. ऐसे में प्रियंका और उनके साथ के लोगों को कोविड निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट साथ लानी होगी. रिपोर्ट न होने पर नियमानुसार उन्हें संस्थागत क्वारंटीन होना पड़ सकता है. यदि रिपोर्ट लाएंगी तो होम क्वारंटीन में भेजा जाएगा.

छराबड़ा में है प्रियंका का आशियाना
प्रियंका का घर शिमला से 13 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 8 हजार फीट की ऊंचाई पर है. इस घर को पहाड़ी शैली में बनाया गया है. इंटीरियर में देवदार की लकड़ी से सजावट का काम किया गया है. मकान के चारों तरफ हरियाली और पाइन के खूबसूरत पेड़ हैं. सामने हिमालय के बर्फ से ढके पहाड़ नजर आते हैं. छराबड़ा एक टूरिस्ट प्लेस है. प्रियंका के घर पर स्लेट मंडी का ही लगा हुआ है. इससे पहले शैली पसंद न आने पर निर्माणाधीन मकान तुड़वाया गया था. जंजैहली घाटी के मुरहाग निवासी ठेकेदार प्यारे राम ने प्रियंका के मकान के निर्माण का ठेका लिया था. मंडी, कुल्लू और शिमला समेत कई जिलों में काष्ठकुणी शैली से मकान बनाए जाते हैं. इस शैली की खासियत लकड़ी पर की गई नक्काशी है, जो हिमाचली कला की एक विशेष पहचान है. इसे हाथ से उकेरा जाता है. इसे बनाने में खासा समय लगता है. साथ ही इस तरह की छतें हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में बनाई जाती हैं. ये सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडी रहती हैं. काष्ठकुणी शैली में छत पर स्लेट लगाए जाते हैं.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की फाइल फोटो




कंस्ट्रक्शन पसंद नहीं आई थी
करीब साढ़े चार बीघा जमीन पर प्रियंका का घर साल 2008 में बनना शुरू हुआ था. हिमाचल कांग्रेस के नेता केहर सिंह खाची के नाम पर जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी है. साल 2011 में दो मंजिला बनने के बाद डिजाइन पसंद न आने पर इसे तोड़ दिया गया था. प्रियंका को मकान बनाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लैंड रिफॉर्म्स एक्ट के सेक्शन 118 में नियमों में ढील दी थी. इस सेक्शन के तहत हिमाचल से बाहर रहने वाले लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं. वर्ष 2007 में इस जमीन की मार्केट वेल्यू करीब एक करोड़ रुपए बीघा थी, जबकि प्रियंका गांधी को मकान बनाने के लिए 4 बीघा जमीन 47 लाख रुपए में दी गई. मकान को लेकर प्रियंका को हाईकोर्ट से नोटिस भी मिला था. बता दें कि अक्सर प्रियंका यहां आती रहती हैं.
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