DDU Shimla अस्पताल: 115 बेड, कोरोना मरीज 121, चेकअप के लिए केवल 3 डॉक्टर

सेंटर की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके बाद गत्ते के ऊपर कोविड सेंटर लिखा है.

सेंटर की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके बाद गत्ते के ऊपर कोविड सेंटर लिखा है.

Corona Virus in Himachal: अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी शुरू नहीं हो पाया है. यहां के लिए मंडी से ऑक्सीजन लाई जा रही है. हर रोज ऑक्सीजन लाने के लिए 2 गाड़ियां भेजी जा रही हैं. मंडी में हालत ये बताई जा रही है कि वहां भी ऑक्सीजन भरवाने के लिए लाइनें लगी हुई हैं.

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शिमला. कोरोना के इस दौर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल रही है. कोरोना महामारी से निपटने को लेकर हिमाचल सरकार (Himachal Govt) दावा कर रही है कि सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं. प्रदेश के प्रमुख अस्पताल कोरोना के मरीजों से भरे पड़े हैं. डॉक्टरों की कमी लंबे से समय से चली आ रही है, पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) का क्या हाल है, इसके बारे में आपको बताते हैं.

शहर के बीचों-बीच स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (DDU Hospital Shimla) की हालत ये है कि यहां पर जो कोविड सेंटर बनाया गया है, यहां पर 115 की बेड कैपेस्टी है और मरीज 121. अस्पताल के मुताबिक, 121 मरीज को देखने के लिए सुबह मात्र 3 डॉक्टर थे. दोपहर की शिफ्ट में 2 और रात की शिफ्ट में 2 डॉक्टर ड्यूटी पर होते हैं. कोरोना की स्थिति ये है कि हर रोज नए मरीज आ रहे हैं.

कॉरिडोर में बिस्तर लगाए

कॉरिडोर में भी बिस्तर लगाने पड़ रहे हैं. जरा सोचिए किन परिस्थितियों में ये डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इस कठिन घड़ी में डॉक्टर भगवान की तरह हैं और सिस्टम किस तरह से भगवान से काम ले रहे हैं. 10-10 दिन के लिए डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है. 10 दिन के बाद ये डॉक्टर 7 दिन के लिए क्वारंटीन हो जाते हैं और फिर दोबारा ड्यूटी पर आते हैं. डॉक्टर यहां पर ड्यूटी करने के बाद सीधे अपने घर जाते हैं. इस हालात में डॉक्टर के साथ-साथ उसके परिवार वालों को भी संक्रमण का खतरा है. बीते साल सरकार ने डॉक्टरों के ठहरने की अलग से व्यवस्था की थी. कई बार डॉक्टरों को 10 घंटे से ज्यादा काम करना पड़ता है, यहां ड्यूटी पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ की हालत भी यही है. डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए तो मरीजों को भी बेहतर सेवाएं मिल पाएंगी. सेंटर की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके बाद गत्ते के ऊपर कोविड सेंटर लिखा है.
ऑक्सीजन प्लांट बंद है

जानकारी के अनुसार, इस अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी शुरू नहीं हो पाया है. यहां के लिए मंडी से ऑक्सीजन लाई जा रही है. हर रोज ऑक्सीजन लाने के लिए 2 गाड़ियां भेजी जा रही हैं. मंडी में हालत ये बताई जा रही है कि वहां भी ऑक्सीजन भरवाने के लिए लाइनें लगी हुई हैं. बुधवार को ऑक्सीजन लेने गई गाड़ी गुरुवार शाम तक भी नहीं पहुंची थी. शुक्र मनाइए कि अभी ऑक्सीजन को लेकर मारामारी नहीं है, अगर जरूरत बढ़ी तो क्या होगा.

आईजीएमसी भेजते हैं मरीज



हालात ये है कि यहां जिन मरीजों की हालत ज्यादा खराब हो जाती है तो उन्हें आईजीएमसी रेफर करना पड़ता है. वहां भी लाइनें लगी हुई हैं. इस अव्यवस्था पर अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे हुए है, स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी फोन नहीं उठाते और मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ये कह रहे हैं कि जहां कमी है, उसको पूरा किया जा रहा है. स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले हिमाचल की स्थिति अच्छी है. बताते चलें कि ये वही अस्पताल है जहां पर एक महिला मरीज ने सुसाइड भी किया था.

छुट्टी के बाद रोने लगी महिला

यहां से 11 दिन बाद ठीक होकर निकली एक महिला मरीज ने बाहर आते ही सबसे पहले जाखू मंदिर की ओर खड़े होकर अपने हाथ जोड़े. भगवान का शुक्रिया अदा किया. महिला काफी देर तक रोती रही. आंखों में आंसू लिए महिला ने कहा कि अंदर व्यवस्था ठीक है, लेकिन साथ ही कहा कि भगवान करे कि यहां कोई न भर्ती हो.
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