COVID-19: हिमाचल में 90% अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते थे स्कूल, हाजिरी से खुलासा

मंडी में स्कूल में पहुंचे बच्चे. (FILE PHOTO)
मंडी में स्कूल में पहुंचे बच्चे. (FILE PHOTO)

Corona virus in Himachal Schools: 9वीं से 12वीं तक करीब साढ़े 3 लाख छात्र हैं. 10 नवंबर को सरकारी स्कूलों में मात्र 12.39 प्रतिशत छात्र ही उपस्थित थे.

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शिमला. कोरोना (Corona) के लगातार बढ़ने मामलों के बीच सरकार ने शिक्षण संस्थानों को 25 नवंबर तक के लिए बंद कर दिया है. काफी संख्या में शिक्षकों और छात्रों के संक्रमित होने के चलते स्कूल, कॉलेज (School and College) और अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों को बंद किया गया है. ऐसा नजर आ रहा था कि इन संस्थानों को खोलने का फैसला (Decision) गलत साबित हुआ, लेकिन शिक्षा विभाग (Education Department) का कहना है कि फैसला गलत नहीं था लेकिन हाजिरी बता रही है कि 90 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं थे. उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा ने कहा है कि स्थिती को देखते हुए आगामी फैसला लिया जाएगा. विभाग फिर से संस्थान खोलने से पहले पूरी तैयारी कर लेगा.

372 शिक्षक और 100 से ज्यादा छात्र संक्रमित

मंगलवार को कैबिनेट ने 11 से 25 नवंबर तक स्कूलों में विशेष छुट्टियां घोषित की है. इस निर्णय के तहत स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, आइटीआई से लेकर अन्य सभी तरह के शिक्षण संस्थान पूरी तरह से बंद रहेंगे. इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं होगी. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीजी कोर्सो के लिए दाखिले जारी रहेंगे, लेकिन कक्षाएं नहीं लगेंगी. केंद्र के निर्देशों के तहत 2 नवंबर को सरकार ने करीब 8 महीने नवीं से 12वीं कक्षा तक नियमित कक्षाएं लगाने की अनुमति दी थी और कॉलेज भी खोल दिए गए थे.



अब 372 शिक्षक पॉजिटिव हुए हैं
स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षक और छात्रों के संक्रमित होने का सिलसिला शुरू हो गया. सबसे पहले मंडी में कोरोना विस्फोट हुआ. जहां एक ही स्कूल में 100 से ज्यादा छात्र और शिक्षक कोरोना पॉजिटिव हो गए. उच्चतर शिक्षा निदेशक के अनुसार, अब तक 372 शिक्षक पॉजिटिव पाए गए हैं. 10 नवंबर तक 25 छात्रों के संक्रमित होने की सूचना निदेशालय को मिली थी.

फैसले पर सवाल क्यों उठे सवाल

शिक्षा विभाग ने पहले दावा किया था कि प्रदेश के 80 हजार से ज्यादा अभिभावकों ने स्कूलों को फिर से खोलने के लिए अपनी सहमति दी थी, लेकिन स्कूलों और महाविद्यालयों की हाजिरी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. 9वीं से 12वीं तक करीब साढ़े 3 लाख छात्र हैं. 10 नवंबर को सरकारी स्कूलों में मात्र 12.39 प्रतिशत छात्र ही उपस्थित थे. प्रदेशभर के स्कूलों में मात्र 41 हजार 129 छात्र ही पहुंचे थे, जबकि करीब 50 हजार में से 19 हजार 737 शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी आए थे. यानी कि 41.25 फीसदी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ही पहुंचा था. महाविद्यालयों की बात करें तो 1 लाख 5 हजार 975 छात्रों में से मात्र 1770 छात्र ही 10 नवबंर को कॉलेज आए जबकि 2 नवंबर को कॉलेज आने वाले छात्रों की संख्या 7 हजार 414 थी. ये आंकड़े अपने आप में बयां कर रहे हैं कि 90 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं.



ये बोले निदेशक

उच्चतर शिक्षा निदेशक अमरजीत सिंह का कहना है कि स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला संक्रमित होने वालों की संख्या को देखते हुए नहीं लिया गया था,इसके कई और कारण हैं. सरकार का फैसला गलत नहीं था. उन्होंने कहा कि जितने लोग स्कूल आए उसके मुकाबले में संक्रमित होने वालों की संख्या बेहद कम है. उन्होंने कहा कि दोबारा स्कूल खोलने के पहले पूरी तैयारी की जाएगी और स्थिती को देखते हुए फैसला लिया जाएगा.
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