शिमला: 7 माह से असिस्टेंट इंजीनियर को ठेकेदार ने नहीं दी सैलरी, बोला-अब सुसाइड के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा

शिमला में इंजीनियर अमित सिंह.
शिमला में इंजीनियर अमित सिंह.

Corona virus in Himacha; हैरानी इस बात की भी है कि अगर ये मामला लोक निर्माण विभाग के ध्यान में भी है, लेकिन इतने समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई.

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शिमला. कोरोना महामारी (Corona Virus) के बीच लोगों के संकट की कई कहानियां सामने आ रही हैं. किसी की नौकरी चली गई तो किसी के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया. कुछ ऐसा ही हुआ 30 साल के असिस्टेंट इंजीनियर अमित सिंह के साथ. अमित सिंह एक ठेकेदार के पास शिमला (Shimla) में एक साइट पर काम कर रहा था, उसे 7 महीने का वेतन नहीं मिला है. घर चलाने में मुश्किल आ रही है, दो लाख रुपये कर्ज के बोझ के नीचे दब गया है और ठेकेदार (Contractor) पैसे के लिए टालमटोल कर रहा है. इतना ही नहीं, उसके स्थान पर किसी और नौकरी पर रख लिया है. अमित का कहना है कि अब हालत इतनी खराब हो गई है कि आत्महत्या करने के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा है.

ये है मामला
राजधानी शिमला में लिफ्ट के पास एक नया पुल बनना है,जिसके लिए लोक निर्माण विभाग ने चंडीगढ़ के 38 सेक्टर के रहने वाले ठेकेदार अनिल कुमार गुप्ता को करोड़ों का ठेका दिया है. इसको लेकर ठेकेदार ने जम्मू के सांबा के रहने वाले असिस्टेंट इंजीनियर अमित सिंह को साइट इंजीनियर के तौर पर 45 हजार रू. मासिक वेतन पर तैनात किया. अमित सिंह का कहना है कि उसे नवंबर 2019 से काम करना शुरू किया. 30 जून 2020 तक उसने यहां काम किया. कोरोना के चलते काम बंद कर दिया गया था लेकिन तब तक कोई सैलरी नहीं दी गई. इसके साथ 20 मजदूर भी थे. पैसे नहीं मिलने के कारण अमित समेत अन्य मजदूरों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कमला नेहरू अस्पताल के आस पास रहने के लिए किराए पर एक घर दिया था. अमित ने कहा कि ठेकेदार ने मकान मालिक को किराया भी नहीं दिया है. बीच-बीच में कभी-कभार छुट-पुट पैसे मिले जिससे उसका और मजदूरों के राशन-पानी का इंतजाम होता था. कई बार घर से पैसे मांग कर राशन का इंतजाम किया.

‘ठेकेदार मिलता नहीं था,फोन भी नहीं उठाता था’
अमित सिंह का कहना है कि ठेकेदार को फोन करो तो ज्यादातर समय पर फोन नहीं उठाता था, जब फोन उठाता था तो सैलरी की बात पर टालमटोल करता रहता था. ठेकेदार ने बहुत बहाने बनाए और आश्वासन देता रहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. श्रम विभाग में शिकायत दी और लोक निर्माण विभाग के एग्जियूक्यूटिव इंजीनियर पी.के.भारद्वाज को भी इसके बारे में बताया लेकिन हर ओर से आश्वासन ही मिले. अमित ने बताया कि नौकरी के संबंध में उनके पास सभी दस्तावेज हैं. साथ ही आरोप लगाया कि ठेकेदार ने इसी तरह कई लोगों के साथ धोखेबाजी की है. हर कोई उसके बहकावे में आकर इस तरह फंस जाता है.



‘घर जाने के लिए परिवार से मांगे पैसे, अब उधारी बढ़ गई’
अमित ने बताया कि जून के अंतिम सप्ताह में जब कोरोना के चलते काम बंद हो गया तो वो वापस अपने घर जम्मू चला गया. घर जाने तक के लिए पैसे नहीं थे, अपने परिवार से पैसे मांगे तब जाकर घर पहुंच पाया. अमित ने कहा कि घर जाने के बाद भी वो लगातार अनिल कुमार गुप्ता को फोन करता रहा लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला. उसने बताया कि अब उसके पास कोई नौकरी भी नहीं है, घर में पत्नी है और माता-पिता है और गुजारा करना मुश्किल हो रहा है. घर चलाने के लिए उधार ले रहे हैं जो अब बढ़कर 2 लाख रू हो गया. इतना ही नहीं कोरोना के बाद जब काम शुरू हुआ तो ठेकेदार ने उसके स्थान पर किसी और नौकरी पर रख दिया है. अमित का कहना है कि हर ओर से निराशा हाथ लगी, अब हालत ऐसी है कि आत्महत्या के सिवाए कुछ नहीं सूझ रहा है.

ठेकेदार ने नहीं उठाया फोन
इस बाबत जब हमने ठेकेदार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया. लगातार दो दिनों तक हमने कई फोन किए, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला. ठेकेदार का एक नंबर बंद है और दूसरा चल रहा है. हैरानी इस बात की भी है कि अगर ये मामला लोक निर्माण विभाग के ध्यान में भी है, लेकिन इतने समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई.
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