COVID-19: 6 दिन में 18 केस! दूसरे राज्यों से एंट्री के बाद हिमाचल में फैला कोरोना?
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COVID-19: 6 दिन में 18 केस! दूसरे राज्यों से एंट्री के बाद हिमाचल में फैला कोरोना?
हिमाचल के ऊना जिले में बॉर्डर मेहतपुर पर लगी लाइनें. तस्वीर 26 अप्रैल की है. (FILE PHOTO)

Corona Virus in Himachal: हिमाचल में अबतक कोरोना के 58 मामले सामने आ चुके हैं.

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शिमला. तारीख…3 मई. हिमाचल प्रदेश कोरोना (Corona Virus) मुक्ति की ओर बढ़ रहा था. केवल एक एक्टिव मरीज बचा था. बाकी सभी मरीज ठीक हो चुके थे. यहां तक कि सीएम जयराम ठाकुर भी कह चुके थे कि हिमाचल (Himachal Pradesh) कोरोना मुक्त होने जा रहा है. लेकिन 4 मई के बाद हालात बदल गए. सीएम के गृह जिला मंडी (Mandi) में भी कोरोना का पहला मामला सामने आया और फिर एक के बाद एक 18 मामले सूबे में सामने आए. हिमाचल में अबतक कोरोना के 58 मामले सामने आ चुके हैं.

एक सप्ताह में बदला आंकड़ा
22 अप्रैल को हिमाचल के सिरमौर जिले में एक केस रिपोर्ट हुआ था. इसके बाद 3 मई तक कोई मामला सामने नहीं आया. लेकिन फिर चार मई को मंडी जिले के जोंगिंद्रनगर में दिल्ली से लौटे शख्स में कोरोना पाया गया. इसके बाद पांच मई को सरकाघाट के 21 साल के युवक में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई और शिमला में युवक की मौत हो गई. 3 मई से 10 मई तक अब तक कुल 18 केस रिपोर्ट हुए हैं. इनमें चंबा में पांच केस आए हैं. जबकि, बिलासपुर में दो, हमीरपुर में एक और कांगड़ा में दो केस सामने आए हैं. इन 18 मामलों में चंबा के 5 और कांगड़ा और मंडी के एक-एक मामले को छोड़ दें तो बाकी लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री दिल्ली या दूसरे राज्यों से जुड़ी है. इससे पहले भी शुरुआत में हिमाचल में कोरोना का फैलने का कारण बाहरी राज्यों से ट्रैवल हिस्ट्री ही रही थी. दिल्ली से तबलिगी जमात में शामिल हुए लोग कोरोना पॉजिटिव निकले थे.

संस्थागत क्वांरनटीन होता तो कम होते केस
दरअसल, हिमाचल के बॉर्डर खुलने के बाद लोगों को सीधे घर भेजा गया और इन्हें होम क्वारंटीन के लिए कहा गया. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और एक से दूसरे में संक्रमण फैला. चंबा में पांच केस इसी का नतीजा हैं. पिता से बेटी और तीन दोस्तों को संक्रमण हुआ. यदि सरकार ने लोगों को एंट्री देने के साथ ही संस्थागत क्वारंटीन किया होता तो संक्रमण से फेले केस सामने नहीं आते.



क्यों खोलने पड़े बॉर्डर

लॉकडाउन और कर्फ्यू के ऐलान के बाद काफी दिन तक सरकार ने बाहर फंसे हिमाचलियों को एंट्री नहीं दी. लेकिन कोटा में फंसे स्टूडेंट को लाने के लिए बसें भेजने पर सरकार घिर गई. इसके अलावा, दो सांसदों की लॉकडाउन के बीच दिल्ली से प्रदेश में एंट्री से भी सरकार बैकफुट में आ गई. इससे सरकार पर दवाब आ गया कि बाहर फंसे हिमाचलियों को भी सूबे में आने दिया जाएगा. लेकिन सरकार की सबसे बड़ी चूक इन्हें संस्थागत क्वारंटीन ना कर घर पर भेजने से हुई और होम क्वारंटीन में बाहर से आए लोग घर पर कम और बाहर घूमते रहे. अब नजीता सबके सामने है.

यह बोले थे डीजीपी
9 मई डीजीपी सीताराम मरडी ने इस संबंध में बड़ा बयान दिया था. डीजीपी का कहना था है कि कोरोना के खिलाफ दूसरी लड़ाई शुरू हुई है. पहली लड़ाई हमने जीती थी. साथ ही कहा कि बाहर से हिमाचल आए लोगों के साथ ही यह वायरस आया है.उन्होंने कहा कि सरकार ने क्वॉरटाइन की सख्ती से पालना के आदेश दिए हैं, लेकिन क्वॉरंटाइन की उल्लंघना लगातार हो रही है.

अब होम क्वारंटीन नहीं: सीएम
सीएम जयराम ठाकुर ने अब लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए कहा कि अब लोगों को संस्थागत क्वांरटीन में भेजा जाएगा. अब बाहरी राज्यों से एंट्री पर लोग सीधे घर नहीं भेजे जाएंगे. सीएम ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अब तक अन्य राज्यों के 30,219 लोग यहां से जा चुके हैं. बता दें कि अब विशेष रेलगाड़ी से 13 या 14 मई, 2020 को गोवा से हिमाचल के 1200 लोग प्रदेश लौटेंगे. वहीं, बेंगलुरु में फंसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को वापस लाने के लिए 11 मई को बेंगलुरु से ऊना के लिए एक और स्पेशल ट्रेन चलेगी.

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