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माकपा ने केंद्रीय बजट को बताया कल्पनाओं का पिटारा
Shimla News in Hindi

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 1, 2020, 5:23 PM IST
माकपा ने केंद्रीय बजट को बताया कल्पनाओं का पिटारा
माकपा ने कहा- अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कोई विजन नहीं दिखा

माकपा (CPI-M) ने केंद्रीय बजट ( Union Budget) को कल्पनाओं का पिटारा करार दिया. इसे पूंजीपतियों और अमीरों का बजट बताया है. माकपा विधायक राकेश सिंघा (Rakesh Singha) ने कहा कि अर्थव्यवस्था (Economy) को मजबूत करने को लेकर कोई विजन नहीं दिखा. अधिकतर मुद्दों को छोड़ दिया गया. गृहिणियों को भी निराशा हाथ लगी है.

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शिमला. केंद्र में NDA सरकार ने बजट (Union Budget) पेश कर दिया. माकपा (CPI-M) ने केंद्रीय बजट को कल्पनाओं का पिटारा करार दिया. इसे पूंजीपतियों और अमीरों का बजट बताया है. माकपा विधायक राकेश सिंघा (Rakesh Singha) ने कहा कि अर्थव्यवस्था (Economy) को मजबूत करने को लेकर कोई विजन नहीं दिखा. अधिकतर मुद्दों को छोड़ दिया गया. गृहिणियों को भी निराशा हाथ लगी है. वहीं वर्किंग क्लास ने टैक्स में राहत का स्वागत किया तो युवा बोले कि हर वर्ग का ख्याल नहीं रखा गया.

बजट में नहीं दी गई राहत

माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि इस बजट में कोई राहत नहीं दी गई है. राहत कार्पोरेट घरानों को जरूर दी गई है. बड़े पूंजी के मालिकों को राहत दी गई है. इस मकसद से राहत दी गई है कि शायद वो आएगा और निवेश करेगा, लेकिन वो निवेश नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि वो निवेश तभी करेगा जब उसका मुनाफा बनेगा. उन्होंने कहा कि मुनाफा तब बनेगा जब मांग क्रिएट होगी, लेकिन आज मांग सिकुड़ गई है, खत्म हो गई है.

इस बजट से निराशा हुई है



वहीं एक गृहिणी ने कहा कि बजट में कुछ खास नहीं है. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार महंगाई को रोकने में सफल रही है, लेकिन रसोई से दाल के अलावा साग-सब्जी गायब हो गए हैं. साथ ही दूध और मीट-मछली गायब हो गए हैं. पूरे देश में मीट, मछली और अंडों के दाम बढ़ गए हैं. कोई भी दाल 150 रुपये किलो से नीचे बाजार में उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले साल अगस्त से 180 रुपये किलो प्रतिकिलो प्याज खाने को मिला. साथ ही उन्होंने कहा कि इस बजट में देश में राशन प्रणाली को मजबूत किए जाने के लिए कुछ नहीं है. हमलोग इस बजट से निराश हैं.

दाल और सब्जी भी खरीदना मुश्किल हो गया है

एक दूसरी गृहिणी ने कहा कि मैं इस बजट को शून्य में आंकती हूं. महिलाएं देश की आधी आबादी हैं, लेकिन महिलाओं के हिस्से का जो बजट निकल कर सामने आना चाहिए था वह नहीं आया. साथ ही उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजों की कीमत काफी ज्यादा हो गई है. दाल और सब्जी भी खरीदना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि उम्मीद नहीं है कि इस बजट से महिलाओं के लिए कुछ अच्छा निकल कर आएगा.

वर्किंग क्लास ने टैक्स में राहत का स्वागत किया.


गरीब जनता की आर्थिक स्थिति पर गौर करे सरकार

वहीं जॉब कर रही रजिया शर्मा ने कहा कि पांच लाख तक की कमाई पर टैक्स नहीं लगने की बात से राहत मिली है. साथ में उन्होंने कहा कि गरीब जनता और गरीब होते जा रही है. ऐसे में उनकी देखभाल की जानी चाहिए. उनकी आर्थिक स्थिति पर गौर करने की जरूरत है. सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आर्थिक स्थिति में कहां पर सुधार की जरूरत है. नौकरी कर रही पूनम ने कहा कि स्लैब डाउन होने से पांच प्रतिशत का फर्क पड़ गया है. इकोनोमी काफी अच्छा चल रहा है. नौकरी कर रही शैफाली ने कहा कि दिन प्रतिदिन महंगाई बढ़ते जा रही है. सरकार को कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए चाहिए जिससे संतुलन बना रहे. उन्होंने कहा कि वह नौकरी कर रही हैं मगर उनकी तनख्वाह नहीं बढ़ रही है, लेकिन किराये बढ़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में ये दोनों चीजें बैलेंस होनी चाहिए.

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First published: February 1, 2020, 5:23 PM IST
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