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शिमला में पानी के भारी भरकम बिलों पर माकपा हुई ‘लाल’ निगम दफ्तर घेरा
Shimla News in Hindi

Gulwant Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 24, 2020, 6:32 PM IST
शिमला में पानी के भारी भरकम बिलों पर माकपा हुई ‘लाल’ निगम दफ्तर घेरा
शिमला में पानी के बिलों को लेकर प्रदर्शन करते हुए माकपा वर्कर.

Shimla Water Bill Issue: माकपा ने कंपनी के एजीएम राजेश कश्यप को ज्ञापन सौंपा और पानी के भारी भरकम बिलों पर उनसे विस्तार से चर्चा कर अपनी बात रखी.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला (Shimla) में लोगों को पानी के भारी भरकम बिल (Water Bills Shimla) आ रहे हैं. आलम यह है कि घर के दो सदस्यों को ही हजारों का बिल थमाया जा रहा है और इसे लेकर माकपा (CPIM) लाल हुई है. माकपा ने शुक्रवार को भारी भरकम बिलों के खिलाफ पेयजल (Water) कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला और कंपनी कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन (Protest) किया.

सही बिल भेजे कंपनी
धरना-प्रदर्शन के बाद माकपा ने कंपनी के एजीएम राजेश कश्यप को ज्ञापन सौंपा और पानी के भारी भरकम बिलों पर उनसे विस्तार से चर्चा कर अपनी बात रखी. माकपा नेता और पूर्व मेयर संजय चौहान की अगुवाई में किए गए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मनमाने बिलों और कंपनी के कर्मचारियों के उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई. इस दौरान मांग की कि कंपनी पानी के भारी भरकम बिलों को वापस ले और मीटर रीडिंग के मुताबिक सही बिल भेजे. माकपा ने यह मांग भी की कि पानी के बिलों पर लगाया जा रहा 30 फीसदी सीवरेज सेस भी बंद किया जाए.

यह बोले पूर्व मेयर

माकपा नेता संजय चौहान ने कहा कि वर्तमान नगर निगम ने प्रदेश सरकार के दबाव में आकर ग्रेटर वाटर सर्कल को खत्म कर दल प्रबंधन कंपनी का गठन किया और अपने नियंत्रण से पानी का प्रबंधन इस कंपनी के हवाले कर दिया. अब नगर निगम का इस कंपनी में कोई ज्यादा प्रभुत्व नहीं रह गया है. चौहान ने कहा कि सरकार का यह कदम असंवैधानिक है, क्योंकि 74वें संशोधन के अनुसार शहर में पानी का प्रबंधन नगर निगम का दायित्व है.

‘केवल आर्थिक बोझ डाला जा रहा है’
उन्होंने कहा कि सरकार के दबाव में आकर नगर निगम इस प्रकार के जनविरोधी निर्णय लेकर शहर की जनता पर केवल आर्थिक बोझ डालने का कार्य कर रही है. उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार, नगर निगम व कंपनी को इन भारी भरकम पानी के जारी किए गए बिलों को तुरन्त वापस लेने के आदेश जारी किए जाए. साथ ही हर वर्ष पानी की दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि व सीवरेज सेस की नीति को समाप्त कर जनता को राहत प्रदान की जाए. उन्होंने यह मांग भी की कि सरकार 74वें संविधान संशोधन को लागू कर कंपनी को ख़त्म कर पेयजल के प्रबंधन का जिम्मा नगर निगम को दे, ताकि वह अपना वैधानिक दायित्व निभा सके.ये भी पढ़ें-PHOTOS:हिमाचल के 12 साल के साइकिलिस्ट गुरुदेव का नाम बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज

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First published: January 24, 2020, 3:59 PM IST
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