Cyber Crime in Himachal: हर 24 घंटे में 9 मामले, इस साल 10 माह में 2815 शिकायतें

हिमाचल में साइबर क्राइम के मामले.
हिमाचल में साइबर क्राइम के मामले.

Cyber crime in Himachal: हिमाचल में साल 2018 में साइबर क्राइम से संबंधित 980 शिकायतें आई थीं. 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 1638 तक जा पहुंचा.

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शिमला. हिमाचल में साइबर क्राइम (Cyber Crime) अपनी जड़ें लगातार फैलाता जा रहा है. अब इसका दायरा बढ़ता जा रहा है, रफ्तार दोगुनी हो गई और ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं. आलम ये है कि ऑनलाइन बैठे ठग हर 24 घंटे के भीतर 9 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. साइबर थाने में इस साल अब तक कुल 2815 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिसमें 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की गई है. पुलिस मुख्यालय स्थित साइबर थाना की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद 11 लाख 2 हजार 51 रुपये की रिकवरी कर पीड़ितों को लौटाए हैं. बीते साल 18 लाख 91 हजार 298 रुपये रिफंड किए गए थे. इसकी पुष्टि साइबर थाने के एएसपी नरवीर राठौर ने की है. साल 2019 में 1638 मामले दर्ज हुए थे.

कैसे लड़ेंगे लड़ाई

ये सही है कि 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में लोग अपनी गलती से ही ठगी का शिकार हो जाते हैं, लेकिन इससे राज्य सरकार की जबावदेही समाप्त नहीं हो जाती. साइबर क्राइम को रोकने के लिए जो जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए वो नहीं उठाए जा रहे हैं. हालात ये कि इन शिकायतों से निपटने के लिए हिमाचल में केवल एक ही साइबर थाना है, जिसमें करीब 15 अधिकारी, कर्मचारी हैं. इन 15 लोगों में टैक्निकल टीम भी शामिल है. इस स्थिती को जरा समझिए शिकायतें 2815 और इनके निपटारे के लिए 15 लोग. साइबर थाना की टीम सामान्य थाने की पुलिस की मदद लेती है, जोकि पहले से ही अत्याधिक काम के बोझ तले दबी होती है.



ये बोले डीजीपी 
राज्य पुलिस की ओर से काफी समय पहले सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था कि जिले स्तर पर या रेंज स्तर पर साइबर थाना खोला जाएं, लेकिन ये प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में हैं. जानकारी मिली है कि सरकार रेंज स्तर पर थाने खोलने पर विचार कर रही है.इस बाबत डीजीपी संजय कुंडू ज्यादा कुछ नहीं बोले. उन्होंने केवल इतना कहा कि इस मामले पर सरकार से बातचीत की जा रही है. डीजीपी ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में उचित कदम उठाएगी.

कब कितने मामले आए

हिमाचल में साल 2018 में साइबर क्राइम से संबंधित 980 शिकायतें आई थीं. 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 1638 तक जा पहुंचा. 2020 में अक्तूबर महीने के अंत तक शिकायतों का आंकड़ा 2815 है, साल खत्म होने में अभी 2 महीने बाकी है. इस साल अब तक सोशल नेटवर्किंग साइट और एप संबंधी 964,एटीएम और क्रेडिट कार्ड संबंधी 890, हेल्प डेस्क से संबंधित 904 मामले सामने आए हैं. शातिरों के हथकंडे ऐसे हैं कि ठगी के लिए मुख्यमंत्री तक की फर्जी आईडी बनाने से भी गुरेज नहीं किया गया. साइबर थाने के मुताबिक ये आईडी नाईजीरिया में बनाई गई थी. डेबिट कार्ड, OLX, फेसबुक, पेटिएम, फोन पे , अमेजोन, गूगल पे, लॉटरी, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड , पबजी , लोन , फेक वेबसाइट, वीजा फ्रॉड, ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर अन्य कई तरह की सुविधाओं के नाम पर ठगी की जाती है.

रोहड़ू में एक व्यक्ति ने गवाएं 17 लाख रुपये

शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से ताजा मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति को 17 लाख रुपये का चूना लगा है. शातिर ने उसे फोन कर कहा कि वो एटीएम डिपार्टमेंट की तरफ बोल रहा है और कुछ दस्तावेजों की कमी के चलते आपका एटीएम ब्लॉक किया जाएगा. व्यक्ति उसके झांसे में आ गया और सारी डिटेल साझा कर दी. उसके बाद एक ओटीपी नंबर आया,जिसे उस व्यक्ति ने ठग के साथ साझा किया. इसके तुरंत बाद बैंक खाते में जमा पूरी राशि ठग साफ कर दी. मामला अब साइबर क्राइम थाने के पास है. इसके अलावा इस साल सामने आए कुछ मामलों की बात करें तो रामपुर में एक सरकारी महिला के बेटे ने उसका फोन इस्तेमाल किया और महिला को 5 लाख 24 हजार 851 रू. का चूना लगा, उसी तरह शिमला में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी के पोते की गलती से 93 हजार रू. गंवाए. सिरमौर के शिलाई में एक शिक्षक को 1 लाख 74 हजार 540 रू. का चूना लगा. मंडी में एक बच्चे ने गेम खेलते हुए 1.12 लाख रुपये उड़ा दिए. ऐसे कई केस हैं, जिनमें लोगों ने लाखों रूपए गंवाए हैं

टैक्सी वाला भी हुआ परेशान

कोरोना के इस दौर में शिमला में टैक्सी चलाने वाले एक युवक को फेसबुक पर आए लिंक पर अपनी जानकारी देना मंहगा पड़ गया. शातिरों ने उसकी आईडी, पैन नंबर और पते समेत अन्य जानकारी चोरी कर महाराष्ट्र के पुणे में डेवल्पमेंट बैंक ऑफ सिंगापुर की शाखा में फर्जी बैंक अकाउंट खोला. ऑनलाइन बैठे ठगों ने चंडीगढ़ के एक व्यक्ति के खाते से 3-4 लाख रु. उड़ाए और फ्रॉड की रकम सूरजन के खाते में डाली और फिर पैसे निकाल. चंडीगढ़ के युवक ने जब साइबर सेल में शिकायत की तो, जांच में पता चला कि जिस खाते में पैसे गए वो सूरजन का है. चंडीगढ़ साइबर सेल से जब 20 अगस्त को सूरज को पूछताछ के लिए सम्मन आया तो उसके होश उड़ गए. सूरजन का कहना है कि जनवरी महीने में पेटिएम को लेकर दिक्कत चल रही थी. इस दौरान फेसबुक पर एक लिंक आया. इस लिंक में दिए फॉर्म को भरा, फॉर्म में नाम पते के साथ अन्य जानकारी दी थी.
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