हिमाचल में साइबर क्राइम: लॉकडाउन में सबसे ज्यादा केस, रोजाना 2 लोगों से ऑनलाइन ठगी
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हिमाचल में साइबर क्राइम: लॉकडाउन में सबसे ज्यादा केस, रोजाना 2 लोगों से ऑनलाइन ठगी
हिमाचल में साइबर क्राइम.

लॉकडाउन की बात करें तो 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच सोशल नेटवर्किंग संबंधी शिकायतें 509, फाइनेंशियल फ्रॉड 402 और अन्य शिकयतों की संख्या 432 है. सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लेकर फेक आईडी बनाने, गलत फोटो अपलोड करने से लेकर अन्य सभी तरह की शिकायतें हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 10:45 AM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में साइबर क्राइम (Cyber Crime) का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल जितने के केस आए थे, इस साल के शुरूआती 7 महीनों में ही वो संख्या पार हो गई है. खासकर कोरोना संकट (Corona) के दौरान लॉकडाउन (Lockdown) में साइबर अपराध के ग्राफ में एकदम उछाल आया. साइबर थाना के एसपी (SP) संदीप धवल ने जो आंकड़े दिए हैं, वो एक बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं.
इटरनेट में बैठे ठगों का बड़ा जाल
ऐसा नजर आ रहा है कि इंटरनेट पर बैठे ठगों का एक बड़ा जाल है, जिसकी नजर आपकी गाढ़ी कमाई पर है. दुनिया का शायद ही ऐसा कोई कोना है जहां पर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने की साजिश न चल रही हो. हिमाचल भी इससे अछूता नहीं है, हर रोज कोई न कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहा है. देवभूमि में साइबर क्राइम के जो आंकड़े हैं वो चौंकाने वाले हैं..
ये हैं आंकड़े
हिमाचल में साल 2018 में साइबर क्राइम से संबंधित 980 शिकायतें आई थीं. 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 1638 तक जा पहुंचा. 2020 में तो सारे रिकार्ड ही टूट गए. प्रदेश में इस साल अब तक हर तीसरे घंटे में साइबर क्राइम का एक मामला सामने आया. हर रोज 2 लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए. बैंक खातों पैसे उड़े. इस साल के शुरूआती 7 महीनों में ही कुल 1778 केस साइबर थाना में दर्ज हुए हैं. हथकंडे ऐसे अपनाए जा रहे हैं कि ठगी के लिए मुख्यमंत्री तक की फर्जी आईडी बनाने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा. ये आईडी नाईजीरिया में बनाई गई है.ऐसे में पुलिस लोगों को एतियात बरतने और सतर्क रहने की सलाह दे रही है.
सोशल साइट से टारगेट करते हैं लुटेरे
इस साल अब तक सोशल नेटवर्किंग संबंधी 635 शिकायतें मिली हैं तो फाइनेंशियल फ्रॉड यानि जिन केसों में लोगों ने पैसे गंवाए हैं, उन शिकायतों की संख्या 596 है. लोगों के खातों से शातिरों ने चुटकी बजाकर लाखों उड़ा लिए. ऑनलाइन फ्रॉड से संबंधित मामलों की बात करें तो इस साल डेबिट कार्ड संबंधी 9, OLX संबंधी 14, फेसबुक 17, पेटिएम 10, फोन पे 11, अमेजोन 9, गूगल पे 16, लॉटरी 3, इंश्योरेंस 1, क्रेडिट कार्ड 4 , पबजी 1, लोन 5, फेकवेबसाइट 1, वीजा फ्रॉड 2, ऑनलाइन शॉपिंग संबंधी 20 और अन्य 17 शिकायते हैं.


लॉकडाउन में बढ़े केस
लॉकडाउन की बात करें तो 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच सोशल नेटवर्किंग संबंधी शिकायतें 509, फाइनेंशियल फ्रॉड 402 और अन्य शिकयतों की संख्या 432 है. सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लेकर फेक आईडी बनाने, गलत फोटो अपलोड करने से लेकर अन्य सभी तरह की शिकायतें हैं जिनसे लोगों को सामाजिक,आर्थिक और मानसिक रूप परेशानी होती है. इन शिकायतों के अध्ययन से पता चलता है कि आपकी एक गलती का नुकसान कितना बड़ा हो सकता है. बिना छानबीन और जांच परख के ही लोग ठगों के झांसे में आते हैं और अपने बैंक संबंधी पूरी डिटेल दे देते हैं. कई बार सस्ती चीजों के लालच में पैसे गंवा देते हैं. ऑनलाइन बैठा ठग कई तरह के हथकंडे अपनाता है, सोशल साइट्स पर आपकी हरेक गतिविधि को नोट करता है और मौका मिलते ही जाल फेंक देता है. कई बार बच्चों की गलती का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है, इसलिए लापरवाही न बरतें और अपने बच्चों पर भी पूरी नजर रखें कि वो आपके मोबाइल और एटीएम का इस्तेमाल किस लिए कर रहा है.
उदारहण के तौर पर ये हैं मामले
कुछ मामलों की बात करें तो शिमला के रामपुर में एक सरकारी महिला के बेटे ने उसका फोन इस्तेमाल किया और महिला को 5 लाख 24 हजार 851 रुपये का चूना लगा, उसी तरह शिमला में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी के पोते की गलती से 93 हजार रुपये गंवाए, सिरमौर के शिलाई में एक शिक्षक को 1 लाख 74 हजार 540 रुपये का चूना लगा. मंडी में एक बच्चे ने गेम खेलते हुए 1 लाख रुपये उड़ा दिए. ऐसे कई केस हैं जिनमें लोगों ने लाखों रूपए गंवाए हैं. हालांकि साइबर थाना की टीम ने कई लोगों के पैसे वापस भी करवाए हैं लेकिन ये काम पुलिस के लिए भी आसान नहीं है. ऐसे में सर्तक रहने में ही समझदारी है.
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