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हिमाचल के किन्नौर का NH-5, यहां रोमांच के साथ-साथ कदम-कदम पर खतरा

किन्नौर हाईवे के साथ सतलुज नदी भी बहती है.
किन्नौर हाईवे के साथ सतलुज नदी भी बहती है.

Dangerous Highway of Kinnaur: किन्नौर में पहाड़ काटकर बनाई गई ये सड़कें बेहद खतरनाक हैं. जब भी आप इन रास्तों पर निकलें तो बेहतर होगा किसी स्थानीय वाहन चालक को ही साथ लेकर जायें.

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शिमला. दुनियाभर में कई ऐसी खतरनाक सड़कें (Dangerous Road) हैं, जहां पर गाड़ी चलाना बेहद खतरनाक है. इन सड़कों पर ड्राइवर्स की जान गले में लटकी रहती है. हालांकि , इसके बावजूद लोग इन सड़कों से गुजरते हैं. इनमें से कुछ रोड तो ऐसे खतरनाक हैं, जहां हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है. वाहन चालक का ध्यान जरा भी चूका तो समझो गये काम से.

यदि आप रोमांचक और साहसिक यात्रा के शौकीन हैं तो यह रास्ते आपके लिये ही बने हैं. अगर आप डरते हैं तो इन रास्तों पर से सही सलामत गुजर जाने के बाद भी आपको जिंदगी भर इन्हीं के सपने आते रहेंगे. ऐसा ही एक रोड है शिमला (Shimla) जिले के रामपुर (Rampur) से किन्नौर के जिला मुख्यालय रिकांगपिओ जाने वाला नेशनल हाइवे-05. यह हाईवे काजा और स्पीति को भी जोड़ता है.

खूबसूरती के कद्रदानों के लिये स्वर्ग किन्नौर
कल्पा, किन्नर कैलाश, सांगला वैली, छितकुल और पूह ऐसे इलाके हैं, जिनमें चुंबकीय आकर्षण है. लेकिन हिमाचल के इस कबायली जिले तक पहुंचने के लिए कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते हैं. यहां तक आने का एकमात्र विकल्प सड़क मार्ग ही है. रामपुर से रिकॉंगपिओ की दूरी वैसे तो महज 115 किमी है, लेकिन इस सफर को पूरा करने में साढ़े 4 से 5 घंटे लग जाते हैं. अब आपको अंदाजा लग गया होगा कि इस सड़क पर कितना संभल कर चलना पड़ता है. यह सिर्फ कहने को नेशनल हाइवे है. लेकिन सिंगल रोड है. इस सड़क को पहाड़ों को काट कर बनाया गया है, इसलिये यहां बहुत से अंधे मोड़ भी आते हैं, जहां आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता है.
एनएच-05 सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण


एनएच -05 को भारत–तिब्बत सड़क भी कहा जाता है. किन्नौर जिला तिब्बत से जुड़ा है, इसलिये यही सड़क देश की सेना को चाइना बॉर्डर तक ले जाती है. यहीं से सेना का साजो-सामान सरहदों तक पहुंचता है. किसी भी आपात स्थिति में सेना को अपनी ताकत सरहद तक पहुंचाने के लिए इसी रोड का इस्तेमाल करना होता है, लेकिन इस हाइवे की बनावट कुछ ऐसी है कि तेजी यहां भारी पड़ सकती है.

दुनिया की खतरनाक सड़कों में शामिल है ये हाइवे
किन्नौर जाने वाले इस हाइवे को दुनिया की चुनिंदा खतरनाक सड़कों में से एक माना जाता है. यहां बड़े वाहन चलाने वाले ड्राइवर जान जोखिम में डालकर गाड़ी चलाते हैं. इन रास्तों पर आए दिन हादसे होते रहते हैं. कई लोगों की मौत इन सड़कों पर हो जाती है। कई बार तो हादसे ऐसी जगह होते हैं जहां बचाव दल भी आसानी से नहीं पहुंच पाते और लाशें तक नहीं मिल पातीं हैं.

तरांडा ढांक में पत्थर को काटकर बनाई गई है सड़क.
तरांडा ढांक में पत्थर को काटकर बनाई गई है सड़क.


पहाड़ों को काट कर बना है हाइवे
किन्नौर में पहाड़ काटकर बनाई गई ये सड़कें बेहद खतरनाक हैं. जब भी आप इन रास्तों पर निकलें तो बेहतर होगा किसी स्थानीय वाहन चालक को ही साथ लेकर जायें. ऐसे रास्तों पर वही ड्राइविंग कर सकते हैं, जो अपनी जान हथेली पर रखकर गाड़ी चलाते हैं. कई बार पहाड़ से बड़ी-बड़ी चट्टानें भी गाड़ियों पर गिर जाती हैं.

खतरा प्राकृतिक भी और मानव निर्मित भी
कई बार यह खतरा प्राकृतिक होता है, तो कई बार प्रोजेक्ट के लिये बन रही टनल्स और सड़कों में होने वाली ब्लास्टिंग भी खतरा पैदा कर देती है. जब सड़क बनाने के लिये ब्लास्ट किया जाता है तो दनदनाते हुये पत्थर नेशनल हाइवे पर आ जाते हैं. इसलिये जब भी आप इस सड़क से गुजर रहे हों तो आपको हर दम चौकन्ना रहने की जरूरत रहती है.

जन्नत तक ले जाने वाला नरक भरा रास्ता
किन्नौर जाने वाली यह सड़क इतनी खतरनाक है कि दुर्घटना होने पर गाड़ी सीधे खाई में गिरती है. तरांडा ढांक के पास सड़क एकदम डरावनी लगती है. किन्नौर में कई जगह ऐसी खतरनाक सड़कें हैं. इस सड़क के साथ 500 फीट की खाई है. जहां सतलुज बह रही है. यहां हादसों के निशान मोड़-मोड़ पर देखने को मिल जाते हैं. अगर देखा जाये तो सड़क मार्ग को परिवहन के लिए सबसे सुगम माना जाता है. दुनिया में बहुत सारी ऐसी जगह हैं, जहां तक पहुंचने का जरिया सिर्फ सड़क ही है. लेकिन ये सड़क ऐसी है कि लोग इसे “नर्क का रास्ता” तक कह देते हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू ये है कि धरती की जन्नत यहीं से दिखती है.

(रिपोर्ट-चमन शर्मा)

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