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Earthquake in Himachal: हिमाचल में अलसुबह लगे भूकंप के झटके

हिमाच में भूकंप के झटके.

हिमाच में भूकंप के झटके.

Earthquake in Himchal: हिमाचल के 5 जिलों में खतरा सबसे ज्यादा है. इनमें चंबा जिले का 53.2%, हमीरपुर का 90.9%, कंगड़ा का 98.6%, कुल्लू का 53.1% और जिले मंडी का 97.4 फीसदी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से हाई रिस्क जोन में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 7:29 AM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक बार फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं.  रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई है. गुरुवार  सुबह तड़के 3.55 बजे भूकंप आया है. किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हैं. कम तीव्रता होने के चलते किसी को भूकंप महसूस नहीं हुआ और लोग वैसे भी सोए हुए थे.

दस दिन पहले ही आए थे झटके

इससे पहले, 10 दिन पहले ही हिमाचल के बिलासपुर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. 14 फरवरी को दोपहर करीब 3:49 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई थी. भूकंप का केंद्र बिलासपुर में जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था. जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ था.



भूकंप की दृष्टि से हाई रिस्क जोन में 5 जिले
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में रिक्टर स्केल पर 4 या उससे अधिक की तीव्रता के भूकंप 80 से ज्यादा बार अनुभव किए गए है. बीआईएस भूकंपीय जोनिंग मानचित्र के अनुसार हिमाचल के 5 जिलों में खतरा सबसे ज्यादा है. इनमें चंबा जिले का 53.2%, हमीरपुर का 90.9%, कंगड़ा का 98.6%, कुल्लू का 53.1% और जिले मंडी का 97.4 फीसदी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से हाई रिस्क जोन में है.

शिमला में ज्यादा खतरा

शिमला जिला जोन 4 में है. प्रदेश में 4 अप्रैल 1905 में कांगड़ा में आए भूकंप से मची तबाही को कौन भूल सकता है. 7.8 तीव्रता के इस भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई, 53 हजार से ज्यादा मवेशी मारे गए, एक लाख से ज्यादा घर नष्ट हो गए और अरबों की संपत्ति का नुकसान हो गया. 19 जनवरी 1975 किन्नौर में 6.8 की तीव्रता के भूकंप से 60 लोगों की मौत हो गई, 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए और 2 हजार घर तबाह हो गए. 26 अप्रैल 1986 को धर्मशाला में धरती कांपी थी, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी, भवनों और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.
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