बिजली चोरी और ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई ने बढ़ाया हिमाचल बिजली बोर्ड का घाटा

रोहड़ू दौरे के दौरान ऊर्जा मंत्री ने बिजली चोरी की घटना को देखा. इसके बाद बिजली चोरी रोकने के लिए टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए गए हैं.


Updated: June 14, 2018, 11:12 AM IST
बिजली चोरी और ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई ने बढ़ाया हिमाचल बिजली बोर्ड का घाटा
हिमाचल में बिजली चोरी. (सांकेतिक तस्वीर.)

Updated: June 14, 2018, 11:12 AM IST
खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के लिए ट्रांसमिशन घाटा बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. 11 प्रतिशत तक पहुंच चुके ट्रांसमिशन लाइन ने बिजली बोर्ड की माली हालत को बिगाड़ कर रख दिया है. अब ऊर्जा मंत्री ने सभी सर्कलों से इसकी रिपोर्ट तलब की है.

पंद्रह दिन में मंत्री ने मांगी रिपोर्ट
बता दें कि किसी भी राज्य के बिजली बोर्ड की माली हालत कैसी है, यह इस पर निर्भर करता है कि उसका ट्रांसमिशन लॉस कितना है. हिमाचल का बिजली बोर्ड भी इसी लॉस के चलते वित्तीय संकट से जूझ रहा है. ट्रांसमिशन घाटा कम न होने की वजह से बोर्ड की माली हालत खराब हो रही है. इसके कई कारण हैं.

अब ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने विभाग के सभी सर्कलों से रिपोर्ट तलब की है. 15 दिन के भीत्तर ट्रांसमिशन घाटे की रिपोर्ट सरकार को देने के निर्देश दिए हैं. साथ ही घाटे के प्रमुख कारण क्या हैं, इसका भी रिपोर्ट में जिक्र करने को कहा है.

लंबी लाइनें और बिजली चोरी घाटे की वजह
दरअसल, ट्रांसमिशन घाटे की प्रमुख वजह लंबी ट्रांसमिशन लाइनें और बिजली चोरी माना जा रहा है. रोहड़ू दौरे के दौरान ऊर्जा मंत्री ने बिजली चोरी की घटना को देखा. इसके बाद बिजली चोरी रोकने के लिए टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

अब पूरे प्रदेश में भी इसी तरह से टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो बिजली चोरी पर नजर रखेगी. रोहड़ू के हालात पर ऊर्जा मंत्री ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह पर निशाना भी साधा. कहा कि सीएम रहते हुए इस क्षेत्र का विकास नहीं किया गया, लोग कम वोल्टेज में जी रहे हैं. यही वजह है कि लोग बिजली चोरी कर रहे हैं.

हिमाचल की आर्थिकी में बिजली उत्पादन का बड़ा योगदान
लंबी ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई को कम करने के लिए कम दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाना एक विकल्प है. इस पर तेजी से काम करने की जरूरत भी है. क्योंकि हिमाचल की आय का एक जरिया हाइडल भी है. लेकिन जब तक ट्रांसमिशन घाटे को कम नहीं किया जाता है, तब तक बिजली बोर्ड की आय बढ़ाना भी संभव नहीं है.

बता दें कि हिमाचल की आर्थिकी में बिजली उत्पादन का बड़ा योगदान है. हिमाचल पड़ोसी राज्यों को बड़ी मात्रा में बिजली बेचकर राजस्व जुटाता है.
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