Exclusive Shimla DDU Suicide: 4 घंटे तक वॉशरूम के सामने लटकी रही महिला की लाश

हिमाचल का शिमला शहर.
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Shimla DDU Suicide Case: डीसी शिमला (Shimla) ने मामले पर संज्ञान लेते हुए एडीएम लॉ एंड ऑर्डर को जांच का जिम्मा सौंपा है. वह दस दिन में पांच बिन्दुयों पर रिपोर्ट सौंपेंगे.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Shimla) के शिमला के डीडीयू अस्पताल (DDU) में कोरोना मरीज के सुसाइड (Suicide) के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है. अब कोविड केयर सेंटर (Covid Care Center) में व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि महिला को दवाओं (Medicine) नहीं दी जा रही थी. इसके अलावा, वहां व्यवस्था सही नहीं थी.

साथी महिला मरीज ने बताई कहानी
शिमला के रिप्पन यानी डीडीयू अस्पताल में 7 महीने की गर्भवती महिला का कोरोना का इलाज़ चल रहा है. उस महिला ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस दूसरी महिला का उसके साथ इलाज चल रहा है, कुछ देर में उसे इस महिला की लाश को देखनी पड़ेगी. महिला ने न्यूज18 के साथ पूरी कहानी साझा की है. साथ ही कहा कि उन्हें यहां पर और नहीं रहना है, वह घर जाना चाहती हैं और वहीं अपना इलाज करवाना चाहती है.
गर्भवती से हुई थी आखिरी बार बात
घटना मंगलवार रात करीब 12 बजे की है. चौपाल की 54 वर्षीय महिला ने अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड के बाहर आत्महत्या कर ली. महिला की लाश करीब 4 घंटे तक वहीं पर लटकती रहे. गर्भवती महिला ही थी, जिसने उस महिला ने आखिरी बार बात की थी. उस महिला के आखिरी शब्द थे, “मुझे अब इस दुनिया मे नहीं जीना.” कुछ समय बाद महिला ने आत्महत्या कर ली.
महिला ने बताया आंखों देखा हाल


7 महीने की गर्भवती महिला ने बताया कि आधी रात को करीब 12:30 बजे उसकी नींद खुली तो उसने आइसोलेशन वार्ड के बाहर महिला को फंदे पर लटके देखा. महिला ने तुरंत अपने साथ के मरीजों को बताया कि 54 वर्षीय बुजुर्ग ने आत्महत्या कर ली है. उस वक्त वार्ड में तीन महिलाएं और एक पुरुष का इलाज चल रहा था. महिला की लाश को देखकर वे लोग ज्यादा घबरा गए और वार्ड में ही मौजूद एक मरीज ने जब डॉक्टर को इस बारे में जानकारी दी तो सामने से जवाब आता है कि उन्हें इस घटना के बारे में जानकारी मिल चुकी है. पता होने के बावजूद महिला के शव को उठाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी नहीं पहुंचा. महिला की लाश रात 12:05 से करीब 3:30 बजे तक बाहर लटकती रही.
परेशान थी महिला, दवाएं तक नहीं दी
अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में अस्पताल में काम कर रहे एक कर्मचारी का भी कोरोना का इलाज चल रहा है. उन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि महिला और उन्हें एक ही दिन भर्ती किया गया था. पिछले तीन-चार दिन से महिला काफी परेशान थी. महिला ने खाना तक नहीं खाया था. उक्त महिला को हाई बीपी की प्रॉब्लम थी और सिर मैं काफी दर्द रहता था. अस्पताल प्रबंधन से महिला बार-बार कह रही थी कि उन्हें दवाई मुहैया करवाई जाए, लेकिन किसी ने अभी इतनी जहमत नहीं उठाई कि उन्हें दवाई दी जाए. महिला बार-बार कहती थी कि मुझे अब नहीं जीना है, लेकिन वार्ड में मौजूद किसी भी मरीज ने यह नहीं सोचा कि महिला परेशान होकर इतना बड़ा कदम उठा लेगी.
अस्पताल में कोरोना के साठ मरीज
प्रशासन की बड़ी लापरवाही के चलते यह मामला सामने आया है. अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में इस समय 60 कोरोना मरीज़ों का इलाज़ चल रहा है. केयर सेंटर प्रबंधन पर लोगों ने मरीजों को छोड़ा है. लेकिन वहां पर ना तो कोई सीसीटीवी कैमरा हैं और ना ही सुरक्षा के लिए कोई तैनाती की गई है. ऐसे में अनुमान लगा सकते बैं कि व्यवस्थाएं कैसी हैं. कई बार वार्ड में ना तो कोई डॉक्टर होता है, ना ही स्टाफ.
ये सवाल उठ रहे हैं
अब अस्पताल प्रबंधन दलील दे रहा है कि महिला मानसिक रोगी थी. इस वजह से उसने आत्महत्या कर ली. ऐसे में सवाल है कि अगर महिला मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थी तो उस महिला को वहाँ अन्य मरीज़ों के साथ वार्ड में क्यों रखा गया था. अगर महिला वहां पर थी और वह इतने दिनों से दवाइयों को लेकर परेशान थी तो उसे उसकी दवाइयां मुहैया क्यों नहीं करवाई गई. रात के समय में ड्यूटी पर अस्पताल प्रबंधन से कोई भी तैनात क्यों नहीं था.
बेटे ने भी लगाए हैं आरोप
54 वर्षीय महिला की मौत की जानकारी जब उसके बेटे को दे दी गई तो उसके बेटे ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी मां को अस्पताल में दवाइयां मुहैया नहीं दी जा रही थी. इस वजह से वह परेशान थे. महिला के बेटे ने बताया कि उनकी मां का यहां पर अच्छे से इलाज और ना ही उनकी अच्छे से देखभाल हो पा रही थी. बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर ही वह चौपाल से यहां पर आए थे.
मुझे अस्पताल में नहीं रहना- गर्भवती
News18 ने गर्भवती महिला ने बताया कि रात को जब वह शौचालय जाने के लिए उठे तो उन्होंने महिला को वॉशरूम के सामने लटके पाया. गर्भवती महिला इतनी डर चुकी हैं कि वो अस्पताल में नहीं रहना चाहती थी.
डीसी ने दिए हैं जांच के आदेश
अस्पताल के कार्यवाहक एमएस डॉ एसएस नेगी ने मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है, लेकिन डीसी शिमला (Shimla) ने मामले पर संज्ञान लेते हुए एडीएम लॉ एंड ऑर्डर को जांच का जिम्मा सौंपा है. वह दस दिन में पांच बिन्दुयों पर रिपोर्ट सौंपेंगे. डीसी ने पूछा है कि कोरोना पॉजिटिव महिला ने क्यों अस्पताल के भीतर यह कदम उठाया है. वहीं अस्पताल के भीतर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी जांच करने के निर्देश दिए हैं. गौरतलब है कि हिमाचल में कोरोना संक्रमित के कोविड सेंटर में सुसाइड करने का यह पहला मामला है.
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