फर्जी डिग्री मामला: APG यूनिवर्सिटी के खिलाफ जांच तेज, दिल्ली में CID की दबिश

शिमला की एपीजी यूनिवर्सिटी. (FILE PHOTO)

शिमला की एपीजी यूनिवर्सिटी. (FILE PHOTO)

Fake Degree Scam in Himachal: इस मामले में एपीजी विवि पर फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने का आरोप है. एपीजी के खिलाफ सीआईडी पुलिस स्टेशन भराड़ी में 2 मई 2020 को FIR दर्ज हुई है. IPC की धारा 465, 467, 471, 120B और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिस पर जांच चल रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2021, 12:45 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश में फर्जी डिग्री मामले (Fake Degree scam) में फंसी एपीजी यूनिवर्सिटी (APG University Shimla) के खिलाफ जांच अब तेज हो गई है. सीआईडी की एक टीम ने दिल्ली में दबिश दी है. बीते 4 दिनों से सीआईडी की टीम दिल्ली में डटी है और स्थानीय पुलिस की मदद से फर्जी डिग्री मामले की हर तह को खंगालने में जुटी है.

इस दबिश को लेकर सीआईडी (CID) के एडीजीपी एन.वेणुगोपाल ने News-18 से कहा कि अब तक की जांच को लेकर पूरी जानकारी अगले सप्ताह दी जाएगी. उन्होंने कहा कि डीजीपी संजय कुंडू खुद इसकी जानकारी देंगे.

इन पहलूओं पर जांच

सूत्रों की माने तो 4 सदस्यीय टीम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों से पूछताछ करेगी. बीते दिनों शिमला में सीआईडी ने एक कोर्स के छात्र से पूछताछ की थी. उससे पूछा गया था कि दिल्ली क्षेत्र के जिन छात्रों को डिग्रियां दी गई हैं, क्या वो छात्र उसके क्लासमेट हैं या नहीं. छात्र ने उन्हें पहचानने से इनकार किया था. सीआईडी ने एक प्रशनावली तैयार की है, उन छात्रों से कोर्स ,क्लासमेट और टीचर्स से लेकर अन्य तमाम तरह के प्रश्न पूछे जाएंगे ताकि इस बात का पता चल सके कि उन्होंने सही मायनों में यहां पर पढ़ाई की है या फिर फर्जी तरीके से डिग्री हासिल की है. मुख्यत: बी.टेक,लॉ और बीबीए कोर्स के पासऑउट छात्रों से पूछताछ की संभावना है.
कई डिग्रियां फर्जी

सूत्रों ने पहले खुलासा किया था कि सीआईडी जांच में अब तक एपीजी यूनिवर्सिटी की लगभग 45 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं. जांच जारी है और फर्जी डिग्रियों संख्या बढ़ सकती है. बीएएलएलबी, एलएलबी और बीबीए कोर्सिज की डिग्रियां फर्जी होने की सूचना है. बीएएलएलबी के 2013 बैच की 2, एलएलबी के 2014 की 26 और इसी बैच में दो छात्रों की फर्जी एडमिशन भी सामने आई है. इसके अलावा 2015 बैच के बीबीए कोर्स की 11 डिग्री फर्जी पाई गई हैं. इसके अलावा बीटेक,एमबीए,फैशन डिजाइनिंग,बीएचएम समेत अन्य कई कोर्सों की जांच भी जारी है.

ई-मेल के जरिए गवाही



जानकारी ये भी है कि इस मामले में जो एक गवाह है,उसने ई-मेल के जरिए अपना बयान दर्ज किया था. ये गवाह एपीजी विश्वविद्यालय का पूर्व शिक्षक है और अभी राज्य से बाहर होने के चलते ये बयान ई-मेल के जरिए दिया गया था

2 मई 2020 को हुई थी FIR

बता दें कि इस मामले में एपीजी विवि पर फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने का आरोप है. एपीजी के खिलाफ सीआईडी पुलिस स्टेशन भराड़ी में 2 मई 2020 को FIR दर्ज हुई है. IPC की धारा 465, 467, 471, 120B और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिस पर जांच चल रही है.

एक पूर्व छात्र के बयान भी दर्ज हैं

सूत्रों के अनुसार, एपीजी विवि के एक पूर्व छात्र ने सीआईडी के पास अपने बयान दर्ज करवाए थे. जानकारी के मुताबिक एपीजी ने जो रिकार्ड दिया है, उसके अनुसार 2014-2017 सत्र में एलएलबी कोर्स में यूनिवर्सिटी की ओर से 33 डिग्रियां दी गई लेकिन इस पूर्व छात्र के बयान के अनुसार उसके साथ केवल 9 छात्र ही पढ़े हैं. ये पूर्व छात्र वर्तमान में नौकरी करता है और इसने शैक्षिणक सत्र 2014-17 में एलएलबी का कोर्स किया है. छात्र के बयान सीआईडी थाना में दर्ज करवाए गए हैं.
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