फर्जी डिग्री मामला: MBU के खिलाफ जांच में तेज, APG यूनिवर्सिटी के खिलाफ जांच सुस्त

शिमला की एपीजी और सोलन की एमबीयू यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री स्कैम.
शिमला की एपीजी और सोलन की एमबीयू यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री स्कैम.

Fake Degree Scam in Himachal: डीजीपी संजय कुंडू ने बयान जारी कर कहा था कि दोनों मामलों में विशेष टीमें जांच कर रही हैं और हर 15 दिन बाद जांच की समीक्षा खुद करेंगे. इस बयान को भी काफी समय बीत गया, उसके बाद से डीजीपी चुप हैं.

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शिमला. हिमाचल में बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले (Fake Degree Scam) की जांच चल रही है. मामले में फंसी मानव भारती यूनिवर्सिटी (Manav Bharti University) के खिलाफ एसआईटी की जांच बड़ी तेजी से चल रही है, एसआईटी (SIT) हिमाचल से लेकर देश के कई राज्यों में दबिश दे रही है, लेकिन एपीजी यूनिवर्सिटी के खिलाफ जांच सुस्त है. जांच का दायरा शिमला (Shimla) से आगे नहीं बढ़ रहा है लेकिन सूत्र बड़ा खुलासा कर रहे हैं.

अब तक 90 डिग्रियां फर्जी

सूत्रों के मुताबिक, एपीजी यूनिवर्सिटी मामले में अब 12 से ज्यादा लोगों की गवाही हो चुकी है, इन गवाहों ने कई राज उगले हैं. कुछ गवाहों के 164 के तहत बयान दर्ज हुए. इन गवाहों से मिली अहम जानकारी के बाद अब तक की सीआईडी जांच में करीब 90 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं. एक खुलासा ये भी हुआ है कि डिग्रियां बनाने के लिए दिल्ली से एक शुगर मिल की ई-मेल आईडी से एपीजी विवि की ऑफिशियल ई-मेल आईडी पर मेल आई है, जिसे सीआईडी ने बरामद कर लिया है.



इन लोगों की हुई गवाही
सीआईडी के सामने जिन लोगों की गवाही हुई है,उनमें निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग की पूर्व सचिव, आयोग के पूर्व सदस्य और पूर्व शिक्षकों के अलावा पूर्व छात्र शामिल हैं. एक एग्जामिनेशन सेल के कर्मचारी की गवाही दर्ज होने की भी सूचना है. जानकारी के मुताबिक इन लोगों ने कई राज उगले हैं,इसी के आधार पर सीआईडी को ये पता लगा है कि डिग्रियां फर्जी हैं. अब तक लगभग 90 डिग्रियों के फर्जी होने का पता चल पाया है लेकिन इन्हें साबित करना बाकी है. जो फर्जी पाई गई हैं वो एलएलबी, बीबीए और बीटेक कोर्स की डिग्रियां बताई जा रही हैं.

डिग्री बनाने के लिए दिल्ली से ई-मेल

सूत्र बता रहे हैं कि डिग्रियां बनाने के लिए दिल्ली से भी ई-मेल की गई है. दिल्ली क्षेत्र की एक शुगर मिल की ई-मेल आईडी से एपीजी यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल मेल आईडी पर एक मेल की गई है. अक्तूबर 2018 में की गई इस मेल में 53 छात्रों की लिस्ट है जिनकी डिग्रियां बनाने की बात कही गई है. सीआईडी ने इस मेल को भी बरामद कर लिया है. ये मेल सबसे पहले एपीजी विवि के रजिस्ट्रार के पास गई,उसके बाद एनरोलमेंट डिपार्टमेंट और फिर एग्जामिनेशन सेल को भेजी गई. इस लिस्ट में 33 छात्र एलएलबी के और अन्य बीबीए और बीटेक के हैं.

रसूखदारों से पूछताछ बाकी

बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ रसूखदारों से भी पूछताछ होनी है. इस मामले में मई महीने में एफआईआर हुई थी लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी किसी रसूखदार से पूछताछ नहीं हुई है. ऐसा नजर आ रहा है कि शायद सीआईडी कतरा रही है या फिर किसी बड़े रैंक के अधिकारी से पूछताछ करवाने पर विचार किया जा रहा है.

गिरफ्तारी किसी की नहीं

इस मामले पर सीआईडी जांच पर भी कई सवाल उठ रहे हैं. इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है जबकि मानव भारती विवि और एपीजी विवि के खिलाफ लगभग एक ही धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज है. मानव भारती के खिलाफ जांच का दायरा बहुत बड़ा है, कई दिनों तक छापेमारी चलती रही और गिरफ्तारियां भी हुई. सीआईडी की टीम को राज्य बाहर जाकर एपीजी विवि की डिग्रियां भी बरामद करनी है जिससे साबित हो सके की सही मायनों में फर्जीवाड़ा हुआ है लेकिन अब तक कोई टीम बाहर नहीं गई है. इस मामले में सीआईडी के अधिकारी केवल एक लाइन दोहरा रहे हैं कि जांच जारी है.

डीजीपी की चुप्पी

इस बाबत हाल ही में डीजीपी संजय कुंडू ने बयान जारी कर कहा था कि दोनों मामलों में विशेष टीमें जांच कर रही हैं और हर 15 दिन बाद जांच की समीक्षा खुद करेंगे. इस बयान को भी काफी समय बीत गया, उसके बाद से डीजीपी चुप हैं. मंगलवार को जब डीजीपी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वो इस वक्त कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि वो क्वॉरंटीन में हैं. गृह विभाग के एक आला अधिकारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं और वो उनके संपर्क में आए थे, इसलिए अभी बात नहीं कर सकते. आपको बता दें कि इस मामले में एपीजी विवि के खिलाफ सीआईडी पुलिस स्टेशन भराड़ी में FIR दर्ज है. IPC की धारा 465, 467, 471, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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