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शिमला पुलिस की दादागिरी: सिंघू बॉर्डर से रिज पहुंचे 3 किसान गिरफ्तार, मीडिया से धक्का-मुक्की

शिमला पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था.
शिमला पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था.

Farmers detained by Shimla Police: हिरासत में लिए गए किसान हरप्रीत ने कहा कि रिज मैदान पर उनके हाथ कुछ नहीं था, न ही कोई प्रदर्शन कर रहे थे और न ही कोई नारेबाजी की गई. उनकी योजना यही थी कि दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक करें और समर्थन करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:30 AM IST
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शिमला. हिमाचल की राजधानी शिमला में पुलिस की दादागिरी देखने को मिली. मंगलवार सुबह पंजाब से 3 किसान शिमला पहुंचे, इन तीनों का कहना था कि ये किसान आंदोलन को लेकर लोगों को जागरूक करने आए हैं और समर्थन जुटा रहे हैं. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जा रहे हैं. रिज मैदान पर जब ये तीनों खड़े थे तो उस वक्त पुलिस के साथ इनकी बातचीत चल रही थी. थोड़ी ही देर में पुलिस ने इन्हें पकड़ा और सदर थाने की ओर ले जाने लगी. इस बीच मीडियाकर्मी भी कवरेज के लिए पहुंचे थे.

मीडिया के सवाल से झल्लाई पुलिस
मीडिया ने जब पुलिस से सवाल पूछा तो मौके पर मौजूद अधिकारी झल्ला गए और मीडियाकर्मी को धक्के दिए. इतना ही नहीं एक महिला पत्रकार को भी धक्का दिया गया. मीडियाकर्मियों ने बताया कि एडिश्नल एसपी सुशील कुमार शर्मा ने धक्का दिया.इतना ही नहीं सुशील कुमार शर्मा बिना वर्दी के ही मौके पर पहुंचे थे. जिस किसान को पुलिस बाजू से पकड़ कर ले जा रही थी, मीडिया कर्मी उसका पक्ष जानना चाह रहे थे, लेकिन सदर थाने के एसएचओ संदीप ने माइक को धक्का देकर हटा दिया. इस बीच काफी मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई. इस दौरान पुलिस दलील दे रही थी कि रिज मैदान पर प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है. किसान लगातार कह रहे थे कि वो किसी तरह का प्रदर्शन नहीं कर रहे थे और न ही कोई नारेबाजी कर रहे थे, उन्हें वेबजह पकड़ा जा रहा है, पुलिस ने किसी की एक नहीं सुनी और सीधे सदर थाने लेकर गई और घंटो हिरासत में रखा.

ये बोले एसपी
इस बाबत एसपी मोहित चावला ने कहा कि सुरक्षा कारणों से उन्हें हिरासत में लिया गया था. पुलिस को लगातार कई तरह के इनपुट मिल रहे थे,जिसके आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया. तीनों की तरफ से प्रदर्शन करने की किसी से इजाजत नहीं ली गई थी, न ही जिला प्रशासन और न ही पुलिस से अनुमति मांगी गई थी. आईपीसी की धारा 107 और 150 के तहत कार्रवाई अमल में लाई गई. एसपी ने कहा कि उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, एसडीएम के सामने उन्हें पेश किया गया था. किसानों को सर्शत जमानत मिली है. मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी के मामले पर एसपी ने कहा कि जानबूझकर किसी को धक्का नहीं दिया गया, मौके पर बने हालातों के कारण ऐसा हुआ, इसके लिए एएसपी ने माफी मांगी गई है.



कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पहुंचे सदर थाने
पूरे घटनाक्रम की सूचना जैसे ही कांग्रेस के मुखिया के पास पहुंची तो तुरंत कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर वकीलों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ सदर थाने पहुंचे. राठौर ने तीनों से मुलाकात की और मदद का भरोसा दिया. मीडिया से बातचीत में राठौर ने कहा कि पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से तीनों को हिरासत में लिया है और ये पूरी कार्रवाई सरकार के इशारे पर हुई है. उन्होंने कहा मुकद्दमा होने की सूरत में कांग्रेस हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. मीडियाकर्मियों के साथ हुई बदसलूकी पर उन्होंने खेद जताया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को माफी मांगनी चाहिए.

ये बोले किसान
हिरासत में लिए गए किसान हरप्रीत ने कहा कि रिज मैदान पर उनके हाथ कुछ नहीं था, न ही कोई प्रदर्शन कर रहे थे और न ही कोई नारेबाजी की गई. उनकी योजना यही थी कि दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक करें और समर्थन करें. हरप्रीत ने कहा कि हम लोगों को बताना चाहते हैं कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसान खालिस्तानी नहीं हैं और न ही आतंकवादी है. हम शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचे लेकिन पुलिस ने हमें आगे जाने से रोका और हिरासत में ले लिया. उन्होंने कहा कि हमारी कोई बात नहीं सुनी गई, पुलिस व्यवहार सही नहीं था.
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