करोड़ों के घोटाला मामले में 7 साल बाद फिर खुलेगी फाइल, सरकार ने दोबारा जांच के दिए आदेश

इस बाबत आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि बजट साइन कंपनी का ये केस पिछले सात सालों से पेंडिंग था. (सांकेतिक फोटो)
इस बाबत आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि बजट साइन कंपनी का ये केस पिछले सात सालों से पेंडिंग था. (सांकेतिक फोटो)

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, 2012 में ये मामला सामने आया था. इस मामले में उस दौरान बद्दी में तैनात ईटीओ और आकलन अधिकारी (Assessing Officer) को आरोपी बनाया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 1, 2020, 1:12 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के आबकारी एवं कराधान विभाग में 12 करोड़ 62 लाख 54 हजार 486 रुपए के कथित घोटाले से जुड़े एक मामले की फिर से जांच होगी. इस पूरे प्रकरण में 7 साल बाद एक कंपनी के साथ-साथ उस अधिकारी की भी फाइल खुलेगी, जिसमें उसे क्लीन चिट मिल चुकी है. अब कर वसूली के मामले की जांच की जाएगी. आबकारी एवं कराधान विभाग (Excise And Taxation Department) के आयुक्त रोहन चंद ठाकुर (Rohan Chand Thakur) ने बजट साइन कंपनी की दोबारा असेस्मेंट करने के आदेश दिए हैं. आरोप है कि कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में हेर-फेर कर 12.50 फीसदी के बजाए मात्र 4 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स लिया गया. इस पूरे मामले पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बू आ रही थी. लेकिन कई सालों से विभाग के कई अधिकारी मामले पर किसी न किसी तरीके के पर्दे डालते रहे.

2012 में सामने आया था मामला, बिना जांच क्लीनचिट
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, 2012 में ये मामला सामने आया था. इस मामले में उस दौरान बद्दी में तैनात ईटीओ और आंकलन अधिकारी को आरोपी बनाया गया था. और उस पर तीन चार्जशीट की गई थी. विभागीय जांच में कई तरह की गड़बड़ियां हुईं, टैक्स ट्रिब्यूनल की भूमिका भी संदेह के घेरे में रही. लेकिन अंत में मई 2020 को आरोपी अधिकारी को क्लीनचिट दे दी गई. आरोप था अधिकारी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए 15 कंपनियों को लाभ पहुंचाया. नियमों के तहत कंपनियों से 12.50 फीसदी के हिसाब से कर लिया जाना चाहिए था लेकिन आरोपी अधिकारी ने केवल 4 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स लिया. इसके लिए जाली मुहर का इस्तेमाल किया, जिससे सरकार को करोड़ों का चूना लगा. इनमें एक कंपनी बजट साइन भी थी, जिसे फायदा पहुंचाने की बात कही गई. मैसर्स बजट साइन कंपनी के साथ मिलीभगत के आरोप लगे. लेकिन उस समय के उच्च अधिकारियों के द्वारा पेश की गई गलत रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने सभी आरोप खारिज कर दिए. इस मामले की जांच नहीं होने दी गई. जो जांच हुई उसे कई तरीकों से प्रभावित किया गया. अंत में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को गुमराह कर आरोपी अधिकारी को क्लीन चिट दे दी गई.

ये बोले आयुक्त
इस बाबत आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि बजट साइन कंपनी का ये केस पिछले सात सालों से पेंडिंग था. मामले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद पाया गया कि असेस्मेंट कम हुई है. इसलिए अब इसकी री-असेस्मेंट करने के आदेश दिए गए हैं.



सीएम को गुमराह कर बंद करवाई गई जांच
इस मामले में सीएम को गुमराह करने की बात भी सामने आ रही है. 11 मई 2020 को आरोपी अधिकारी के खिलाफ चल रही जांच को बंद करने के लिए सरकार के साथ पत्राचार किया गया था. जानकारी के अनुसार उस समय जांच कमेटी की रिपोर्ट के बिना ही आला अधिकारियों ने जांच बंद करने की सिफारिश की, जिस पर सरकार ने 22 मई 2020 को अपनी स्वीकृति दे दी और विभाग ने 27 मई 2020 को जांच बन्द करने के आदेश पारित कर दिए. अब आशंका है कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखा गया. हालांकि, जिसे क्लीन चिट मिली है उस अधिकारी ने सारे आरोप नकारे हैं और नियमों के तहत कार्य करने की बात कही है. अब देखना होगा कि अब फिर से असेस्मेंट होगी तो क्या कुछ निकल कर सामने आएगा.
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