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15वें वित्तायोग की हिमाचल को सौगात, 11 हजार करोड़ रुपये वार्षिक ग्रांट की सिफारिश

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: February 10, 2020, 10:49 AM IST
15वें वित्तायोग की हिमाचल को सौगात, 11 हजार करोड़ रुपये वार्षिक ग्रांट की सिफारिश
15वें वित्त आयोग ने हिमाचल को सौगात दी है.

गौरतलब है कि हिमाचल की कुल कमाई 33 हजार 747 करोड़ रूपये है जबकि कुल खर्चे 36 हजार 89 करोड़ है. ऐसे में कुल राजस्व घाटा 2 हजार 342 करोड़ है जबकि राजकोषीय घाटा 7 हजार 352 करोड़ रुपये है.

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शिमला. कर्ज तले दबे हिमाचल (Himachal Pradesh) पर 15वां वित्तायोग (Finance Commission) मेहरबान हो गया है. 15वें वित्तायोग ने हिमाचल का राजस्व घाटा (Revenue Loss) अनुदान बढ़ाकर 45 प्रतिशत कर दिया है, जबकि जिला परिषद और बीडीसी का बजट भी बहाल कर दिया है.

जिला परिषद-बीडीसी का बजट खत्म कर दिया था
14वें वित्तायोग ने जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों को मिलने वाले बजट को खत्म कर दिया था. पांच साल तक यह बजट सीधे ही पंचायतों को मिलता रहा है. जिला परिषद और बीडीसी की चुनकर आते हैं. ऐसे में लोगों को उनसे भी उम्मीदें रहती हैं. लेकिन 14वें वित्तायोग ने बजट को खत्म कर दिया था, जिसके बाद जिला परिषद और बीडीसी लंबे अरसे से केंद्र सरकार से बजट बहाली की मांग कर रहे थे.

फैसले का स्वागत किया

बहरहाल, अब जिला परिषद और बीडीसी भी विकास कार्यों के लिए अपनी निधि से धन दे सकेंगे. विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि बजट बहाल करने के लिए सीएम जयराम ठाकुर ने भी पैरवी की थी. विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि यह पीएम मोदी के प्रयासों से ही संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि वह खुद भी जिला परिषद सदस्य रहे हैं. तब 13वां वित्तायोग चल रहा था.

कर्मचारियों का सैलरी संकट नहीं होगा
15वें वित्तायोग ने हिमाचल के राजस्व घाटा अनुदान को भी 45 प्रतिशत किया है. हिमाचल को केंद्र से सालाना 11 हजार करोड़ रूपये की आर्थिक मदद मिलेगी. इससे कर्मचारियों का सैलरी संकट टल गया है. सरकार को कर्मचारियों की सैलरी के लिए कर्ज लेना पड़ रहा था. 15 वित्तायोग की सिफारिशों के बाद अब पांच साल तक कर्मचारियों की सैलरी के लिए वित्तीय संकट खड़ा नहीं होगा. विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है. इससे प्रदेश की महत्वपूर्ण जरूरतें पूरी होंगी.यह बोले सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश को 11 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक अनुदान की सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि यह धनराशि प्रदेश में विकास को और गति देने के लिए उपयोग में लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश के तीव्र और संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और केंद्र सरकार से राज्य को भरपूर यहयोग मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, जिसके लिए राज्य सरकार केंद्र की आभारी हैं.

इतनी कमाई, इतना खर्च
गौरतलब है कि हिमाचल की कुल कमाई 33 हजार 747 करोड़ रूपये है जबकि कुल खर्चे 36 हजार 89 करोड़ है. ऐसे में कुल राजस्व घाटा 2 हजार 342 करोड़ है जबकि राजकोषीय घाटा 7 हजार 352 करोड़ रुपये है. इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार अक्सर कर्ज लेती है, लेकिन अब केंद्र से सहायता अनुदान मिलने पर एक बोझ कम हो जाएगा.

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First published: February 10, 2020, 10:49 AM IST
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