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विदेशी दंपति हिमाचली बच्चे गोद लेने में दिखा रहे दिलचस्पी, इन देशों में पलेंगे ये बच्चे

Reshma Kashyap | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 23, 2019, 7:12 PM IST
विदेशी दंपति हिमाचली बच्चे गोद लेने में दिखा रहे दिलचस्पी, इन देशों में पलेंगे ये बच्चे
गुनगुन को फ्रांसीसी दंपति ने गोद लिया है.

हिमाचल के बच्चों को गोद (Child Adoption) लेने के लिए विदेशी (Foreigner) काफी रुचि दिखा रहे हैं. यही वजह है कि राज्य शिशु गृह में रह रही बच्ची राधिका (Radhika) को तो अमरीका (American Family) का एक परिवार मिल चुका है. इतना ही नहीं, शिशु गृह में पल रहे तीन और मासूमों को भी विदेशी दंपति गोद लेने वाले हैं.

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शिमला. हिमाचल के बच्चों को गोद लेने  (Child Adoption)  के लिए विदेशी (Foreigner) काफी रुचि दिखा रहे हैं. यही वजह है कि राज्य शिशु गृह में रह रही बच्ची राधिका (Radhika) को तो अमरीका का एक परिवार मिल चुका है. इतना ही नहीं, शिशु गृह में पल रहे तीन और मासूमों को भी विदेशी दंपति गोद लेने वाले हैं. शिमला शिशु गृह के तीन और बच्चों को गोद लेने के लिए विदेशी दंपति आगे आए हैं. इसमें से एक बच्ची गुनगुन को फ्रांस की दंपति गोद लेने वाली है. इस बारे में प्रक्रिया लगभग पुरी हो चुकी है. बस कोर्ट से ऑर्डर आने की देर है. ऑर्डर मिलते ही बच्ची को उनके नए परिवार को सौंपा जाएगा. यह दंपति मंजूरी मिलते ही गुनगुन को अपने साथ ले जाने के लिए राज्य शिशु गृह आएंगे.

किआर को अमरीकी दंपति ले रही है गोद

गुनगुन के बाद देव को भी इटली के दंपति ने गोद लेने के लिए आवेदन किया है. वहीं आश्रम में एक और बच्ची है जो स्पेशल नीड चाइल्ड है. इस बच्ची का नाम किआर है, जिसे अमेरिका की दंपति ने गोद लेने के लिए कारा के जरिए अप्रोच किया है. बाल कल्याण परिषद की अध्यक्ष पालय वैद्य ने बताया कि स्पेशल नीड चाइल्ड ऐसे बच्चे होते हैं, जिन्हे मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत रहती है.

राधिका को अमरीकी दंपति ने लिया था सालभर पहले गोद

पायल ने बताया कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को जब से कारा के तहत ऑनलाइन किया गया है, तब से विदेशी दंपतियों के लिए भी हिमाचली बच्चों को गोद लेने के रास्ते खुल गए हैं. इस प्रक्रिया के होने के बाद विदेशों से 3 दंपति बच्चों को गोद लेने के लिए आगे आए हैं. विदेश से सबसे पहले राधिका नाम की बच्ची को कारा के जरिए गोद लिया. राधिका को अपने नए परिवार के साथ रहते हुए करीब एक साल हो चुका है. राधिका उस परिवार में बेहद खुश है.



वर्ष 2014 से पहले स्टेट अडॉप्शन के जरिये बच्चे गोद दिए जाते थे
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पायल ने बताय कि किसी भी बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया 2014 से पहले स्टेट अडॉप्शन एजेंसी ही पूरी करती थी. इसके तहत एक कमेटी का गठन किया जाता था जो यह तय करता था कि बच्चा किसे गोद दिया जाना है, लेकिन वर्ष 2014 से बाद इस प्रक्रिया को बदल कर केंद्र मंत्रालय ने कारा यानी सेंट्रलाइज्ड चाइल्ड अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी जो कि एक वेबसाइट है उसके जरिये बच्चा गोद देने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. अब बच्चा गोद लेने वाले भारतीय हो या विदेशी वह कोई भी इस वेबसाइट पर अपनी पूरी जानकारी उपलब्ध करवा कर बच्चा गोद ले सकते हैं.

बच्चा गोद देने से पहले आवेदक की करवाई जाती है होम स्टडी

उन्होंने बताया कि जो भी आवेदन कारा की ओर से आते हैं, उन आवेदकों को बच्चा गोद देने से पहले उनकी होम स्टडी करवाई जाती है जिसमें चिन्हित एजेंसियां यह देखती है कि परिवार केसा है , क्या दोनों पति- पत्नी बच्चे को गोद लेना चाहते हैं. बच्चे की ज़रूरतों ओर उनके भविष्य को परिवार सुरक्षित कर सकता है या नहीं. बच्चा गोद देने के बाद प्रक्रिया यही खत्म नहीं होती बल्कि 6-6 माह के बाद लगातार 2 सालों तक इसी तरह की होम स्टडी सोशल वर्कर के माध्यम से करवाई जाती है कि बच्चा परिवार के साथ सुरक्षित है या नहीं. हिमाचल के बच्चों को गोद लेने के लिए विदेश ज्यादा रूची दिखा रहे हैं, क्योंकि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में हिमाचल में सबसे कम समय लगता है और तेज प्रभाव से सभी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं.

गोद दिए जाने वाले इन परिस्थितियों के बच्चे होते हैं

ये वहीं बच्चे है जिन्हें या तो इनकी मां ने झाड़ियों में फेंक दिया जाता है. ये वही बच्चे होते हैं जिन्हें गुरूद्वारे और मंदिर की चौखट पर रख कर उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाता है. इन में से कुछ बच्चे तो ऐसे भी है जिन्हें तो दुष्कर्म पीड़िताओं ने जन्म दिया होता है और समाज के डर से उन्हें आश्रम में छोड़ दिया जाता है.

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First published: November 23, 2019, 7:01 PM IST
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