फर्जी पत्र लेकर ज्वाइनिंग को IGMC शिमला पहुंचे महिला सहित 4 युवक, जांच शुरू
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फर्जी पत्र लेकर ज्वाइनिंग को IGMC शिमला पहुंचे महिला सहित 4 युवक, जांच शुरू
शिमला का आईजीएमसी अस्पताल. (सांकेतिक तस्वीर)

Fake Joining Letter issue: 17 फरवरी को टांडा मेडिकल कॉलेज से ट्रांसफर के जो दो मामले सामने आए थे. उनमें संबंधित प्रिसिंपल के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए थे, जिसके चलते IGMC प्रशासन एकदम हरकत में आया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइन करने का मामला सामने आया है. बीते मंगलवार को महिला सहित तीन युवक आईजीएमसी पहुंचे थे. अब मामले पर शिमला पुलिस ने अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर छानबीन की और सभी पूछताछ की गई. लक्कड़ बाजार चौकी में पूछताछ की गई है. पुलिस के मुताबिक इसके तार चंबा से जुड़े हैं.सभी दस्तावेजों को चंबा पुलिस को भेज दिया गया है.

ये है मामला
IGMC में 3 लोग एक नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे थे, जबकि एक महिला जो खुद को नर्स बता रही थी, वह चंबा मेडिकल कॉलेज से IGMC के लिए ट्रांसफर लेटर लेकर आई. अस्पताल प्रशासन ने नियुक्ति पत्र, ज्वाइनिंग लेटर समेत जब अन्य दस्तावेजों को खंगाला तो सब फर्जी निकला. नियुक्ति पत्र और ट्रांसफर लेटर में लिखी गई भाषा सरकारी भाषा से मेल नहीं खा रही थी. इतना ही नहीं, कई शब्दों की स्पेलिंग तक गलत लिखी हुई थी.

फर्जी साइन किए थे



पुलिस को दी गई शिकायत में प्रशासन ने साफ लिखा है कि दस्तावेजों डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के हस्ताक्षर हैं, जोकि फर्जी हैं. क्योंकि डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट का पद दो साल पहले ही खत्म कर दी गई है. अस्पताल प्रशासन ने जब खुद छानबीन की तो पता चला कि जो कथित महिला नर्स है, उसके बैंक खाते में पिछले 2 साल से हर माह पैसे जमा होते हैं. 40 से लेकर 46 हजार रुपये तक की राशि जमा होती है, जिसे यह महिला सैलरी बताती है.



सरकारी की पत्र की भाषा से ही पता चलता है कि लेटर फर्जी है.
सरकारी की पत्र की भाषा से ही पता चलता है कि लेटर फर्जी है.


नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी में बड़ा गिरोह
जानकारी मिली है कि यह पूरा मामला इसी महिला के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है. ऐसा नजर आ रहा है कि एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है जो नौकरी के नाम पर लोगों को ठगता है और पैसे ऐंठ लेता है. जानकारी यह भी मिली है कि IGMC में ज्वाइनिंग के लिए दो युवक पहले कहीं प्राइवेट नौकरी करते थे और अच्छी सैलरी लेते थे, पर सरकारी नौकरी के लालच में गिरोह के झांसे में आ गए और नौकरी पाने के लिए पैसे दिए. जानकारी यह भी मिली है कि यह गिरोह शातिराना तरीके से लोगों को फंसाता है. संबंधित नौकरी को लेकर फर्जी सेमीनार करवाता है. किसी को शक न हो इसके लिए असाइनमेंट से लेकर अन्य गतिविधियां भी करवाता था.

पुलिस से शिकायत
17 फरवरी को टांडा मेडिकल कॉलेज से ट्रांसफर के जो दो मामले सामने आए थे. उनमें संबंधित प्रिसिंपल के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए थे, जिसके चलते IGMC प्रशासन एकदम हरकत में आया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. अब आगामी जांच के लिए इस मामले को चंबा पुलिस के हवाले किया गया है. शिमला के एसपी ओमापति जम्बाल ने बताया कि पुलिस ने इन सभी से पूछताछ की गई है. जितने भी दस्तावेज थे, खंगाले गए हैं और सामने आया है कि मामला चंबा से जुड़ा हुआ है.

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