हिमाचल प्रदेश: मॉनिटर लिजार्ड का अवैध शिकार करते चार गिरफ्तार, वन्य प्राणी अधिनियम के तहत FIR

हिमाचल प्रदेश: मॉनिटर लिजार्ड का अवैध शिकार करते चार गिरफ्तार, वन्य प्राणी अधिनियम के तहत मुकदमा.

सिरमौर जिला के रेणुका में धारटीधार क्षेत्र के बायल गांव में चार लोगों को गौह सरीसृप की प्रजाति के जानवर का अवैध शिकार करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है. चारों ही लोग माजरा के रहने वाले बताए जा रहे हैं.  

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    रोनहाट. देव भूमि हिमाचल प्रदेश में  सरीसृप की एक दुर्लभ प्रजाति के गौह (मॉनिटर लिजार्ड) के शिकार का मामला सामने आया है. यह वन्य-प्राणी अधिनियम के तहत संकटगत अबल सूची में शामिल है.

    जानकारी के अनुसार सिरमौर ज़िला के रेणुका में धारटीधार क्षेत्र के बायल गांव में चार लोगों को गौह सरीसृप की प्रजाति के जानवर का अवैध शिकार करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है. चारों ही लोग माजरा के रहने वाले बताए जा रहे हैं. जोकि वन विभाग की कांनस बीट में तीन गौह का अवैध शिकार करते दबोचे गए हैं. जिनमें से दो गौह मृत वा एक गौह जिंदा पाई गई. जिन्दा गौह को जंगल मे छोड़ दिया गया, जबकि मृत को पशु चिकित्सालय ददाहू मे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. रेणुका पुलिस ने चारों लोगों को गिरफ्तार करके वन्य प्राणी अधिनियम की धारा 51A के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है.

    दरअसल, रेणुका जी वन मंडल के डीएफओ श्रेष्ठानंद शर्मा शुक्रवार रात्रि को पांवटा साहिब की तरफ से रेणुका जी आ रहे थे. तभी बायला के निकट चार लोगों को उन्होंने गौह का अवैध शिकार करते हुए पाया. जिसकी सूचना उन्होंने वन खंड अधिकारी कांसर को दी. साथ ही उन चारों को पकड़कर रेणुका पुलिस के सुपुर्द कर दिया.

    पुलिस ने माजरा निवासी जुगनू, बिट्टू, अजय व राजकुमार को गिरफ्तार करके उनसे पूछताछ शुरु कर दी है.  इन लोगों द्वारा इस सरीसृप प्रजाति के जीव का शिकार तस्करी की मंशा से किया जा रहा था. गौह को वन्य-प्राणी अधिनियम के तहत संकटगत अबल सूची में शामिल है, जिसके चलते इसके शिकार पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है. बावजूद इसके गौह का खाने और उसकी खाल के लिए कई जगहों पर गैर कानूनी तरीके से शिकार किया जाता है.

    गौरतलब है कि गौह सरीसृपों के स्क्वामेटा गण के वैरानिडी कुल के जीव हैं, जिनका शरीर छिपकली के सदृश, लेकिन उससे बहुत बड़ा होता है. गौह छिपकलियों के निकट संबंधी हैं, जो अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, अरब और एशिया आदि देशों में फैले हुए हैं. ये छोटे बड़े सभी तरह के होते है, जिनमें से कुछ की लंबाई तो 10 फुट तक पहुंच जाती है. इनका रंग प्राय: भूरा रहता है. इनका शरीर छोटे छोटे शल्कों से भरा रहता है. इनकी जबान सांप की तरह दुफंकी, पंजे मजबूत, दुम चपटी और शरीर गोल रहता है.

    इनकी कई प्रजातियां हैं, लेकिन इनमें सबसे बड़ा ड्रैगन ऑव दि ईस्ट इंडियन ब्लैंड लंबाई में लगभग 10 फुट तक पहुंच जाता है. नील का गोह अफ्रीका का बहुत प्रसिद्ध गोह है और तीसरा अफ्रीका के पश्चिमी भागों में काफी संख्या में पाया जाता है. इसकी पकड़ बहुत ही मजबूत होती है.

    भारत में छह प्रजातियां

    भारत में गोहों की छ: प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कवरा गोह सबसे प्रसिद्ध है. इसके बच्चे चटकीले रंग के होते हैं, जिनकी पीठ पर बिंदियां पड़ी रहती हैं और जिन्हें हमारे देश में लोग 'बिसखोपरा' नाम का दूसरा जीव समझते हैं. लागों का ऐसा विश्वास है कि विषखोपड़ा बहुत जहरीला होता है.

    पुलिस थाना रेणुका के प्रभारी देवी सिंह नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि वन्य प्राणी अधिनियम के तहत गोह के अवैध शिकार का मामला दर्ज किया गया है. मामले में चारों आरोपितों के विरुद्ध वन्य प्राणी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके पूछताछ की जा रही है. दोनों मरे हुए गौह का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सालय ददाहू में करवाया जा रहा है. शिकार किस मंशा से किया गया है इस बात का पता पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा.

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