COVID-19: शिमला के डेडिकेटेड DDU अस्पताल में क्लास फोर के कर्मचारी ले रहे कोरोना टेस्ट
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COVID-19: शिमला के डेडिकेटेड DDU अस्पताल में क्लास फोर के कर्मचारी ले रहे कोरोना टेस्ट
शिमला के डीडीयू अस्पताल में सैंपलिंग पर सवाल.

कोरोना की जंग लड़ने के लिए बनाया गया डेडिकेटेड कोविड अस्पताल शुरु से ही विवादों में है. डेडिकेटेड अस्पताल में जहां सुविधाओं को लेकर शहरवासियों और राजनीतिक दलों ने कई सवाल उठाए हैं. वहीं अब अस्पताल में किए जा रहे कोरोना टेस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

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  • Last Updated: June 17, 2020, 11:38 AM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) का जोनल अस्पताल दीन दयाल उपाध्याय (DDU) एक बार फिर सुर्खियों में है. कोरोना की जंग से लड़ने के लिए बनाया गया डेडिकेटेड अस्पताल डीडीयू इस बार कोरोना टेस्ट को लेकर सुर्खियों में है. शहर के बीचोबीच स्थित डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल में क्लास फोर के कर्मचारी कोरोना मरीजों के टेस्ट ले रहे हैं. ऐसे में अब सवाल रोजाना किए जा रहे कोरोना टेस्ट को लेकर उठ रहे हैं. कोरोना टेस्ट ले रहे कर्मचारी दबी जुबान में प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर भी कई प्रश्न खड़े कर रहे हैं.

प्रशासन पर सवाल उठने शुरु
क्लास फोर के कर्मचारी भले ही कैमरे पर आने से डर रहे हैं लेकिन प्रशासन के आदेश पर बिना प्रशिक्षण के टेस्ट करने को मजबूर हैं. ऐसे में एक बार फिर प्रशासन पर सवाल उठने शुरु हो गए हैं. क्लास फोर के कर्मचारी प्रशासन के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं और प्रशिक्षित तकनीशियन और नर्सिज को अपना काम करवाने की मांग कर रहे हैं, क्लास फोर कर्मचारियों द्वारा प्रशासन पर लगाए आरोपों का अस्पताल प्रबंधन ने सिरे से खारिज किया है और गाइडलाइंस के तहत सभी स्वास्थय कर्मचारी कोरोना टेस्ट करने के लिए प्रशिक्षित किए गए हैं.

कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया- प्रबंधन
अस्पताल एमएस डॉ लोकिन्द्र शर्मा ने बताया कि कोरोना टेस्ट करने के लिए सभी स्वास्थय कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है. इसके लिए शिफ्टों में सभी कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात किया जाता है. उन्होंने बताया कि ड्यूटी को लेकर किसी तरह प्रशासन और कर्मचारियों के बीच कोई दरार नहीं है. ऐसे में सभी कर्मचारी प्रशिक्षित हैं, जिन्हें पीपीई किट पहनाकर ड्यूटी पर तैनात किया जाता है.



प्रशिक्षित कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई
कोरोना टेस्ट को लेकर कर्मचारी नेता भी प्रशासन के साथ मिलकर कर्मचारी और प्रशासन के बीच की तकरार को सिरे से खारिज कर रहे हैं. कर्मचारी नेता सुभाष धांटा का कहना है कि टेस्ट लेने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में करीब तीन चार सौ कर्मचारी हैं, जिन्हें कोविड-19 के चलते कोरोना टेस्ट लेने का प्रशिक्षण दिया गया है.

विवादों में अस्पताल
गौरतलब है कि कोरोना की जंग लड़ने के लिए बनाया गया डेडिकेटेड कोविड अस्पताल शुरु से ही विवादों में है. डेडिकेटेड अस्पताल में जहां सुविधाओं को लेकर शहरवासियों और राजनीतिक दलों ने कई सवाल उठाए हैं. वहीं अब अस्पताल में किए जा रहे कोरोना टेस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. यदि अस्पताल में क्लास फोर अप्रशिक्षित कर्मचारी टेस्ट ले रहे हैं तो सवाल यह है कि क्या रोजाना किए जा रहे 30 से 40 टेस्ट सच में सही तरीके से किए जा रहे हैं या फिर टेस्ट करने की प्रक्रिया गलत तरीके से की जा रही है. अब वे मरीज भी असमंजस में हैं कि उनका कोरोना टेस्ट सही किया गया है या फिर उसमें भी कोई खामी है.

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