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हिमाचल सरकार से नहीं मिला सहयोग, 400 करोड़ के निवेश से हाथ खींचे, CM को लिखा पत्र
Shimla News in Hindi

Amit Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 23, 2020, 5:00 PM IST
हिमाचल सरकार से नहीं मिला सहयोग, 400 करोड़ के निवेश से हाथ खींचे, CM को लिखा पत्र
ऊना में गार्बेज प्लांट लगना था. लेकिन जमीन नहीं मिल पाई और प्रोजेक्ट लटक गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

एडीसी ऊना अरिंदम चौधरी की मानें तो प्लांट लगाने के लिए भूमि चिन्हित की गई थी, लेकिन लोगों के विरोध के कारण उस भूमि पर प्लांट नहीं लग पाया.

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ऊना. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)  के ऊना जिले को कूड़े-कचरे से निजात दिलाने और उसी कचरे से बिजली, पानी और ईंधन बनाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है. योजना को लेकर जर्मनी (Germany) की एजी डॉटर्स कंपनी ने करीब डेढ़ साल पहले नगर परिषद ऊना (Una) के साथ एमओयू (MOU) साइन किया था.

ऊना की करीब 27 पंचायतों और 3 कस्बों का कूड़े-कचरे से बिजली, पानी और ईंधन तैयार करना था. लेकिन सरकार का सहयोग न मिल पाने के कारण एजी डॉटर्स कंपनी के चेयरमैन ने सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) को पत्र लिख इस प्रोजेक्ट को छोड़ने की बात की है.

भूमि की मांग की
प्रदेश सरकार बड़े-बड़े कार्यक्रम कर निवेशकों को लुभाने के प्रयास कर रही है, लेकिन इसके बिलकुल विपरीत ऊना जिला के लिए आने वाला 400 करोड़ का निवेश वापिस जाने की कगार पर पहुँच चुका है. जुलाई 2018 में ऊना जिला में एजी डॉटर्स नाम की जर्मनी कंपनी ने नगर परिषद ऊना के साथ एमओयू साइन करके सॉलिड वेस्ट एनर्जी प्रोजेक्ट लगाने की इच्छा व्यक्त की थी. इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ने सरकार से प्लांट लगाने के लिए 8 से 10 हजार स्क्वेयर मीटर भूमि की मांग की गई थी. इस प्लांट में ऊना शहर के साथ-साथ 27 पंचायतों और दो अन्य कस्बों से कूड़ा उठाकर उस कूड़े का दोहन कर उससे जीरो कार्बन बिजली, जीरो कार्बन डीजल व पीने का पानी बनाया जाना था.

फाइल इधर-उधर घूमती रही
दरअसल, इस प्रोजेक्ट को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कदमताल करते हुए एक गाँव में भूमि उपलब्ध करवाई गई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण उस स्थान पर प्रोजेक्ट नहीं लग पाया. उसके बाद अन्य स्थान पर भूमि के लिए अनेक बार फाइल इधर से उधर घूमती रही और बाद में उद्योग विभाग से बात चली और इस प्रोजेक्ट के लिए पंडोगा इंडस्ट्री एरिया में दो प्लॉट देखे भी गए और अधिकारियों ने इन्वेस्टर मीट के तहत मुख्यमंत्री के साथ वार्ता भी करवाई, लेकिन अब उन प्लॉट्स को देने का भी इंकार हो गया है. ऐसे में बिना भूमि इन्वेस्ट करना मुश्किल है और यदि सरकार भूमि नहीं देगी तो 400 करोड रुपए का निवेश कैसे किया जा सकता है?

सीएम से रिस्पांस का इंतजारइस प्रोजेक्ट को लगाने में सहयोग न मिलने के कारण कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखकर अंतिम बार इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठाई है और यदि मुख्यमंत्री की ओर से कोई रिस्पांस नहीं आता है तो कंपनी इस पत्र के माध्यम से ही समझौते को खत्म मानते हुए किसी अन्य प्रदेश का रुख कर लेगी. नगर परिषद ऊना के अध्यक्ष बाबा अमरजोत सिंह बेदी की मानें तो इस प्रोजेक्ट से ऊना जिला को कूड़ा मुक्त होने में काफी सहयोग मिल सकता है. अमरजोत बेदी ने सीएम से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठाई है.

यह बोले एडीसी
एडीसी ऊना अरिंदम चौधरी की मानें तो प्लांट लगाने के लिए भूमि चिन्हित की गई थी, लेकिन लोगों के विरोध के कारण उस भूमि पर प्लांट नहीं लग पाया. एडीसी ऊना ने कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट को औद्योगिक क्षेत्र में लगाया जा सकता है और कंपनी इसके लिए उद्योग विभाग से संपर्क कर सकती है.

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First published: January 23, 2020, 4:52 PM IST
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