गिरी पेयजल परियोजना में गाद बढ़ी, एक दिन छोड़कर हो रही पानी की सप्लाई

पर्यटन नगरी शिमला में रहने वाले लोगों और यहां आने वाले सैलानियों की प्यास बुझाने में गिरी पेयजल परियोजना की अहम भूमिका है.

Gulwant Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 13, 2019, 5:24 PM IST
गिरी पेयजल परियोजना में गाद बढ़ी, एक दिन छोड़कर हो रही पानी की सप्लाई
गिरी पेयजल परियोजना में गाद बढ़ने से बढ़ी शिमला जल प्रबंधन निगम की चिंता.
Gulwant Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 13, 2019, 5:24 PM IST
पर्यटन नगरी शिमला में रहने वाले लोगों और यहां आने वाले सैलानियों की प्यास बुझाने में गिरी पेयजल परियोजना की अहम भूमिका है. लेकिन इस पेयजल परियोजना के कैचमेंट एरिया में डाली जा रही मिट्टी ने शिमला वासियों की चिंता बढ़ा दी है. चिंता इस परियोजना से आ रहे मटमैले पानी को लेकर है. गिरी नदी के दोनों छोर पर निजी व सरकारी निर्माण कार्यों से निकल रही मिट्टी को अवैध रूप से डाला जा रहा है. अब बरसात में वह मिट्टी खिसककर सीधे नदी में पहुंच रही है. इससे पानी इतना गंदा हो गया है कि शहर के लिए पानी की पंपिंग को बंद करना पड़ा है. इसका नतीजा यह हुआ कि शहर में पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर करनी पड़ रही है.

मटमैला हुआ पानी



गिरी नदी से शिमला को पानी पहुंचाने के लिए तैयार की गई योजना से 20 एमएलडी पानी हर दिन आता है. लेकिन पहली बरसात ने ही शिमला जल प्रबंधन निगम के पसीने छुड़ा दिए हैं. इस नदी के पानी में आई मिट्टी के कारण सारा पानी मटमैला हो गया है और इसमें मिट्टी का स्तर इतना ज्यादा था कि पानी की पंपिंग तक बंद करनी पड़ी. ऐसा इसलिए क्योंकि पानी में आई भारी मात्रा में गाद से पंप तक जाम हो जाने लगे. इससे नुकसान होने का अंदेशा होने लगा.

मेयर समेत जल प्रबंधन निगम के अधिकारियों ने किया मौके का मुआयना .


पेयजल आपूर्ति बाधित

शिमला को पानी पहुंचाने वाली गिरी दूसरी बड़ी पेयजल परियोजना है. गुम्मा पेयजल के बाद यह दूसरे नंबर की परियोजना है. गुम्मा पेयजल की क्षमता 23 एमएलडी पानी की है, जबकि गिरी पेयजल परियोजना की क्षमता 20 एमएलडी की है. इसके अलावा चार छोटी पेयजल योजनाएं हैं, जहां से शिमला को पानी मिलता है. लेकिन इनकी क्षमता 5 एमएलडी से कम की है. कुल मिलाकर इन सभी स्रोतों से शहर को अधिकतम 50 एमएलडी से अधिक पानी हर दिन मिलता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से शहर में पानी की कमी हो गई और इसमें गिरी नदी में आई गाद का अहम रोल रहा.

पानी की पंपिंग करना मुश्किल हो गया
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शिमला जल प्रबंधन निगम के इंजीनीयर उमेश डोगरा ने कहा कि गिरी पेयजल परियोजना में आई गाद के कारण यहां से पानी की पंपिंग नहीं हो पा रही थी. पानी में गाद की मात्रा इतनी अधिक थी कि पंपिंग करना मुश्किल हो गया था. इसके लिए उन्हें पानी में आई गाद के बैठने का इंतजार करना पड़ा. जैसे-जैसे पानी में गाद कम होने लगी, पानी की पंपिंग की गई और शुक्रवार को यहां से 16.78 एमएलडी पानी पहुंचाया गया. उन्होंने कहा कि इस पंपिंग स्टेशन में गाद को साफ करने के प्रबंध हैं और इसमें फिल्टर भी अच्छे हैं. इसका ही नतीजा है कि शहरवासियों को साफ पानी पहुंचाया जा रहा है.

गाद का मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में

शिमला नगर निगम की मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि गिरी नदी में गाद आने के मामले को उन्होंने जिला प्रशासन के समक्ष उठाया है. उन्होंने खुद इस मामले पर डीसी शिमला अमित कश्यप से बात की है. उन्होंने अवैध रूप से डंपिंग करने वालों पर शिकंजा कसने को कहा है. उन्होंने कहा कि यदि गिरी नदी में अवैध रूप से डंपिंग न हो तो साफ पानी लोगों को मिलेगा.

गौरतलब है कि गिरी नदी से पानी को लिफ्ट कर शिमला पहुंचाया जाता है. इस स्रोत से पानी को लिफ्ट कर दो फेज में भेखलटी पहुंचाया जा रहा है. पहले चरण में 5400 मीटर ऊपर पानी पहुंचाया जाता है. वहां से दूसरे चरण में 2780 मीटर और ऊपर पानी भेखलटी पहुंचाया जाता है. फिर वहां से 23 किमी. ग्रेविटी में पानी संजौली पेयजल टैंक में पहुंचता है. इसके बाद लोगों को पानी को वितरित किया जाता है.

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