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शिमला में बंदरों का शिकार हुआ गुजराती शख्स, कहीं नहीं मिला एंटी रेबीज इंजेक्शन

Gulwant Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 4, 2019, 7:41 PM IST
शिमला में बंदरों का शिकार हुआ गुजराती शख्स, कहीं नहीं मिला एंटी रेबीज इंजेक्शन
गुजराती निवासी को बंदरों ने चेहरे पर नोंच लिया. उन्हें शहर के किसी भी सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज का इंजेक्शन नहीं मिला.

गुजरात के गगन अरोड़ा (Gagan Arora) अपने परिवार सहित शिमला में जाखू मंदिर (Jakhu Temple) हनुमान जी के दर्शन के लिए गए. वहां बंदरों (Monkey Attack) ने उनपर हमला बोल दिया.

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शिमला. गुजरात (Gujrati) से आये सैलानी को शिमला घूमने आना मंहगा पड़ गया है. एक तो उसे बंदरों के घाव सहने पड़े, वहीं दूसरा अस्पताल पहुंचे तो वहां पर भी उपचार के लिए जूझना पड़ा. दरअसल हुआ यूं कि गुजरात के गगन अरोड़ा अपने परिवार सहित हनुमान जी के दर्शन को जाखू मंदिर गए. वहां पहुंचे तो बंदर ने उनका चश्मा निकालने का प्रयास किया, वहीं गगन खुद को बचाने लगे तो इस दौरान बंदर (Monkey) ने उन पर हमला बोल दिया इससे उनके चेहरे काफी चोट लग गई. इस घटना के बाद डरे सहमे गगन परिवार वहां से जैसे-तैसे निकला और अस्पताल का पता पूछता हुआ रिपन अस्पताल पहुंचा लेकिन उसे वहां मायूसी हाथ लगी क्यूंकि वहां पर एंटी रेबीज (Anti Rabies injection) के इंजेक्शन नहीं थे.

जाखू मंदिर में हुआ हादसा

गनग अरोड़ा और उनके साथ उनके परिजन अनिल खुराना ने बताया कि जब वे जाखू मंदिर हनुमान जी के दर्शन करने पहुंचे तो पीछे से एक बंदर आया और उनका चश्मा छीनकर ले गया. उससे जब बचने का प्रयास किया तो उनकी आंख के साथ बंदर के नाख़ून का निशान पड़ गया. इस घाव का उपचार करने के लिए जब वह दीन दयाल अस्पताल पहुंचे तो वहां लंच का समय था तो डॉक्टरों ने कुछ देर रुकने को कहा जब लंच समाप्त हुआ तो वहां पर ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों ने एंटी रेबीज इंजेक्शन का टीका न होने की बात कही और टिटनेस का टीका लगाकर अपना पल्ला झाड़ दिया.



डॉक्टरों ने लगाया टिटनेस का टीका

गगन ने बताया कि इसके बाद जब वह प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC और के एनएच अस्पताल से संपर्क साधा तो उन्होंने भी एंटी रेबीज इंजेक्शन के ना होने की बात कही. इसके बाद उन्होंने निजी अस्पतालों और दवाई की दुकानों से संपर्क साधा तो वहां भी निराशा हाथ लगी. अंत में उन्हें टिटनेस का टीका लगाकर ही अपने घाव का इलाज करवाना पड़ा. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री शिकायत केंद्र 1100 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवाई और साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से भी बात करने की कोशिश की लेकिन सब जगह निशारा ही हाथ लगी.

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First published: November 4, 2019, 7:41 PM IST
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