गुड़िया रेप-हत्या मामला: CBI जांच के नाम पर अबतक खर्च हुए 21.70 लाख रुपये, उठे सवाल

इस मामले में सीबीआई की जांच शुरू से ही सवालों के घेरे में है.
इस मामले में सीबीआई की जांच शुरू से ही सवालों के घेरे में है.

गेस्ट हाउस का बकाया जमा करने के लिए पर्यटन निगम कई बार सीबीआई (CBI) और सरकार से पत्राचार कर चुका है. लेकिन एक रुपया भी जमा नहीं किया गया है.

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शिमला. बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड (Guria rape and murder) मामले में सीबीआई जांच (CBI Investigation) को तीन साल पूरा हो गए, लेकिन परिजनों को अभी भी इंसाफ का इंतजार है. इस बीच सीबीआई की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. सरकार जांच के नाम पर खर्च को लेकर चुप्पी साधी हुई है. ये जांच सरकार को खासी महंगी पड़ रही है. सीबीआई की टीम के शिमला में रहने का खर्च 21 लाख 70 हजार रुपये पार कर चुका है. सरकार के शानदार स्टेट गेस्ट पीटरहॉफ में सीबीआई की टीम ने 25 जुलाई 2017 से डेरा जमाया हुई है. पीटरहॉफ में सीबीआई के नाम पर कमरा नंबर 101, 102 और 103 अभी भी बुक हैं.

बीते 6 महीने में केवल एक बार आए अधिकारी
पीटरहॉफ प्रबंधन से जानकारी मिली है कि अब कभी-कभार ही सीबीआई के अधिकारी यहां पर आते हैं. लेकिन कमरे अब भी बुक हैं. बीते 6 महीने में केवल एक बार ही एक अधिकारी आया है. बकाया जमा करने के लिए पर्यटन निगम कई बार सीबीआई और सरकार से पत्राचार कर चुका है. लेकिन एक रुपया भी जमा नहीं किया गया है.

गुड़िया केस का ट्रायल जिला अदालत में चल रहा है और इससे जुड़े सूरज हत्याकांड का मामला चंडीगढ़ में सीबीआई कोर्ट में चल रहा है. ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी फंड का दुरूपयोग किया जा रहा है. बीते साल भी टैक्सी के किराए के भुगतान का मामला सामने आया था. वो करीब 64 हजार रुपये का था. इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी.
परिजन फिर से हाईकोर्ट की शरण में


गुड़िया के परिजन अबतक न्याय के लिए भटक रहे हैं. इंसाफ की आस में सुप्रीम कोर्ट से होते हुए अब दोबारा हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं. परिजन हाईकोर्ट की निगरानी में दोबारा जांच की मांग कर रहे हैं. गत 15 अक्टूबर को फिर से याचिका लगाई गई है.

सीबीआई ने साफ किया है कि इस जघन्य अपराध को करीब चार फुट के अनिल कुमार ऊर्फ नीलू ने अंजाम दिया है.

जांच पर सवाल
सीबीआई जांच पर अब भी सवाल उठ रहे हैं कि अकेला चिरानी क्या दुराचार और हत्या को अंजाम दे सकता है. डीएनए टेस्ट के बाद सीबीआई नीलू को मुख्य आरोपी मान चुकी है. इस अपराध में नीलू के अलावा अन्य लोगों के शामिल होने के सवाल पर सीबीआई खामोश है. सवाल ये भी है कि अगर जबरन रेप उसी स्थान पर हुआ था, जहां गुड़िया का शव मिला था तो कपड़े फटे क्यों नहीं थे? साथ में क्यों रखे हुए थे, मिट्टी तक नहीं लगी थी उनमें. ऐसा नजर आ रहा था जैसे खोलकर रखे गए थे.

शिमला पुलिस ने तो दावा किया था कि ये गैंगरेप है, गैंगरेप को साबित करने के लिए पुलिस ने जो सबुत जुटाए थे, उनका क्या हुआ. सीबीआई ने किस आधार पर ये मान लिया कि इस जघन्य अपराध को अकेले व्यक्ति ने अंजाम दिया है. गुड़िया की एक जुराब कहां है? पुलिस और अन्य लोगों से जब्त किए गए करीब 50 मोबाइल कहां हैं और उनसे क्या हासिल हुआ. क्या एक चिरानी को बचाने के लिए डीआईजी, एसपी से लेकर डीएसपी और अन्य पुलिसकर्मी जेल चले गए. एक आरोपी की कस्टडी में हत्या की गई? क्या चिरानी इतना प्रभावशाली है. इसके अलावा भी बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका जबाव नहीं मिल पा रहा है.

गुडिया केस में कब- क्या हुआ?
4 जुलाई 2017 को कोटखाई के महासू स्कूल की दसवीं की छात्रा लापता हुई
5 जुलाई को परिजनों ने छात्रा की तलाश की
6 जुलाई को गुड़िया(काल्पनिक नाम) की लाश नग्न अवस्था में हलाईला के जंगल में मिली, पुलिस ने की जांच शुरू की
7 जुलाई  को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि
10 जुलाई को सरकार ने आईजी जहूर जैदी के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया
11 जुलाई को चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई
13 जुलाई को पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 55 घंटे के भीतर मामला सुलझाने का दावा किया, 5 आरोपी गिरफ्तार किए गए
14 जुलाई को जनता भड़की, तत्तकालीन वीरभद्र सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश की
18 जुलाई को आधी रात को पुलिस हिरासत में एक कथित आरोपी मौत
19 जुलाई को कोटखाई थाना फूंका गया, केंद्र ने सीबीआई जांच की सिफारिश पर गौर नहीं किया, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए
22 जुलाई को सीबीआई ने दिल्ली में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए, जांच शुरू की
29 अगस्त को सीबीआई ने आइजी समेत आठ पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए
16 नवंबर को शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी गिरफ्तार
25 नवंबर को सीबीआई ने सूरज कस्टोडियल डेथ मामले पर एसआइटी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
13 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने कोटखाई से आरोपी नीलू को गिरफ्तार किया
25 अप्रैल 2018 को-सीबीआई ने हाईकोर्ट में फाइनल स्टेटस रिपोर्ट पेश की
29 मई को सीबीआई ने नीलू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
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