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    न्यूजीलैंड में सांसद चुने गए गौरव शर्मा के पिता ने हिमाचल बिजली विभाग से ली थी VRS

    हमीरपुर के गौरव शर्मा. (फोटो गौरव शर्मा के सोशल मीडिया अकाउंट ली गई है.)
    हमीरपुर के गौरव शर्मा. (फोटो गौरव शर्मा के सोशल मीडिया अकाउंट ली गई है.)

    गौरव कहते हैं कि 2014 के आम चुनाव में उन्होंने देश के पूर्व विदेश मंत्री और रक्षामंत्री फिल गॉफ के साथ काम किया था. उन्हीं से उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आने की प्ररेणा भी मिली. वह समाज में बदलाव लाना चाहते हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 21, 2020, 11:22 AM IST
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    शिमला. साल 1996 में डॉक्टर गौरव शर्मा के पिता जब परिवार सहित 250 डॉलर लेकर न्यूजीलैंड के लिए निकले थे तो उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा आने वाले समय में सांसद का चुनाव लड़ेगा और जीत हासिल करेगा. न्यूजीलैंड की लैबर पार्टी ने उन्हें ऑकलैंड के हेमिल्टन साउथ से आम चुनावों के लिए प्रत्याशी बनाया था और वहां से उन्होंने जीत दर्ज की. मूल रूप से हिमाचली 33 साल के गौरव शर्मा हमीरपुर जिले के हड़ेटा गांव से ताल्लुख रखते हैं. 12 साल की उम्र में वे अपने पिता के साथ न्यूजीलैंड चले गए थे. बतां दे कि 120 सदस्यों वाली संसद के लिए यहां आम चुनाव हुए हैं. इसमें मुख्य मुकाबला नेशनल और लेबर पार्टी के बीच था, जिसमें लैबर पार्टी को जीत मिली है.

    शिमला और धर्मशाला में की शुरूआती पढ़ाई

    ‘न्यूज18’ से खास बातचीत में गौरव ने बताया था कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई शिमला पब्लिक स्कूल और चेप्शली स्कूल से की. इसके बाद आधुनिक स्कूल धर्मशाला में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने ऑकलैंड से ही डॉक्टरेट की पढ़ाई की. डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान गौरव ने जलवायु परिवर्तन का न्यूजीलैंड पर प्रभाव विषय पर प्रेजेटेशन दी थी, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड में पहला पुरस्कार मिला. बाद में उन्हें वर्ल्ड हैल्थ आर्गेनाइजेनश, जीनेवा के साथ काम करने का भी मौका मिला. इस दौरान उन्होंने पब्लिक हेल्थ से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स में काम किया. बाद में उन्हें ‘यंग न्यूजीलैंडर ऑफ ईयर’ के सम्मान के लिए मनोनीत किया गया था.



    पिता ने प्रदेश बिजली विभाग से वीआरस ले ली थी
    गौरव ने बताया कि उनके पिता प्रदेश बिजली विभाग में एक्सईन थे. उन्होंने एच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी और न्यूजीलैंड चले गए. वहां छह साल के लंब संघर्ष के बाद उन्हें नौकरी मिली. इस दौरान उन्होंने समाजिक सरोकार के कामों हिस्सा लेने के अलावा टैक्सी चलाकर गुजारा किया. उनकी मां ने भी कम्युनिटी सर्विस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इससे उन्हें यहां काफी पहचान मिली.

    सामाजिक सहभागिता ने दिलाई पहचान

    गौरव शर्मा को हेमिल्टन के अलावा न्यूजीलैंड में समाजिक सहभागिता के कारण कारण काफी पहचान मिली. गौरव बताते हैं कि वह कई कम्युनिटी सर्विस संस्थाओं के सदस्य के रूप में काम किया. हेल्थकेयर, मेडिकल और रिफ्युजियों के लिए राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तक पर ये संस्थाएं काम करती थी. वह ऑकलैंड रिफ्युजी काउंसिल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भी रहे.

    हमीरपुर के गौरव शर्मा. (फोटो गौरव के सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई है.)


    छात्र राजनीति से लेकर मैनस्ट्रीम पॉलिटिक्स तक का सफर

    गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड में छात्र राजनीति में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 30 साल के गौरव बताते हैं कि हालांकि यह मैनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में यह उनका दूसरा चुनाव है. लेकिन वह पढ़ाई के दौरान यूनिवर्सिटी सीनेट में छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी रहे. इसके अलावा, मेडिकल एसोसिएशन और रिफ्युजी काउंसिल की सदस्यता के लिए भी उन्हें चुना गया. साथ ही उन्हें 2015 में पब्लिक हेल्थ और राजनीति मामले को लेकर ‘फुलब्राइट स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत यूएस भेजा गया, जहां उन्हें साल 2016 में जमीन स्तर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ चुनाव अभियान से जुड़ने और काम करने का मौका मिला.

    हमीरपुर के गौरव शर्मा. (फोटो गौरव के सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई है.)


    ‘समाज में बदलाव के लिए राजनीति में आया हूं’

    गौरव कहते हैं कि 2014 के आम चुनाव में उन्होंने देश के पूर्व विदेश मंत्री और रक्षामंत्री फिल गॉफ के साथ काम किया था. उन्हीं से उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आने की प्ररेणा भी मिली. वह समाज में बदलाव लाना चाहते हैं. क्योंकि राजनीति के जरिये ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है. साथ ही एक डॉक्टर की राजनीति और पब्लिक हेल्थ पॉलिसी मेकिंग में काफी कम सहभागिता होती है, मैं इस तथ्य को भी बदलना चाहता हूं.

    ‘घर आता हूं तो फर्राटेदार पहाड़ी बोलता हूं’

    गौरव ने बताया कि वह घर पर आज भी पहाड़ी भाषा में बात करते हैं. हिंदी के अलावा उन्हें थोड़ी बहुत पंजाबी और उर्दू भी आती है. साथ ही कहते हैं कि उन्हें भारतीय के साथ-साथ हिमाचली होने पर गर्व है. वह हमेशा ही भारतीय राजनीति और यहां हो रही तमाम घटनाओं को लेकर अवेयर रहते हैं. साथ ही हिमाचल में रह रहे अपने दोस्तों के साथ भी संपर्क में भी हैं.
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