Survey: पहाड़ के लोग कमजोर हो रहे, हिमाचल में बढ़ रहा मधुमेह, मोटापा और ब्लडप्रेशर

सांकेतिक तस्वीर.

Health Survey in Himachal: हिमाचल के 38.7 फीसद लोग मोटापे और 11.5 फीसदी आबादी मधुमेह से पीड़ित हैं. 45.5 फीसदी शहरी, 35.9 फीसदी ग्रामीण आबादी मोटापे की शिकार हो गई है और 31.2 फीसदी लोग हाइपरटेंशन की दिक्कत से जूझ रहे हैं.

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शिमला. आधुनिकता की होड़ में हिमाचल के वाशिंदे श्रम की दौड़ में पिछड़ते और फास्टफूड कल्चर में जकड़ते जा रहे हैं, यही बात है कि लोगों को मधुमेह( Diabetes) की बीमारी तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रही है और महिलाएं भी इसकी चपेट में आने लगी हैं। लोगों में मोटापा (Obesity) भी रफ्तार से बढ़ रहा है। यह चिंता की खबर है कि हिमाचल के करीब 39 फीसदी लोग ओवरवेट पाए गए हैं। यह खुलासा आईसीएमआर(ICMR) द्वारा प्रदेश में करवाए गए शोध में हुआ है. ICMR ने देशभर में मधुमेह, मोटपा और उच्च रक्तचाप से संबंधित को लेकर सर्वे करवाया था. देशभर में इसे तहत 1,13,106 लोगों पर सर्वे किया गया था इसके तहत हिमाचल में 3831 लोगों में बीमारियों को लेकर यह शोध किया गया था.

हिमाचल में इस प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक डॉ जितेंद्र मोकटा ने शोध के आंकड़े सावर्जनिक किए हैं। इन आंकड़ों ने डॉ मोकटा को भी हैरत में डाला है. क्योंकि उन्हें भी नहीं लगता था कि जो आंकड़े आए हैं, वह इतने अलार्मिंग हो सकते हैं. यह सर्वे सितंबर 2019-20 मार्च 2020 तक चला था और इसमें चयनित शहरी और ग्रामीण क्षेत्र सेटेलाइट के माध्यम से चुने गए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में भी मधुमेह और मोटापा तेजी से पांव पसार रहा है, जो चिंता का विषय है.

हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा मामले


डॉ. मोकटा के मुताबिक, हिमाचल में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा मामले हैं. उन्होंने कहा कि हिमाचल में 11.6 फीसदी पुरुष और 11.4 फीसदी महिलाएं मधुमेह से ग्रसित हैं. वहीं हिमाचल में कुल मिलाकर 11.5 फीसदी लोग इससे ग्रसित हैं.जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हैं. राष्ट्रीय औसत 9.8 है. हिमाचल में 14.3 फीसदी शहरी क्षेत्र में जबकि 11.2 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र में शुगर से पीड़ित हैं.जनजातीय क्षेत्र में यह औसत 11.2 फीसदी है. डॉ मोकटा इसे बहुत गंभीर मामला मानते हैं और इसे लेकर लोगों को और ज्यादा जागरुक होने की बात कहते हैं.उनके मुताबिक महिलाओं का शुगर की चपेट में आना चिंताजनक है और इसकी रफ्तार भी ज्यादा है.उनके मुताबिक हिमाचल के साथ लगता दूसरा पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड है, जहां मधुमेह की दर 9.5 फीसदी है, जो कि यहां से कम है.

हिमाचल में दो तिहाई लोग Inactive-डॉ मोकटा


डॉ मोकटा ने बताया कि हिमाचल में मोटापा भी तेजी से बढ़ रहा है. हिमाचल में 38.7 फीसदी लोग मोटापे की चपेट में है. करीब 39 फीसदी लोग ओवरवेट हैं. इनमें शहरी क्षेत्र में 45.5 और ग्रामीण क्षेत्रों में 36 फीसदी हैं.यह भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है.राष्ट्रीय औसत 27 फीसद है.उन्होंने बताया कि हिमाचल के लोए हैरानी वाली बात यह है कि यहां पर 61 फीसदी लोग इनएक्टिव हैं.प्रदेश में 33.9 फीसदी लोग ही एक्टिव हैं, जबकि 5 फीसदी लोग हाईली एक्टिव हैं. कुल मिलाकर दो तिहाई लोग इनएक्टिव हैं. हिमाचल के लिए चिंता वाली बात यह भी है कि यहां 54.6 फीसदी लोगों का पेट फूला हुआ है और यह कई बीमारियों को न्यौता देता है.इनमें भी 61.7 फीसदी शहरी और 51 ग्रामीण क्षेत्रों के लोग हैं.

50 फीसदी लोगों को बीपी का पता ही नहीं


डॉ मोकटा ने बताया कि प्रदेश में बीपी यानी ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ रही है.चिंता की बात यह है कि 50 फीसदी लोगों को पता भी नहीं है कि उन्हें बीपी है.ऐसे में जब रोग का पता ही नहीं है तो उपचार कैसे हो पाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 25 वर्ष से ऊपर की आयु के मरीज आ रहे हैं, जबकि बीपी के मरीज 20 वर्ष की आयु से आने शुरू हो गए हैं .उन्होंने कहा कि प्रदेश में 77 फीसदी लोगों का लिपिड भी सामान्य नहीं है.उन्होंने कहा कि खानपान की बदली हुई आदत और शारीरिक व्यायाम में कमी के कारण लोग मधुमेह, बीपी और मोटापे के शिकार हो रहे हैं.वहीं, रही सही कसर, फास्टफूड संस्कृति पूरी कर रही है. ऐसे में लोगों को संभलना होगा और अपने दैनिक जीवन में बदलाव लाने होंगे.