Helicopter Controversy: ‘हेलीकॉप्टर, गधे और घोड़े’ पर हिमाचल में BJP व कांग्रेस आमने-सामने

हिमाचल में सीएम के नए हेलीकॉप्टर को लेकर विवाद हुआ है.

हिमाचल में सीएम के नए हेलीकॉप्टर को लेकर विवाद हुआ है.

Helicopter Controversy: हिमाचल के शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने हेलीकॉप्टर खरीद पर सफाई देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार ने नए हेलीकॉप्टर एमआई-172 को लेने के लिए 17 सितंबर 2019 को टेंडर के माध्यम से मैसर्स स्काई वन एयरवेज लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2021, 7:33 AM IST
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शिमला. हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) के नए हेलीकॉप्टर पर जबरदस्त जुबानी जंग चल रही है. विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी सरकार को ट्रोल (Troll) किया जा रहा है. इस बीच गुरुवार को कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की तरफ से इस मामले पर सफाई दी गई. सफाई देने का जिम्मा शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज (Suresh Bhardwaj) को सौंपा गया था, जो कैबिनेट के फैसलों के बारे में मीडिया को ब्रीफ करते हैं.

सफाई देते-देते सुरेश भारद्वाज शब्दों की मर्यादा भी भूल गए. विपक्ष के आरोपों पर जबाव देते हुए भारद्वाज बोले कि विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि उनके मुख्यमंत्री किस पर बैठकर जाते थे, वो घोड़े पर बैठकर जाते थे या खच्चर पर या गधे पर बैठकर जाते थे. उन्होंने कहा कि यह सवाल पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान विधानसभा में पूछते रहे कि आखिर दिल्ली क्यों जाते हैं सीएम?

क्या बोले भारद्वाज?

भारद्वाज ने हेलीकॉप्टर के बारे में सफाई देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार ने नए हेलीकॉप्टर एमआई-172 को लेने के लिए 17 सितंबर 2019 को टेंडर के माध्यम से मैसर्स स्काई वन एयरवेज लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किया था. पूर्व की सरकारों में भी हेलीकॉप्टर की सेवाएं ली जाती रही हैं. लीज पर विभिन्न कंपनियों से हेलीकॉप्टर लिया जाता रहा है. इसका इस्तेमाल ट्राइबल एरिया में आवागमन के साथ उन क्षेत्रों से मरीजों को लाने में इस्तेमाल किया जाता रहा है और साथ ही आपदा के समय में हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री के लिए सेवाएं ली जाती हैं.
काफी पुराना हो गया था हेलीकॉप्टर

भारद्वाज ने कहा कि 2013 में पूर्व सरकार ने पवन हंस कंपनी का हेलीकॉप्टर लिया था, जो काफी पुराना हो गया था. उसका हर पुर्जा बदला गया था. एक बार इस्तेमाल करने के बाद हेलीकॉप्टर एक-ढेड़ महीने मरम्मत के लिए खड़ा रहता था. इसलिए सरकार ने 2020 मॉडल का नया हेलीकॉप्टर लेने का फैसला किया था. उस हेलीकॉप्टर का किराया 5 लाख 10 हजार रुपये प्रति घंटा था और इस हेलीकॉप्टर का किराया भी इतना ही है. उन्होंने कहा कि नया हेलीकॉप्टर कंपनी अब तक उपलब्ध नहीं करवा पाई है, जिसके चलते कंपनी पर प्रति माह 10 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है. इस देरी के चलते करार के तहत अब तक कंपनी को 8 करोड़ रुपये का जुर्माना किया जा चुका है. कंपनी की तरफ से 13 अप्रैल को सूचना दी गई है कि एमआई-172 हेलीकॉप्टर, चार्टर कारगो आईएल 76 दिल्ली पहुंच चुका है, कुछ औपचारकिताएं पूरी की जा रही हैं और 5 जून तक ये सरकार के लिए उपलब्ध हो पाएगा. हिमाचल के मंत्री ने कहा कि यह बड़ा हेलीकॉप्टर है. इसमें ज्यादा संख्या में लोग बैठ सकते हैं, पूरी प्रकिया पारदर्शी है और जनता है हित में है.

क्या बोला था विपक्ष?



नया हेलीकॉप्टर 5 साल हिमाचल सरकार की सेवा में लीज पर रहेगा. सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने कंपनी के साथ इस हेलीकॉप्टर को लेकर एमओयू किया है. इससे पहले पवन हंस कंपनी का हेलीकॉप्टर लीज पर था, लेकिन उसके साथ करार खत्म हो गया था. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जहां कर्ज में डूब रहा है, वहीं सीएम और मंत्री ऐश-ओ-आराम में डूबे हैं. सरकार की फिजूलखर्ची की वजह से प्रदेश बर्बादी की कगार पर खड़ा है.
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