हिमाचल में 7 लाख सुझाव: 62 फीसदी अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते हैं स्कूल
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हिमाचल में 7 लाख सुझाव: 62 फीसदी अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते हैं स्कूल
स्कूलों को खोले जाने को लेकर केंद्र सरकार योजना बना रही है.

राज्य परियोजना निदेशक ने बताया कि 4 से 7 अगस्त तक प्रदेश के 48 हजार शिक्षकों की ई-पीटीएम के जरिए अभिभावकों से सवाल पूछा गया था. जिसमें 7.05 लाख अभिभावकों ने जवाब दिया. 4.37 लाख अभिभावक फिलहाल स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं.

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शिमला/धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों (Govt Schools in Himachal) में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले 62 प्रतिशत अभिभावक फिलहाल स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं. कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते. बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने और ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर शिक्षा विभाग के हर घर पाठशाला कार्यक्रम के तहत अभिभावकों से यह सवाल पूछा गया था. समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हर घर पाठशाला के जरिए अभिभावकों को जागरूक भी किया गया,साथ ही बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए सहयोग मांगा.

ई-पीटीएम से पूछा था सवाल

कोरोना संकट के चलते हिमाचल में करीब साढ़े 5 महीनों से स्कूल बंद हैं. कोरोना के चलते ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है. अभिभावकों से बात करने के लिए ई-पीटीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य परियोजना निदेशक ने बताया कि 4 से 7 अगस्त तक प्रदेश के 48 हजार शिक्षकों की ई-पीटीएम के जरिए अभिभावकों से सवाल पूछा गया था. जिसमें 7.05 लाख अभिभावकों ने जवाब दिया. 4.37 लाख अभिभावक फिलहाल स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं. करीब 2 लाख अभिभावक छात्रों की कम संख्या वाले स्कूलों को खोलने के पक्ष में हैं, लेकिन चाहते हैं कि पूरी तरह सावधानी बरतते हुए ऐसे स्कूल खोले जाएं. कुछ अभिभावक शिफ्ट के साथ स्कूलों को खोलने की बात कर रहे हैं .



फिर से होगा संवाद
निदेशक ने बताया कि 92 अभिभावकों ने ई-पीटीएम को काफी उपयोगी बताया. अभिभावकों के साथ साथ छात्रों से भी संवाद कायम हुआ. पढ़ाई को लेकर परेशानी के साथ साथ सवाल-जबाव और चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद फिर से ई-पीटीएम का इस्तेमाल कर संवाद किया जाएगा.

कॉलेज परीक्षाओं का भी विरोध

हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्रध्यापक संघ के अध्यक्ष डा. सतीश ठाकुर व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों का कहना है कि कोरोना इस समय प्रदेश में बहुत अधिक बढ़ चुका है. ऐसे में एचपीयू द्वारा 17 अगस्त से करवाए जाने का शैडयूल जारी किया है. इतना ही नहीं, इसमें कोविड-19 के मरीज और कंवारटीन सेंटर के व्यक्ति को भी परीक्षा में भाग लेने की व्यवस्था करने की बात कही जा रही है. उनका कहना है कि कई क्षेत्रों को पूरी तरह से कंटनमेंट में रखा गया है. ऐसे में प्रदेश में किस प्रकार से परीक्षाओं का सफल संचालन हो पाएगा, इसे लेकर छात्रों के साथ-साथ प्रध्यापकों व अन्य स्टाफ को भी डर बना हुआ है. डॉ. सतीश ठाकुर का कहना है कि हिमाचल के पड़ोस व देश की अन्य सभी विश्वविद्यालयों ने फिलहाल सभी प्रकार की परीक्षाओं पर रोक लगा दी है. ऐसे में संघ ने सरकार व विवि से मांग उठाई है कि कोरोना संकट को देखते हुए उचित फैसला छात्रों व प्रदेश के हित में लिया जाए.
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