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हिमाचल बजट सत्र: सत्ता-विपक्ष में बढ़ी रार, निलंबन पर कानूनी विकल्प खोज रही कांग्रेस

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत 5 कांग्रेसी विधायकों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया.

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत 5 कांग्रेसी विधायकों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया.

Himachal Assembly budget: माकपा विधायक राकेश सिंघा ने पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और हंगामे को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी गई, जिस तरह से राज्यपाल का अभिभाषण हुआ वो तौर-तरीका सही नहीं था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 12:26 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा (Himachal Assembly) के बजट सत्र (Budget Session) के पहले दिन राज्यपाल से दुर्व्यवहार के आरोप में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत 5 कांग्रेसी विधायकों को पूरे सत्र के लिए निलंबित (Suspend) किया गया. शुक्रवार देर शाम को इन पांचों के खिलाफ बालूगंज थाने में दर्ज किया गया है.

मामले में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री (Mukesh Agnihotri), विधायक हर्षवर्धन चौहान, विनय कुमार, सतपाल सिंह रायजादा और सुंदर सिंह ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. आईपीसी की धारा-124, 323, 341, 34 और 504 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. विधानसभा के अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने इसकी पुष्टि की है.

मामला बढ़ता जा रहा है
निलंबन और एफआईआर के बाद सियासी तूफान खड़ा हो गया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष में रार बढ़ गई है. एक ओर विपक्ष सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है तो वहीं दूसरी ओर जयराम सरकार भी फिलहाल बख्शने के मूड में नजर नहीं आ रही है. 68 विधानसभा सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में वामपंथी दल माकपा का एकमात्र विधायक है. ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.
सत्ता पक्ष की ओर से ये कहा गया


इस मामले पर अब दोनों ओर से बयानबाजी का दौर जारी है. कैबिनेट मंत्री सुखराम चौधरी ने घटना को विधानसभा के इतिहास और हिमाचल की राजनीति में काला दिन करार दिया. उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में विरोध का अधिकार है लेकिन राज्यपाल का रास्ता रोकना, उनकी पीठ पर अभिभाषण की कॉपी थपथपाना, उनकी गाड़ी पर मुक्के मारना और अभद्र भाषा का प्रयोग करना शोभा नहीं देता. बंजार से भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि विपक्ष का व्यवहार निंदनीय है. भविष्य इस तरह की घटना न हो इसके लिए निलंबन प्रस्ताव लाया गया था. उन्होंने कहा कि विरोध ही करना था तो सीएम का करते या भाजपा का करते, राज्यपाल का विरोध सही नहीं है,इसके लिए कानून के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई. नियमों में रहकर विरोध करना चाहिए.

विपक्षी ये बोले
निलंबित कांग्रेसी विधायक सतपाल रायजादा ने कहा कि जनहित्त के मुद्दों पर अगर निलंबन सहना पड़े या जेल जाना पड़े,इसके लिए हमेशा तैयार हैं. उन्होंने कहा कि पूदे देश और जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, उनके गलत फैसलों पर सवाल उठाने वालों को भाजपा देशद्रोही करार देती है, ये लोकतंत्र की हत्या है. विधायक हर्षवर्धन ने सरकार से सवाल पूछा कि क्या उन्हें राज्यपाल और सीएम से सवाल पूछने का अधिकार नहीं है. क्या विपक्षी नेता उग्रवादी हैं या आतंकवादी हैं? उन्होंने कहा कि हंगामे के दौरान विधानसभा स्पीकर से कहा था कि हमारी बात सुने लेकिन स्पीकर ने कोई बात नहीं सुनी. हर्षवर्धन ने आरोप लगाया कि सरकार तानाशाहीपूर्ण तरीके से कार्य कर रही है, जिसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा. जनता से जुड़े मुद्दों को सदन के अंदर और बाहर उठाया जाएगा.

ये बोले सिंघा
माकपा विधायक राकेश सिंघा ने पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और हंगामे को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी गई, जिस तरह से राज्यपाल का अभिभाषण हुआ वो तौर-तरीका सही नहीं था,गंभीरता भी नहीं थी. सरकार अभिभाषण में हकीकत को छुपाना चाहती थी. साथ ही कहा कि पुलिस का रवैया भी सही नहीं था और सरकार का भी. सरकार विरोध को नजरअंदाज नहीं कर सकती. इस पूरे मामले पर सिंघा राज्यपाल और मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखेंगे.
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