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Himachal Election Result 2017: 32 साल पुरानी परंपरा तोड़ेगी जनता?

हिमाचल की सियासत में 1985 के बाद से कोई पार्टी अपनी सरकार रिपीट नहीं कर पाई है.
हिमाचल की सियासत में 1985 के बाद से कोई पार्टी अपनी सरकार रिपीट नहीं कर पाई है.

हिमाचल की सियासत में 1985 के बाद से कोई पार्टी अपनी सरकार रिपीट नहीं कर पाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2017, 7:33 AM IST
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हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हिमाचल की जनता 32 साल की परंपरा को कायम रखेगी या फिर इसे तोड़ते हुए नया इतिहास लिखेगी.

हिमाचल की सियासत में 1985 के बाद से कोई पार्टी अपनी सरकार रिपीट नहीं कर पाई है. 1985 के बाद यही चलन देखने को मिल रहा है. इस बार भी कई सर्वे में भाजपा को बहुमत मिलने की बात कही गई है.

1985-कांग्रेस की बनी सरकार
कांग्रेस-52 बीजेपी-7
हिमाचल की सियासत में टिक कर राज करना अब सियासी दलों के लिए सपना बन गया है. 1985 के बाद से हिमाचल में सिर्फ परिवर्तन की ही बयार बह रही है. 1985 में चुनाव में कांग्रेस ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई. इस चुनाव में बीजेपी मात्र सात सीटों पर सिमट गई.



1990-बीजेपी की बनी सरकार
बीजेपी-46, कांग्रेस-9
1990 चुनाव में परिवर्तन की लहर चली और बीजेपी ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की. पार्टी ने 68 में 46 सीटों पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस मात्र नौ सीटों पर सिमट गई. बीजेपी की जीत के साथ शांता कुमार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. लेकिन यह सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई. 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद शांता कुमार की सरकार गिर गई. प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया.

1993 –कांग्रेस की बनी सरकार
कांग्रेस-52, बीजेपी-8
1993 के चुनाव में हिमाचल में कांग्रेस की सरकार आई. वीरभद्र सिंह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस ने 67 सीटों पर चुनाव लड़ा और 52 पर जीती जबकि बीजेपी सिर्फ आठ सीटें जीत पाई.

1998-बीजेपी की बनी सरकार
बीजेपी-31+ हिविकां-5+अन्य-1, कांग्रेस-31
1998 के चुनाव में फिर बाजी पलट गई. बीजेपी सत्ता में आई. इस बार कांग्रेस और बीजेपी ने 31 -31 सीटें जीतीं. बहुमत किसी के पास नहीं था. सुखराम की पार्टी हिमाचल विकास कांग्रेस किंग मेकर बनी. हिविकां ने अपने पांच विधायकों के साथ बीजेपी का समर्थन कर दिया. बीजेपी को निर्दलीय रमेश धवाला का समर्थन भी मिल गया. इस तरह 1998 में बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई. प्रेम कुमार धूमल पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

2003 –कांग्रेस की सरकार बनी
कांग्रेस-43 ,बीजेपी-16
2003 में फिर बाजी पलटी. जनता ने बीजेपी से सत्ता छीन कर कांग्रेस को सौंप दी. वीरभद्र सिंह फिर हिमाचल के मुख्यमंत्री बने. इस बार कांग्रेस ने 68 में 43 सीटों पर कब्जा किया. प्रदेश में 77 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ, जिसमें से 41 फीसदी मत कांग्रेस के कब्जे में गए. नतीजा ये हुआ कि बीजेपी 16 सीटों पर सिमट गई.

2007-बीजेपी की सरकार बनी
बीजेपी-43 कांग्रेस-23
2007 में फिर सत्ता विरोधी लहर उठी जिसमें कांग्रेस के पांव उखड़ गए. इस बार प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ. इसमें 43 फीसदी से ज्यादा वोट बीजेपी को पड़े. बीजेपी ने 41 सीटें जीतीं. धूमल दूसरी बार मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस सिर्फ 23 सीटों पर सिमट गई.

2012-कांग्रेस की सरकार बनी
कांग्रेस -36, बीजेपी-26
2012 में कांग्रेस फिर सत्ता में लौटी और 68 में 36 सीटों पर कब्जा किया. बीजेपी 26 सीटों पर सिमट गई. पांच सीटें आजाद उम्मीदवारों ने जीतीं, जबकि महेश्वर सिंह की हिमाचल लोकहित पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई.
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