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मॉनसून सत्र: वीरभद्र सिंह को याद किया, सीएम बोले-दिलों में राज करने वाले नेता थे

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को दो मौजूदा और तीन पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि दी गई है.

Himachal Monsoon Session: 23 जून, 1934 को रामपुर बुशहर में जन्में पूर्व सीएम का 8 जुलाई को 87 साल में दुखद निधन हुआ. उन्होंने 6 बार प्रदेश में मुख्यमंत्री पद और 3 बार केंद्र में मंत्री पद को भी संभाला. वह 5 बार लोकसभा तथा 9 बार विधानसभा के लिए चुने गए.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को दो मौजूदा और तीन पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके किए कार्यों को याद किया. सदन में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, विधायक नरेंद्र बरागटा, पूर्व विधायक मोहन लाल, राम सिंह और अमर सिंह चौधरी के निधन पर श्रद्धांजलि दी गई. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने तीन पूर्व और दो मौजूदा सदस्यों के निधन पर सदन में शोकोद्गार प्रस्ताव लाया. उन्होंने कहा कि बजट सत्र और मानसून सत्र के बीच इन पांच सदस्यों का निधन हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में जिनका राजनीतिक जीवन सबसे लंबा रहा, छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह आज हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने कहा कि स्व. वीरभद्र सिंह पांच बार लोकसभा के सदस्य, चार बार केंद्र में मंत्री और 9 बार विधानसभा के सदस्य चुने गए तथा छह बार मुख्यमंत्री रहे.

क्या बोले सीएम जयराम
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा है कि वीरभद्र सिंह ने जमीन से जुड़कर आम आदमी को अपने साथ जोड़ा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विकास में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि भले ही वीरभद्र सिंह के साथ उनके वैचारिक मतभेद रहे हों, लेकिन सार्वजनिक जीवन में वह सरल और सहज थे. जयराम ठाकुर ने यह बात विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शोकाद्गार प्रस्तुत करते हुए कही. उन्होंने मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा, पूर्व विधायक मोहन लाल, राम सिंह और अमर सिंह चौधरी के निधन पर भी शोक प्रकट किया. उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी आगे बढ़ी और बहुत से नेता उनके कारण राजनीति में आगे बढ़ आए. वह सच में लोगों के दिलों पर राज करने वाले नेता थे. उन्होंने कहा कि 23 जून, 1934 को रामपुर बुशहर में जन्में पूर्व सीएम का 8 जुलाई को 87 साल में दुखद निधन हुआ. उन्होंने 6 बार प्रदेश में मुख्यमंत्री पद और 3 बार केंद्र में मंत्री पद को भी संभाला. वह 5 बार लोकसभा तथा 9 बार विधानसभा के लिए चुने गए. पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ बिताए गए लम्हों को याद करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए जब वह उनके क्षेत्र में आए, तो स्थानीय विधायक होने के नाते उन्हें मंच पर स्थान दिया. इससे उनके व्यक्तित्व के बारे में पता चलता है. जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्य सचेतक दिवंगत नरेंद्र बरागटा का भी 68 साल की आयु में दुखद निधन हुआ. उन्होंने कहा कि वर्ष, 1952 को जन्में नरेंद्र बरागटा 3 बार विधायक निर्वाचित हुए तथा 2 बार मंत्री व 1 बार चीफ सचेतक रहे. उनका बागवानी के क्षेत्र में सराहनीय योगदान रहा. इसके अलावा उन्होंने पूर्व विधायक अमर सिंह, राम सिंह व पूर्व मंत्री मोहन लाल के निधन पर भी मु यमंत्री ने शोक जताया.

सीएम जयराम ठाकुर का स्वागत करते हुए मंत्री सुरेश भारद्वाज.

विपक्ष ने रिज पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमा स्थापित करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री ने शोकोद्गार प्रकट करते हुए राज्य सरकार से मांग की कि शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा को स्थापित किया जाए. इसके अलावा कई महत्वपूर्ण संस्थानों का नामकरण भी उनके नाम से किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को किसी दल विशेष से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. उनका रुतबा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसा था. उन्होंने कहा कि निजी आवास हॉलीलॉज के दरवाजे हमेशा सभी लोगों के लिए खुले होते थे. यहां पर कोई भी उनसे बिना समय लिए मिल सकता था.

क्या बोले मुकेश
अग्निहोत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री के जीवन से जुड़ी एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार नालागढ़ से 2 बेटियां उनसे रोते हुए मिलने के लिए आई थी. इसमें से नर्सिंग करने वाली लड़की के पास फीस के पैसे नहीं थे तो दूसरी के पास आई.टी.आई. की फीस नहीं थी. इस पर वीरभद्र ने नर्सिंग करने वाली लड़की को अपने खाते से पूरी फीस दी, जबकि दूसरी लड़की की फीस को विभाग के निदेशक से बात करके माफ करवाया. उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह का पर्वतीय व्यक्तित्व रहा. हालांकि वह राजा के परिवार में पैदा हुए, लेकिन उन्होंने लोगों के दिलों पर राज किया. वह सत्ता में हो या न हो उनके व्यवहार में कोई भी परिवर्तन नहीं होता था. उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी के साथ काम किया. ऐसे में डा. यशवंत परमार हिमाचल निर्माता थे तो वीरभद्र आधुनिक निर्माता थे. वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में विकास के रंग भरे व दलगत राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्रवाद और जातिवाद की खाई को पाटने का काम किया. उन्होंने हिमाचल में गत्ते की पेटियां शुरू करने और माता-पिता भरण-पोषण विधेयक को लाया. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोकायुक्त को लाने के अलावा मुख्यमंत्री को भी इसके दायरे में लाया. वह धर्मांतरण पर कानून लाए और हिमाचल की हिस्सेदारी के लिए सुप्रीम कोर्ट गए. उन्होंने सचेतक नरेंद्र बरागटा के निधन पर शोक प्रकट करते हुए बागवानी के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया.

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